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क्या होना चाहिए दूसरी तिमाही के लिए प्रेगनेंसी डाइट चार्ट ?

Prasoon Pankaj
गर्भावस्था

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया May 14, 2019

क्या होना चाहिए दूसरी तिमाही के लिए प्रेगनेंसी डाइट चार्ट

दूसरी तिमाही (second trimester) गर्भावस्था के चौथे महीने से शुरू होता है। इस महीने में गर्भवती को सिरदर्द, उल्टी, मतली, सूजन व नींद आदि की समस्या दूर हो जाती है। इस महीने में आकर पेट बाहर आने लगता है। इस महीने में प्रेग्नेंट को ज्यादा शारीरिक दिक्कत तो नहीं होती, लेकिन खुद को व पेट में पल रहे शिशु को स्वस्थ रखने के लिए इस महीने में आपको अच्छे व पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए। अच्छा आहार बच्चे के बेहतर विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

अगर आप भी प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही में हैं, तो आपके लिए यह ब्लॉग काफी उपयोगी होगा। यहां हम बता रहे हैं कि आखिर आपको इस अवस्था में किस तरह का आहार लेना चाहिए और किसका सेवन नहीं करना चाहिए। [इसे भी पढ़ें - प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में कैसा हो आहार ?]

गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में किस तरह का आहार लेना चाहिए? / What to Eat in Second Trimester Pregnancy in Hindi

इस अवस्था में आपको काफी भूख लगने लगती है। भूख की वजह से आप ज्यादा खाना खाती हैं, लेकिन खाने में पौष्टिक आहार जरूरी है। ताकि आपके गर्भ को और आपको किसी भी तरह का नुकसान न हो। आइए जानते हैं कि कौन सा आहार आपके लिए बेहतर होगा।

  1. कैल्शियम – वैसे तो गर्भावस्था के हर महीने व अवधि में कैल्शियम का सेवन बहुत जरूरी है, लेकिन दूसरी तिमाही में इसका महत्व और बढ़ जाता है। इससे शिशु की हड्डी का तेजी से विकास होता है और हड्डियां मजबूत होती हैं। इससे आपको भी ऊर्जा मिलेगी। इसलिए अपने आहार में इसे जरूर शामिल करें। कैल्शियम के लिए आप दूध व दूध से बने उत्पादों को ले सकती हैं।
     
  2. विटामिन डी – आपको अपने आहार में विटामिन डी भी शामिल करना चाहिए। दरअसल यह कैल्शियम को अवशोषित करता है। अंडे, तैलीय मछली और लाल मांस से आपको विटामिन डी मिलेगा।
     
  3. प्रोटीन – दूसरी तिमाही में आपके लिए प्रोटीन का सेवन भी बहुत जरूरी है। दरअसल इस अवधि में बच्चे का विकास होने लगता है और प्रोटीन उसके लिए भी आवश्यक होता है। प्रोटीन के लिए आप अपने आहार में चिकन, मछली, अंडे को शामिल कर सकती हैं।
     
  4. फोलिक एसिड – इस अवस्था में फोलिक एसिड युक्त आहार का सेवन करने से भी गर्भवती को काफी फायदा होता है। फोलिक एसिड के लिए आप हरी मटर, मूली के पत्ते, हरी पत्तेदार सब्जियां, पालक, सरसों का साग, मीठे नींबू, संतरा, खरबूजा, टमाटर का सेवन कर सकती हैं।
     
  5. आयरन युक्त आहार – बच्चे के विकास व आपको अपने शरीर में 4-5 लीटर अधिक खून बनाने के लिए आयरन युक्त आहार काफी अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा यह एनीमिया व संक्रमण रोकने में भी मदद करता है। ऐसे में आपको इसका सेवन दूसरी तिमाही में जरूर करना चाहिए। आयरन के लिए आप आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, मल्टीग्रेन ब्रेड और अनाज के अलावा दालें, फलियां, सूखे मेवे, चिकन, मछली व पूरी तरह पके अंडे का सेवन कर सकती हैं।
     
  6. मैग्नीशियम युक्त भोजन – दूसरी तिमाही में इसके सेवन से शरीर की ऐंठन कम होती है और बच्चे की हड्डियां भी मजबूत बनती हैं। आपको इसे भी अपने आहार में जोड़ना चाहिए। मैग्नीशियम के लिए आप दलिया, केले, किशमिश, एवोकैडो, बादाम, काजू, बीन्स, कद्दू व फलियां आदि ले सकती हैं।
     
  7. फाइबर युक्त आहार – गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में फाइबर की उचित मात्रा का सेवन काफी फायदेमंद होता है। आप भी अगर इस अवस्था में हैं, तो अपने आहार में इसे जरूर शामिल करें। फाइबर के लिए आप साबुत अनाज, ओट्स, हरी पत्तेदार सब्जियां व जई आदि का सेवन कर सकती हैं।
     
  8. विटामिन सी – प्रेग्नेंसी के दौरान विटामिन सी का सेवन आपके बच्चे की मांसपेशी को हड्डी से जोड़ने वाली नसों व हड्डियों और त्वचा के लिए काफी फायदेमंद है। ऐसे में आपको भी इसका सेवन जरूर करना चाहिए। विटामिन सी के लिए आप खट्टे फल जैसे कि संतरे, अंगूर व नींब को आहार में शामिल करें। इसके अलावा कीवी, जामुन, अमरूद, कैंटपूल, अनानास, कद्दू, स्क्वैश, पालक, ब्रोकली आदि का सेवन कर सकती हैं।
     
  9. ओमेगा 3 तेल – दूसरी तिमाही में आपके बच्चे के मस्तिष्क के विकास के लिए ओमेगा 3 तेल काफी कारगर होता है। इसलिए आपको इसका सेवन जरूर करना चाहिए। ओमेगा 3 तेल के लिए आप अपने आहार में सरसों के तेल, उरद दाल, मछली के तेल, चिया के बीज, अखरोट, मछली की रोइ (अंडे), सोयाबीन, फूलगोभी, ब्रोकली, पालक, हर्ब्स, लौंग व अजवायन को आहार में शामिल कर सकती हैं।
     
  10. फल खूब खाएं – फलों का सेवन चौथे महीने में खास महत्व रखता है। फलों में विटामिन और खनिज भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। इसके अलावा इसमें पानी व फाइबर की मात्रा भी काफी होती है। इस अवधि में गर्भवती को इन सब चीजों की काफी जरूरत होती है। ऐसे में चौथे महीने में फलों का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए।

गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में क्या न खाएं / What Not to Eat in Second Trimester In Hindi

इस अवधि में अच्छे आहार पर ध्यान देने के साथ-साथ आपको कुछ सावधानी बरतने की भी जरूरत है। यानी आपको कुछ ऐसे आहारों से दूर रहना होगा, जिनसे आपको व बच्चे को नुकसान पहुंच सकता है। आइए जानते हैं कि दूसरी तिमाही में कौन से आहार आपको नहीं लेने चाहिएं। [पढ़ना चाहिए - कैसा होना चाहिए गर्भवती महिला का खान पान?]

  1. मैदा – इस अवस्था में कब्ज व अपच की समस्या अधिक रहती है। ऐसे में चौथे महीने में आपको मैदे से बनी चीजें खाने से परहेज करना चाहिए। मैदा पाचन को खराब करता है। ऐसे में कब्ज की समस्या और बढ़ सकती है।
  2. सूखे मेवे से भी रहें दूर – चौथे महीने में गर्भवती महिला को सूखे मेवे का सेवन करने से भी बचना चाहिए। इससे भी बच्चे को नुकसान पहुंच सकता है।
     
  3. बाहर का खाना – गर्भावस्था के किसी भी महीने में बाहर का खाना खाने से परहेज करना चाहिए, लेकिन बात अगर चौथे महीने की है तो इस बात पर खास ध्यान देने की जरूरत है। बाहर का खाना सफाई से न बना हो तो इससे विषाक्ता की दिक्कत हो सकती है।
     
  4. सॉफ्ट चीज – आप प्रेग्नेंट हैं और चौथे महीने में हैं, तो आपको सॉफ्ट चीजें खाने से भी परहेज करना चाहिए। दरअसल यह गैर पाश्चरीकृत दूध से बनता है। इसमें ऐसे बैक्टीरिया होते हैं, जो पेट में पलने वाले शिशु को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
     
  5. उच्च मरकरी की मछली – यूं तो गर्भावस्था के चौथे महीने में मीट व मछली खाने से फायदा होता है, लेकिन इस दौरान इस बात का ध्यान रखें कि मछली उच्च मरकरी की न हो। इससे पेट में पल रहे बच्चे को नुकसान हो सकता है।
  6. मुलेठी – दरअसल प्रेग्नेंसी के चौथे महीने में मुलेठी का सेवन करने से बच्चे का दिमागी विकास प्रभावित होता है। यह बच्चे को काफी नुकसान पहुंचा सकता है, ऐसे में इसे आहार में शामिल नहीं करना चाहिए। [जरूर पढ़ें - प्रेग्नेंसी के दौरान कितनी मात्रा में चाय-कॉफी का सेवन करना चाहिए]

 

जैसा कि हमने बताया कि दूसरी तिमाही गर्भावस्था के लिए अहम अवधि होती है। दरअसल इसी समय से बच्चे का विकास शुरू होने लगता है। उसके विकास में किसी तरह की दिक्कत न हो, इसके लिए जरूरी है कि आप बेहतर व पौष्टिक आहार लें। 

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