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शिक्षण और प्रशिक्षण

जब हो आपका बच्चा डिप्रेशन में, तो ऐसे संभालें उसे ऐसे

Deepak Pratihast
1 से 3 वर्ष

Deepak Pratihast के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Sep 09, 2020

जब हो आपका बच्चा डिप्रेशन में तो ऐसे संभालें उसे ऐसे
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

समय बदला है। जीवनशैली भी बदल गई है। माहौल हमेशा आपके अनुकूल नहीं होता है। यदि ऐसे में आपके बच्चे में भी डिप्रेशन के लक्षण दिखें, तो चैंकिएगा नहीं। न ही घबराएं। आजकल यह सामान्य सी बात हो गई है। कई ऐसी बीमारियां हैं, जो पहले अधिक उम्र में होती थी, अब छोटे उम्र के बच्चोें में भी हो रही है। घर में जब कोई दूसरा नन्हा-सा मेहमान आता है, तो पहले बच्चे पर पहले जैसा अटेंशन नहीं रह पाता है। यह काॅमन बात है। एकाएक अटेंशन नहीं मिलने की वजह से कई बार आपका दुलारा भी डिप्रेशन में चला जाता है।

आजकल बड़े पैमाने पर तकनीक का इस्तेमाल बच्चे कर रहे हैं। तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता बच्चों के तनाव की बड़ी वजह है। स्कूल में पढ़ाई का ज्यादा दबाव भी बच्चों को डिप्रेशन में डाल रहा है। इतना ही नहीं, जब आपका दुलारा नया-नया प्ले स्कूल जाने को खुशी-खुशी तैयार होता है, तो वहां कुछ शरारती बच्चे उसे ज्यादा तंग करने लग जाते हैं। आपका बच्चा शांत है और उन्हें जबाव नहीं दे पाता है, तो उस परिस्थिति में भी उसे डिप्रेशन हो सकता है। स्कूल में बच्चे को बुली करने पर आत्म-सम्मान को झटका लगता है। इससे भी कई नन्हें-मुन्ने डिप्रेशन में चले जाते हैंऐसे में सवाल उठता है कि आप अपने बच्चों में कैसे पता कर पाएंगे कि उसे डिप्रेशन तो नहीं है ? आपको देखना होगा कि कहीं आपका बच्चा अकेला तो नहीं रहने लगा है ? घरा के किसी कोने में गुमसुम-सा ? चिडचिडा भी हो सकता है ? रात में उसे देर तक नींद नहीं आती है ? हो सकता है, आपने गौर नहीं किया हो, लेकिन वह रात में बार-बार उठता है ? ऐसे एक नहीं, कई सारे लक्षण होते हैं। इन्हें आपको समझना होगा।

बच्चों में डिप्रेशन के लक्षण

- बार-बार वह स्कूल न जाने की लगातार जिद करने लगे।

- स्कूल में वह दोस्त न बना पाए। गली-मोहल्ले में अपने उम्र के बच्चों के साथ घुल  मिल न पाए।

- बात-बात पर उसमें चिड़चिड़ापन दिखे।

- कुछ भी उसे कहें वह गुस्सा करने लग जाए।

- घर में भी अपने लोगों से बात करना बंद कर दे।

- भूख कम या ज्यादा लगना, ज्यादा या कम नींद आना।

- उसे बार बार रोने का मन करने लगे।

- ध्यान लगाने में उसे दिक्कत होने लगे।

- पेट दर्द या सिरदर्द होने की शिकायत करे।

- उसका वजन लगातार कम होता जाए।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के अनुसार, 0.4-2.5 प्रतिशत बच्चे डिप्रेशन से ग्रस्त हैं। अगर बच्चे में उदासी के लक्षण लगातार एक साल तक बने रहते हैं तो इसे डिस्थायमिया (Dysthymia) कहते हैं। डिस्थायमिया से पीड़ित 10 प्रतिशत बच्चों में डिप्रेशन देखने को मिलता है।

कैसे छुटकारा दिलाएं डिप्रेशन से

- आप अपने दुलारे को गौर से देखें। यदि उसमें यह लक्षण हो, तो समय रहते सतर्क हो जाएं।
- आप उसके कारणों को समझकर उसे जड़ से दूर कर सकते हैं।
- माता-पिता से बढकर
- घर में सकारात्मक माहौल रखें।
- बच्चों को डांटे नहीं, प्यार से समाझाएं।
- अपने बच्चे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं।
- धीरे-धीरे सकारात्मक माहौल बनाएं, जिससे बच्चा डिप्रेशन के नकारात्मक प्रभाव से बाहर निकलने लगेगा।
- उसके साथ घूमें, गेम खेलें, खाना बनाएं और कोई मजेदार फिल्म देखें।

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इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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