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गर्भावस्था में कितनी मात्रा में चाय-कॉफी लेना चाहिए ?

Sadhna Jaiswal
गर्भावस्था

Sadhna Jaiswal के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Mar 29, 2020

गर्भावस्था में कितनी मात्रा में चाय कॉफी लेना चाहिए
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

आज के बदलते समय में गलत खान-पान की वजह से भी गर्भपात की समस्याएं बढती जा रही है और अक्सर हम ये जान भी नहीं पाते है की ऐसा क्यों हो रहा है। शायद आपको यकीन ना हो की बहुत आधिक चाय और कॉफ़ी पीने से गर्भपात होने के आसार बढ़ जाते है। अगर ऐसी चीजो की आपको लत है भी तो ऐसे समय में आपको उसे जरुर कम कर देना चाहिए, जिससे आपको आगे चलकर किसी भी समस्या का सामना न करना पड़े।गर्भावस्था में चाय और कॉफ़ी का सेवन बहुत अच्छा नहीं माना जाता है।

प्रेगनेंसी में चाय और  कॉफ़ी के ज्यादा सेवन से महिला और उसके होने वाले शिशु पर इसका बुरा असर देखने को मिल सकता है। अगर आप रोजाना चाय या कॉफ़ी लेती है तो इसे एकदम से तो बंद नहीं किया जा सकता लेकिन हाँ, आपको इसे कम जरुर कर देना चाहिए। आप एक शिशु को जन्म देने जा रही है।

गर्भावस्था में कितनी मात्रा में चाय-कॉफी लेना चाहिए? / How Much Tea & Coffee in Pregnancy in Hindi?

प्रेगनेंसी में चाय या कॉफी पीने से पहले इन चीज़ो को जान लेना बहुत आवश्यक है। अवश्य पढ़ें..

  • गर्भावस्था में आपको एक दिन में 200 मिली ग्राम से अधिक चाय या कॉफ़ी का सेवन नहीं करना चाहिए। अगर आप एक दिन में 3-4 कप कॉफ़ी या चाय पीती है तो गर्भावस्था के दौरान आपको इसे कम कर देना चाहिए, एक दिन में आप 1-2 कप चाय या कॉफ़ी ही ले सकती है और हलकी चाय या कॉफ़ी ले।    
     
  • गर्भावस्था में हलकी चाय या हलकी कॉफ़ी पीने के कुछ फायदे भी हो सकते है।  
     
  • मूड बदलने के लिए गर्भावस्था में कई परेशानियां आती है जैसे उल्टी, मिचली, मुंह का स्वाद भी ठीक नहीं रहता ऐसे में हलकी चाय पीने से किसी भी तरह के मूड को सही कर सकती है। गर्भावस्था में वैसे तो चाय या कॉफ़ी का सेवन नुकसानदेह होता है लेकिन कम मात्रा में लेने से कुछ चीजो में ये फायदेमंद भी साबित हुई है।
     
  • सर्दी खांसी बुखार में: गर्भावस्था में सर-दर्द और हल्के बुखार की समस्या आम होती है। ऐसे में कोई पेन किलर या बुखार की दवाई लेने की बजाय आप तुलसी, अदरक वाली हलकी चाय भी ले सकती है।  इससे आपको बहुत राहत मिलेगी और हो सकता है की आपको दवाई की जरुरत भी ना पड़े।  
     
  • थकान और तनाव में: गर्भावस्था के दौरान अगर आप थकावट, गुस्सा या फिर खुद को आरामदायक महसूस नहीं कर रही है तो भी आप हलकी मात्रा में चाय या कॉफ़ी का सेवन कर सकती है। लेकिन आप इस चीज का ध्यान रखें की आपको एक दिन में 200 मिली ग्राम से ज्यादा चाय या कॉफ़ी का सेवन नहीं करना है।  

गर्भावस्था में 200 मिली ग्राम से ज्यादा चाय या कॉफ़ी लेने के नुकसान

प्रेगनेंसी में चाय या कॉफी पीने से होने वाले इन नुकसानों को जान लेना बहुत आवश्यक है।अवश्य पढ़ना चाहिए ।

  • भ्रूण के विकास पर असर:  अधिक मात्रा में चाय या कॉफ़ी पीने से इसमें मौजूद कैफीन गर्भवती महिला और होने वाले शिशु के स्वास्थ पर असर डालता है। रोजाना ज्यादा चाय या कॉफ़ी पीने से बच्चे का वजन कम हो सकता है।
     
  • गर्भपात होने का खतरा: गर्भावस्था के दौरान बहुत अधिक मात्रा में चाय या काफी का सेवन से गर्भपात होने का खतरा भी बढ़ सकता है। चाय और कॉफ़ी में कैफीन, एल थायनीन और थियोफाईलिन भी पाया जाता है, यह सभी तत्व शरीर में उत्तेजना को बढ़ाते है जो की गर्भावस्था के दौरान ठीक नहीं होता।    
  • भूख ना लगना: गर्भावस्था के दौरान महिला को संतुलित आहार और अधिक पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। ऐसे में ज्यादा चाय या कॉफ़ी का सेवन भूख ना लगना या भूख में कमी की समस्या बढ़ा सकता है।

  • खाली पेट चाय या कॉफ़ी के नुक्सान: शहरो में आजकल बेड टि का कल्चर चला हुआ है जिसमे लोगो को उढ़ते ही चाय या कॉफ़ी की प्याली हाथ में चाहिए होती है। लेकिन खाली पेट चाय या कॉफ़ी का सेवन गर्भवती महिला के लिए नुकसानदेह हो सकता है इससे पेट  में गैस बन सकती है।  
     
  • पाउडर कॉफ़ी, फ़िल्टर कॉफ़ी: जितना हो सके पाउडर कॉफ़ी, फ़िल्टर कॉफ़ी पीने से बचे क्योकि इसमें बहुत ज्यादा कैफीन होता है।  

प्रेगनेंसी में चाय या कॉफ़ी का सेवन बहुत अधिक मात्रा में स्वास्थय के लिए ठीक नहीं होता। लेकिन अगर आप लेना ही चाहती है, तो इसका सेवन 200 मिली ग्राम से अधिक ना करे और डॉक्टर्स की सलाह जरुर ले। यहाँ बताई गई बातों पैर अमल अवश्य करना चाहिए।

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

  • 1
कमैंट्स ()
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| Jul 25, 2018

nice

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