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प्रसव के समय शिशु का वजन कम होने के कारण और वजन बढ़ाने के तरीके

दीप्ति अंगरीश
गर्भावस्था

दीप्ति अंगरीश के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Jan 06, 2020

प्रसव के समय शिशु का वजन कम होने के कारण और वजन बढ़ाने के तरीके

प्रसव के समय शिशु का वजन 2.5 किलो से 4 किलो के बीच होना चाहिए। यदि शिशु का वजन 2.5 किलो से कम है तो मतलब शिशु कमजोर है। उसे अतिरिक्त देखभाल की जरूरत है। इसके साथ ही यह भी जानना जरूरी है कि प्रसव के समय में शिशु का वजन कम होने के क्या-क्या कारण हो सकते हैं और गर्भावस्था के दौरान किन विशेष सावधानियों को बरतना चाहिए ताकि शिशु का वजन सामान्य रह सके।

प्रसव के समय शिशु का कम वजन होने के क्या कारण हैं / Reasons why new-born is underweight at delivery In Hindi

  1. प्री-मैच्योर बेबी / Pre Mature Baby- कई बार शिशु का जन्म गर्भावस्था के छठे या सातवें महीने में होता है। यानि दो-तीन महीने जल्दी। ऐसे में बच्चे का पूर्ण विकास सुचारू रूप से नहीं हो पाता है। नतीजतन औसत वजन से कम होता है शिशु का वजन।
     
  2. दिक्कत देती गर्भनाल/ Placenta- गर्भस्थ शिशु मां की गर्भनाल से पोषण प्राप्त करता है। कई बार गर्भनाल में समस्या हो जाती है। ऐसा अमूमन गर्भ के छठे या सातवें महीने में होता हैै। इसमें गर्भनाल, गर्भाशय के बाहरी हिस्से में लिपट जाती है। नतीजतन समय से पहले शिशु का जन्म। इसके अलावा यदि मां मधुमेह से पीड़ित है तो संभवना होती है कम वजन का शिशु पैदा हो।
     
  3. हाई बीपी भी कारण / High Blood Pressure - प्रेग्नेंसी के दौरान कई बार मां का बीपी बढ़ जाता है। इसका असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ता है। गर्भस्थ शिशु को रक्त के तेज प्रवाह के कारण पोषक तत्व नहीं मिल पाते और कम वजन वाले बच्चे का जन्म होता है। यदि समय रहते इसका इलाज नहीं किया जाए तो यह मां और शिशु के लिए घातक होता है। 
     
  4. यदि गर्भाशय में हो कोई दिक्कत / Disfunctions in uterus- कई बार गर्भाशय में कई समस्याओं के बावजूद गर्भ ठहर जाता है। यह समस्याएं हैं ट्यूमर, गांठ या फाइब्रॉएड। यह समस्याएं गर्भस्थ शिशु का पूर्ण विकास नहीं होने देतीं। नतीजतन बच्चे अपंग, अविकसित या कम वजन के पैदा होते हैं। यदि आपके गर्भाशय में कोई समस्या है तो डाॅक्टर से इलाज करवाएं। समस्या का पता चलते ही मां को इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। यह मां के सेहत के लिए नुकसानदेह तो है ही साथ ही प्रसव के समय कम वजन वाले शिशु के जन्म का कारण भी।
     
  5.  शराब, सिगरेट का सेवन/ No alcohol, cigarette, drugs- आप जानती हैं कि शराब, सिगरेट, बीड़ी आदि का सेवन कितना नुकसानदायक है। यह कैंसर का कारण है और जान भी लील सकता है। आप गर्भावस्था में इनका सेवन करती हैं, तो बंद कर दें। यह रक्त धमनियों को गाढ़ा कर देता है। नतीजतन खून गाढ़ा हो जाता है और खून गर्भस्थ शिशु तक नहीं पहुंच पाता। ऐसे में यह आपके साथ-साथ गर्भस्थ शिशु के लिए घातक है। यानि प्रसव के समय शिशु कम वजन वाला या अपंग भी पैदा हो सकता है और आपको गर्भाशय की समस्या हो सकती है।
     
  6. साफ-सफाई का कम ध्यान / Lack of cleanliness- साफ-सफाई भी एक कारण है। सुनने में अजीब लगे, लेकिन सच हैै। यदि गर्भवती स्त्री के शरीर में संक्रमणों ने कब्जा जमा लिया, तो जच्चा व बच्चा दोनों के लिए स्थिति भयावह हो सकती है। संक्रमण कब शरीर में प्रवेश करते हैं। इन्हें मापने का कोई पैमाना नहीं है। गर्भावस्था में स्वच्छता का ध्यान रखें और एंटी एलर्जेंट टैबलेट्स नहीं खाएं। रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल नहीं करें। इसमें प्रयुक्त रसायन शिशु के नवर्स सिस्टम और विकास पर हमला करते हैं। नतीजतन प्रसव के समय शिशु का वजन कम होता है।
     
  7. मातृ पक्ष में इस तरह की केस हिस्ट्री हो-   यदि आपकी मां के पक्ष में अधिकांश प्रसव के समय शिशु कम वजन के पैदा हुए हैं, तो संभावना है कि वंशाणुगत यह जीन आपमें भी आएं। इसके अलावा यह कई बार आपके पहले प्रसव का इतिहास हो। यानि पहला बच्चा प्रसव के समय कम वजन का हो, तो संभावना हो सकती अगले प्रसव में भी शिशु कम वजन का हो।
     
  8. न्यून मात्रा में पौष्टिक तत्व / Less nutritious food- आप जैसा खाते हैं वही शरीर पर दिखता है। उसी के अनुरूप शरीर का विकास होता है। ठीक उसी तरह मां के कोख में पले रहे बच्चे पर आहार का असर होता है। यदि मां पौष्टिक आहार नहीं खाएगी, तो गर्भस्थ शिशु का विकास प्रभावित होगा और प्रसव के समय शिशु का वजन कम होगा।

 

प्रसव के बाद शिशु का वजन बढ़ाने के उपाय क्या हैं / Tips to gain weight in infants In Hindi


शिशु का वजन कम है, तो सिर्फ चिंता नहीं करें। इसके लिए उचित समाधान खोजें। सही, सटीक समाधान पैडिट्रिशियन से लें। कभी भी शिशु पर हर्बल या देसी नुस्खे नहीं अपनाएं। क्योंकि शिशु काफी छोटा है और उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं हुई है। ऐसे में इन नुस्खों को दुष्परिणाम भी हो सकता है। 
 

  •  बच्चा कम वजन का पैदा हुआ है, तो उस पर पैनी नजर रखें। रोजाना उसके विकास का रिपोर्ट कार्ड बनाएं। इसे पैडिट्रिशियन से साझा करें। ऐसा करने से बच्चा पल-पल डाॅक्टर की देख-रेख में रहेगा। जहां कोई चूक होगी, तो डाॅक्टर की उचित सलाह कारगर साबित होगी।
     
  • सबसे पहले जान लें कि शिशु के लिए मां का दूध अमृत होता है। मां के दूध में  सभी जरूरी पोषक तत्व समाहित होते हैं। हर 2-3 घंटे के अंतराल के बाद बच्चे को मां का दूध पिलाएं। कारण बच्चे का पेट छोटा होता है। वजन बढ़ाने के चक्कर में आप स्तनपान की अति नहीं करें। अन्यथा बच्चा दूध निगल देगा और दूध से जी चुराएगा।
     
  •  6 महीने तक शिशु को सिर्फ मां का दूध ही पिलाएं। किसी भी तरह का तरल पदार्थ या पानी तक पिलाने की गलती नहीं करें। अन्यथा शिशु की सेहत खराब हो सकती है।
     
  • शिशु का वजन बढ़े और सुचारू शारीरिक विकास हो इसके लिए छह माह की उम्र के बाद उसे ठोस आहार खिलाना शुरू करें। मसलन उबला आलू, दाल का पानी, दलिया, खिचड़ी, सूजी की खीर, गुड़, पिसी व मीठे फल, गला हुआ चावल, पोहा आदि। याद रहे छोटे बच्चों का आहार कम नमक, मिर्च मसाले वाला हो।
     
  •  बच्चे का खाना प्राकृतिक हो। इसमें किसी भी तरह के कृत्रिम रंग, परिरक्षक नहीं हों। शिशु का खाना मिलावट रहित हो। ये सभी तंत्रिका तंत्र से लेकर शारीरिक विकास में अवरोधक होते हैं।

    आप शिशु के वजन की चिंता करें, पर हायतौबा नहीं मचाएं। डाॅक्टर की सलाह और हमारे बताए सुझावों का पालान करें। यह समय तो जरूर लेंगे, लेकिन सभी कारगर हैं।

 

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

  • 5
कमैंट्स()
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| Jan 16, 2020

Weight gain kese kia mam aapne...... ????

  • रिपोर्ट

| Jan 15, 2020

Mera baby 8 months complete ho gai has per the age weight ketna hoena chaiye

  • रिपोर्ट

| Jan 12, 2020

Very nice

  • रिपोर्ट

| Jan 10, 2020

Mere beti ka janm ke sanaye wajan 1kg 600 tha ab wo 5 month ke ho gaye h to uska wagan 5kg h to kiya wo thik h

  • रिपोर्ट

| Jan 08, 2020

I'm

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