पेरेंटिंग समारोह और त्यौहार

नटखट कान्हा की मैया यशोदा के टिप्स को आप भी आजमाएं

Deepak Pratihast
0 से 1 वर्ष

Deepak Pratihast के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Sep 02, 2018

नटखट कान्हा की मैया यशोदा के टिप्स को आप भी आजमाएं

हिंदू धर्म में भगवान कृष्ण का महत्वपूर्ण स्थान है। भगवान कृष्ण का गीता उपदेश हो या फिर उनकी लीलाएं, ये सभी हमें बहुत कुछ सिखाती हैं। कृष्ण लीला में बाल लीला कुछ खास महत्व रखती है। क्योंकि मौका जन्माष्टमी का है, इसीलिए हम बात करेंगे भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं व शरारतों की और आपको बताएंगे कि आखिर कैसे मां यशोदा ने इन सबसे अच्छे से निपटा। इस ब्लॉग में हैम आपको बताएंगे कि आखिर कैसे आप भी मां यशोदा की तरह अपने लाडले की शरारतों व जिद को अच्छे से हैंडल कर सकते हैं।



मां यशोदा के द्वारा आजमाई गई इन बातों का रखें ध्यान/ Keeping these things tried by the mother Yashoda in Hindi 

  1. बच्चे के सवालों से न झल्लाएं - अक्सर देखने में आता है कि मां-बाप बच्चों के अधिक सवालों से झल्ला जाते हैं और बच्चों को डांट कर चुप करा देते हैं। पर यह सही तरीका नहीं है। भगवान कृष्ण भी मां यशोदा और नंद बाबा से कई सवाल पूछते थे, वो दोनों गुस्सा करने की जगह कृष्ण के सवालों का जवाब देते थे। एक बार बचपन में कृष्ण ने मां यशोदा से पूछा कि राधा का रंग इतना गोरा और मेरा रंग इतना काला क्यों है। इस पर मां यशोदा ने डांटने की जगह उन्हें हंस कर जवाब दे दिया। अगर आपका बच्चा भी इस तरह अनावश्यक सवाल करता है, तो उस पर गुस्सा करने की जगह आप भी उसे मां यशोदा की तरह जवाब दें और हंस कर समझाएं।
     
  2. भरोसा करें - बच्चों पर भरोसा बहुत जरूरी है। कम उम्र होने की वजह से उनमें समझ बहुत कम होती है। वह सही और गलत नहीं समझते, इसलिए शरारत करते हैं, पर थोड़ा बड़ा होने पर अधिकतर बच्चे अपने आप सुधर जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप उन पर भरोसा करें। भगवान कृष्ण बचपन में लगातार शरारत करते थे। मां यशोदा के पास शिकायत भी आती थी, मां कृष्ण से सवाल पूछती थीं तो कृष्ण झूठ भी बोलते थे कि मैय्या मोरी मैं नहीं माखन खायो...मां यशोदा इस बात को जानती थीं कि कृष्ण झूठ बोल रहा है, लेकिन फिर भी वह अनसुना कर देती थीं क्योंकि वह भरोसा करती थीं।
     
  3.  सख्ती जरूरी नहीं - छोटे बच्चे बचपन में अक्सर शरारत करते हैं। चीजों को तोड़ते हैं या खुद को नुकसान पंहुचाते हैं। इन सब पर बच्चों के साथ सख्ती जरूरी नहीं है। आप प्यार से भी उन्हें समझा सकती हैं। बचपन में अक्सर गोपियां मां यशोदा के पास शिकायत लेकर आतीं थीं कि कृष्ण ने उनकी मटकी तोड़कर माखन खा लिया है। इसके अलावा भी कृष्ण कई शरारत करते थे। पर मां कृष्ण उनके साथ सख्ती से पेश नहीं आतीं थीं। वह प्यार से समझाती थीं। आपका बच्चा अगर कुछ शरारत करता है, कोई चीज तोड़ता है तो आप भी उसे प्यार से समझाएं। डांट और पिटाई से बच्चे नकारात्मक हो जाते हैं।
     
  4.  लालच दें - अक्सर बच्चे कई अच्छे कामों के लिए भी रोने लगते हैं। वह खाना नहीं खाते हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें डांटने या पीटने की जगह लालच दें। हालांकि लालच अच्छे का दें। कुछ ऐसा लालच न दें, जो बच्चे को नुकसान पंहुचाए। मां यशोदा के सामने ऐसी नौबत कई बार आई, लेकिन उन्होंने हमेशा धैर्य से काम लिया। कभी यशोदा मां ने विवाह कराने का लालच दिया तो कभी माखन खिलाने का।
     
  5. ढांढस बढ़ाएं - कई बार बच्चे छोटी छोटी बात या पैरेंट्स की डांट पर रोने लगते हैं या मायूस हो जाते हैं। इस स्थिति में जरूरी है कि बच्चे को ढांढस दें। बाल कृष्ण के कान छेदन संस्कार के दौरान कृष्ण रोने लगते हैं और बाल न कटाने की जिद करते हैं। इस पर मां यशोदा नाई को धमकाने लगती हैं।
     
  6.  दोस्तों के साथ मिलकर रहें - बच्चों को हमेशा दोस्तों के साथ मिलकर रहना सिखाएं। भगवान कृष्ण बचपन में दोस्तों के साथ मिलकर रहते थे। उनके दोस्त गरीब और अमीर दोनों थे। इस बात को लेकर मां यशोदा और कृष्ण ने कभी उन्हें नहीं टोका। उन्होंने कभी ऊंच-नीच, अमीर-गरीब का भेद नहीं किया। आपको भी इसका पालन करना चाहिए।
     
  7.  प्यार और लगाव जरूरी - बच्चों को ज्यादा से ज्यादा प्यार देने की जरूरत होती है। ऐसे में जरूरी है कि मां बच्चे से अधिक लगाव रखे। आजकल वर्किंग कपल का जमाना है। कई मां ऑफिस की वजह से बच्चे पर खास ध्यान नहीं दे पातीं। वह दाई या दादा-दादी के सहारे बच्चे को छोड़ देती हैं। बच्चे पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे पातीं। ये ठीक नहीं है, बच्चे के लिए मां का प्यार सबसे ज्यादा जरूरी है। मां की जगह कोई नहीं ले सकता। कृष्ण के बचपन से जुड़ा एक प्रसंग है। पूतना जब कृष्ण को मारने आयी थी तो अपना दूध पिलाकर वह कृष्ण को गोदी में लेकर मथुरा की तरफ जाने लगती है। उस समय मां यशोदा के प्राण भी कृष्ण के साथ चले जाते हैं। यशोदा में चेतना का संचार तब हुआ, जब कृष्ण उनकी गोदी में आए। ऐसे में आपको भी मां यशोदा की तरह वात्सल्यमयी माता बनना चाहिए 

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

  • 1
कमैंट्स()
Kindly Login or Register to post a comment.

| Sep 02, 2018

Sir mera beta 3years 4th month ka hai par uska wait abhi bhi 10th kg hi hai kya kru plz halp me

  • रिपोर्ट
+ ब्लॉग लिखें
Loading
{{trans('web/app_labels.text_Heading')}}

{{trans('web/app_labels.text_some_custom_error')}}

{{trans('web/app_labels.text_Heading')}}

{{trans('web/app_labels.text_some_custom_error')}}