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स्वास्थ्य

क्या है बच्चों में डायबिटीज (शुगर) के लक्षण और रोकथाम के उपाय ?

Prasoon Pankaj
1 से 3 वर्ष

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Feb 06, 2019

क्या है बच्चों में डायबिटीज शुगर के लक्षण और रोकथाम के उपाय

आप एक मां हैं तो क्या कभी आपने खुद के बचपन और अपने बच्चे के बचपन की तुलना की है। क्या आपको ऐसा नहीं लगता है कि बदलते वक्त के साथ-साथ हमारे लाइफस्टाइल में बदलाव आया, आहार में बदलाव आया है और भी बहुत कुछ बदल चुका है। तेजी से बदलती हुई जीवनशैली के परिणाम स्वरूप तनाव, डिप्रेशन और चिंता जीवन का अभिन्न अंग बनता जा रहा है और इन्हीं वजहों से कई बीमारियां लोगों को अपनी चपेट में ले लेती है। इन्हीं बीमारियों में से एक है डायबिटीज। अगर अपने देश की बात करें तो करोड़ों लोग डायबिटीज की समस्या से पीड़ित हैं। डायबिटीज बच्चों के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है। लेकिन आपको परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। तो आइये जानते हैं कि डायबिटीज के प्रकार और बच्चों में डायबिटीज के किस तरह के लक्षण (Diabetes Symptoms in Children) नजर आते हैं ? [इसे भी जानिए: क्या हैं गर्भावधि मधुमेह (शुगर) की रोकथाम के उपाय?]

 

बच्चों में डायबिटीज (मधुमेह रोग) के प्रकार ( Different types of Diabetes in Children In Hindi)

डायबिटीज को बोलचाल की भाषा में मधुमेह (madhumeh) के नाम से भी जाना जाता है। डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे करके शरीर के बहुत सारे अंगों पर अपना प्रभाव डालते हुए उनको निष्क्रिय बना देती है और यही वजह है कि इसको धीमा जहर भी कहा जाता है। बच्चों में होने वाले डायबिटीज को जुवेनाइल डायबिटीज (Juvenile Diabetes) कहा जाता है।

  • टाइप 1 डायबिटीज- इस बीमारी से पीड़ित बच्चों के शरीर में या तो इंसुलिन बनता ही नहीं है या फिर बहुत कम मात्रा में बनता है। ऐसे हालात में बच्चे को इंसुलिन का इंजेक्शन लेना पड़ता है। हालांकि इसको भी बहुत हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। 
     
  • टाइप 2 डायबिटीज- इस बीमारी से पीड़ित होने वालों के शरीर में ब्लड शुगर का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है और इसको कंट्रोल करने के लिए डाइट चार्ट को फोलो करना आवश्यक होता है। 
     

डायबिटीज (शुगर) होता क्या है?/ What is Diabetes in Hindi

मानव शरीर में जब अग्नाशय यानि Pancreas में इंसुलिन का स्त्राव कम हो जाता है और इसकी वजह से खून में ग्लूकोज का लेवल सामान्य से अधिक वृद्धि हो जाती है तो ऐसी परिस्थिति को डायबिटीज कहा जाता है। इंसुलिन एक हार्मोन है जो भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करता है। इस हार्मोन की कमी होने के चलते हमारा शरीर शुगर की मात्रा को नियंत्रित नहीं कर पाता है। हम लोग जो कुछ भी भोजन के रूप में लेते हैं वह ऊर्जा के रूप में बदल नहीं पाता है। डायबिटीज के परिणामस्वरूप आंखें, मस्तिष्क, हृदय, धमनियां और गुर्दे बुरी तरह से प्रभावित होते हैं। [इसे भी पढ़ें: क्या डायबिटीज के दौरान स्तनपान कराना सुरक्षित है?]

 

बच्चों में डायबिटीज(मधुमेह) के लक्षण / Diabetes Symptoms in Children in Hindi

समय रहते हुए आपने डायबिटीज के लक्षणों को चिन्हित कर लिया तो आप अपने बच्चे को डायबिटीज का शिकार बनने से रोक सकते हैं। ऐसे पहचानिए बच्चों में डायबिटीज के लक्षण...

#1. बार-बार भूख लगना -

अगर बच्चे को सामान्य स्थिति के बजाय ज्यादा भूख महसूस होने लगा है तो इस लक्षण को नजरंदाज नहीं करना चाहिए। दरअसल इस बीमारी के चलते वे जो कुछ भी खाते हैं वह ऊर्जा में बदल नहीं पाता है और उनको ज्यादा भूख लगने लगती है। 
 

#2. वजन कम हो जाना -

अगर बच्चा अच्छे से खाना खा रहा है लेकिन उसके वजन में कमी हो रही है तो ये भी डायबिटीज का एक लक्षण हो सकता है।
 

#3. बार-बार पानी पीना(Excessive Thirst) -

यानि ज्यादा प्यास लगना (Excessive Thirst) शरीर में शुगर का लेवल बढ़ जाने से भी ज्यादा प्यास लगती है। 
 

#4. बार-बार पेशाब लगना(Frequent Urination) -

जैसा की हमने ऊपर बताया कि डायबिटीज की वजह से बच्चा बहुत पानी पीने लगता है तो स्वाभाविक है कि पेशाब भी बार-बार करेगा। हालांकि इसको लेकर परेशान ना हो क्योंकि हो सकता है कि ये शुरूआती लक्षण हो लेकिन अगर ये लक्षण नजर आएं तो सतर्क हो जाएं।
 

#5. थकावट महसूस होना-

अगर आपका बच्चा बहुत ज्यादा थकावट महसूस करे तो भी सावधान हो जाएं। चूंकि इंसुलिन की कमी के चलते शरीर को ऊर्जा मिल नहीं पाती है तो इसलिए थकावट महसूस होती है। 
 

#6. स्वभाव में बदलाव-

डायबिटीज से पीड़ित बच्चों का मूड अचानक से परिवर्तित होने लगता है। चिड़चिड़ापन या उदासीपन महसूस करने लगते हैं। 
 

#7. शरीर के घाव का जल्दी न भरना-

शरीर के घाव अगर जल्दी नहीं भर रहे हों या फिर बार-बार हो रहे हों तो भी सतर्क हो जाएं।

 

अगर आपको अपने बच्चे में उपर बताए हुए लक्षण नजर आते हैं तो फौरन डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर की सलाह के मुताबिक बच्चे का ख्याल रखें।

 

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