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बच्चे को प्री-स्कूल में एडमिशन कराने से पहले ये बातें ध्यान रखें

Parentune Support
1 से 3 वर्ष

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संशोधित किया गया Aug 09, 2018

बच्चे को प्री स्कूल में एडमिशन कराने से पहले ये बातें ध्यान रखें

बच्चों की आयु के पहले पांच साल काफी महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इन्हीं सालों में बच्चों में भारी बदलाव होते हैं। इसी वजह से प्री- स्कूल बच्चों के स्कूली जीवन की पहली एवं महत्वपूर्ण सीढ़ी होती है। जब बच्चा घर में बोलना- चलना शुरू कर देता है तो घर के सदस्य उसे नाम,पता वगैरह याद कराना शुरू कर देते हैं। जब बच्चा दो साल का होता है, तो उसकी प्री- स्कूलिंग का समय शुरू हो जाता है। प्री- स्कूल में बच्चे समाज से मेलजोल करना एवं अन्य कई बातें सीखते हैं। वे सामग्रियों को औरों से बांटने के बारे में एवं दूसरों की देखभाल करना सीखते हैं एवं स्वतंत्र व्यक्तित्व के रूप में खुद ढालने का प्रयत्न करते हैं। इसी वजह से बच्चों के लिए प्री- स्कूल का चयन करना अभिभावकों के लिए किसी मुहिम से कम नहीं। जहां गांवों में बच्चे अपने संयुक्त परिवार में दादा- दादी और घर के बाकी सदस्यों के साथ खेल- खेल में काफी कुछ सीखते हैं। वहीं आज के न्यूक्लियर फैमिली में पैरेंट्स बच्चे को प्ले- स्कूल में भेजना पसंद करते हैं।

बच्चे को प्री-स्कूल में एडमिशन कराने से पहले क्या ध्यान रखे?

बच्चों के लिए प्री- स्कूल का चयन करते समय कौन से मुद्दे ध्यान में रखने चाहिए, इस अति महत्वपूर्ण विषय के बारे में पैरेंट्स के लिए कुछ सुझाव इस प्रकार हैं -

  • सबसे पहले प्री- स्कूल की व्यवहार्यता के बार में जानते हैं। इसमें स्कूल का समय, घर से स्कूल की दूरी, यातायात के साधन, स्कूल के बाद ऐक्टिविटीज की उपलब्धता, फीस, क्लासरूम का आकार एवं विद्यार्थी एवं अध्यापकों का अनुपात का समावेश होता है। प्री- स्कूल दूर के बजाय घर के पास वाले प्री- स्कूल को तरजीह दें। प्री- स्कूल में दाखिला कराते वक्त संचालक से शेड्यूल जरूर पता करें और ज्यादा देर तक बच्चे को प्ले- वे में छोड़ने के बजाय उसे एक दो घंटे के लिए ही छोड़ें।

  • बच्चे को कम से कम 2 से 3 साल में प्री- स्कूल भेजें। प्री-स्कूल में अच्छे पैरंट एवं टॉडलर प्रोग्राम उपलब्ध होते हैं, जो  बच्चों पर पढ़ाई का कोई दबाव नहीं डालता बल्कि इस प्रोग्राम में विकास के नए-नए चरण होते हैं, जिससे बच्चों का विकास होता है।

  • पढ़ाई कराने वाले प्री- स्कूल स्कूलों से बचें। बल्कि ऐसे प्री- स्कूल का चयन करें जो आपके नन्हें बच्चे को खुलकर खेलना एवं सहभाग होना सिखाएं। बच्चे पर पढ़ाई का प्रेशर बिल्डअप करने के बजाय उसे खेल- खेल में सिखाने का प्रयास करें। इस उम्र में बच्चे को किताब, पेंसिल, फ्रूट्स, एनिमल्स, टॉयज से रूबरू कराएं न कि उसे किताबी कीड़ा बनाने का प्रयास करें।

  • आज के परिवेश में जहां माता- पिता दोनों ही नौकरी पेशेवर हैं। बच्चे को अच्छी कंपनी मिल सके, इसके लिए वे प्री- स्कूल में दाखिला दिला देते हैं। लेकिन बच्चे को प्री- स्कूल में पढ़ाई का बोझ डालने के बजाय खेल- खेल में ही उसे एक दूसरे से इंटरेक्शन करना सिखाया जाए, ताकि बच्चे के मानसिक विकास में कोई बाधा न उत्पन्न हो।

  • प्री- स्कूल के दरवाजे अभिभावकों के लिए हमेशा खुले रहने चाहिए। समय- समय पर अभिभावकों को उनके बच्चों के बारे में लिखित जानकारी देनी चाहिए। अभिभावकों को भागीदार बनाने में प्री- स्कूल कितना प्रयत्नशील है, इसकी भी जानकारी हासिल करना चाहिए।

  • प्री- स्कूल सभी सुरक्षा मानकों को पूरा करता हो। संचालक बच्चों की सुरक्षा की सम्पूर्ण गारंटी लें। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि बच्चों का किसी भी हाल में शोषण न हो। किसी भी प्रकार की विकट परिस्थिति का सामना करने में प्री- स्कूल के शिक्षक व कर्मचारी सक्षम हों। प्री- स्कूल में सी सी टीवी कैमरे की समुचित स्थानों पर सही प्रकार से व्यवस्था हो। वे कैमरे कार्यरत हों एवं अभिभावकों को मोबाइल द्वारा उनकी रिकॉर्डिंग देखने की सुविधा दी जाए, जिससे वे अपने बच्चे की सुरक्षा के प्रति पूर्ण आश्वस्त हों।

  • प्री- स्कूल की शैक्षणिक पृष्ठभूमि पूरी तरह से सक्षम होनी चाहिए, साथ ही कर्मचारी रोजमर्रा के काम करने में माहिर होने चाहिए। अच्छे शिक्षकों की वजह से बच्चों का अच्छा विकास हो सकता है।

  • स्कूल में बच्चों को भोजन एवं नाश्ता दिया जा रहा है या नहीं यह सुनिश्चित करें और यदि दिया जा रहा है तो वह पोषक है या नहीं, यह भी तय करें। मेन्यूकार्ड की भी जांच करें।

इस प्रकार अपने छोटे बच्चे के लिए प्री- स्कूल के चयन में सावधानी रखकर आप उसे विकास की नई दिशा दे सकते हैं और उसके भविष्य की मजबूत नींव रखने में उसकी सहायता करते हैं।

 

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