1. चिकित्सा

बच्चेदानी के छाले कैसे ठीक करें, उपाय, लक्षण और कारण

बच्चेदानी के छाले कैसे ठीक करें, उपाय, लक्षण और कारण

Published: 23/06/25

Updated: 23/06/25

चिकित्सा

बच्चेदानी (गर्भाशय) के छाले, महिलाओं में होने वाली साधारण समस्या है. गर्भाशय ग्रीवा के छालों को Cervical Erosion या फिर Cervical Ectropion कहा जाता है. यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें ग्रीवा की सतह लाल, सूजी हुई या इसपर लाल छाले भी दिखाई देने लगते हैं. हालांकि यह कोई गंभीर समस्या नहीं है, लेकिन इसके कारण और लक्षण समझना जरूरी है साथ ही समय पर इसका निदान भी बेहद आवश्यक है. 

हम आपको इसके लक्षण, उपाय और कारण विस्तार से बताएंगे. चलिए शुरुआत इसके लक्षण से करते हैं. 

गर्भाशय ग्रीवा के छालों के लक्षण

गर्भाशय ग्रीवा के छालों के लक्षण हर एक महिला में अलग- अलग होते हैं. और कुछ मामलों में यह साधारण तौर पर दिखाई भी नहीं देते बस महसूस होते हैं. 

1. साधारण से ज्यादा योनि स्राव 

साधारण तौर पर मैथुन के समय योनि से स्राव होता है. लेकिन बच्चेदानी में छाले के दौरान सफेद, पीला या हरा स्राव होता है जो सामान्य से ज्यादा होता है साथ ही यह बदबूदार हो सकता है. 

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2.  सेक्स या मैथुन के दौरान खून का आना 

संभोग के बाद हल्का खून आना या स्पॉटिंग होती है. जो गर्भाशय ग्रीवा पर छाले की निशानी हो सकती है. क्योंकि रगड़ लगने से इनसे स्राव होता है. 

3. मासिक धर्म के बीच जरूरत से ज्यादा खून आना 

मासिक धर्म को दौरान जब महिलाओं को अनियमित रक्तस्राव हो तो यह भी बच्चे दानी में छाले की निशानी हो सकती है. 

4.  पेल्विक पीड़ा या दर्द 

पेट के निचले हिस्से में हल्का दर्द या असहजता भी योनि की ग्रीवा में छाले का संकेत हो सकता है. 

5.  सेक्स के दौरान दर्द होना 

संभोग के दौरान दर्द होना, असुविधा होना भी ग्रीवा के छाले का कारण हो सकता है

6. बार-बार अगर इन्फेक्शन हो रहा है तो रहे सावधान 

योनि में अगर बार बार यीस्ट या बैक्टीरियल इन्फेक्शन हो रहा है तो यह भी गर्भाशय की ग्रीवा में छाले की निशानी है. 

यह तो रही बात लक्षणों की और चलिए अब हम आपको यह बताते हैं कि गर्भाशय ग्रीवा के छालों का क्या कारण है. 

गर्भाशय ग्रीवा के छालों के कारण है

1. हार्मोनल बदलाव 

 गर्भावस्था, गर्भनिरोधक गोलियों का उपयोग या मासिक धर्म चक्र के दौरान हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण भी गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाएं बदल सकती हैं. जिसकी वजह से बच्चे दानी के मुंह पर छाले की शिकायत हो सकती है.  

2. इन्फेक्शन 

बैक्टीरियल जैसे क्लैमाइडिया या यीस्ट इन्फेक्श 

3.गर्भाशय ग्रीवा में चोट या लगातार जलन होना 

4.गर्भनिरोधक भी बन सकते हैं कारण

कई बार कुछ गर्भनिरोधक गोलियां और IUD (कॉपर-टी) गर्भाशय ग्रीवा के छालों का कारण बनती है. 

5. जन्मजात भी हो सकते हैं कारण 

कुछ महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाएं प्राकृतिक रूप से बाहर की ओर बढ़ती है. जो सामान्य प्रक्रिया है. 

6.  कभी कभार इस मामले में गर्भाशय ग्रीवा या कैंसर या प्री कैंसर कोशिकाएं भी देखी गयी हैं लेकिन यह बेहद कम होता है. 

यह वो कारण हैं जिनकी वजह से बच्चे दानी के छाले या गर्भाशय ग्रीवा पर छाले हो सकते हैं. चलिए अब आपको कुछ उपाय सुझाते हैं. लेकिन यह भी ध्यान रखें कि यह उपाय घरेलू हैं और पुख्ता उपचार नहीं है. यह सिर्फ राहत देने के लिए हैं इलाज नहीं है. अगर समस्या साधारण हो तो इन उपाय को किया जा सकता है. लेकिन गंभीर मामलों में डॉक्टर से तुरंत परामर्श लेने बेहद आवश्यक है. 

तो चलिए हम आपको सिलसिलेवार तरीके से उपायों के बारे में बताते हैं. 

डॉक्टर से मिले और जांच करवाएं 

स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलकर अपनी समस्या के बारे में बताएं और कुछ जरूरी टेस्ट करवाएं जिसमें सबसे पहले कुछ टेस्ट करना चाहिए जैसे. 

1. पैप स्मीयर टेस्ट 

2 . कॉल्पोस्कोपी 

3. बायोप्सी 

4. HPV टेस्ट 

यह चार टेस्ट अलग अलग समस्याओं के लिए हैं. इन टेस्ट को करवाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य करें. वहीं, चलिए अब आपको कुछ दवाइयों की जानकारी भी दिए देते हैं. जो इस परेशानी से आपको फौरी तौर पर राहत दे सकती हैं. 

इन्फेक्शन का उपचार 

अगर छाले बैक्टीरिया या यीस्ट इन्फेक्शन के कारण हुए हैं तो ऐसे मामलों में डॉक्टर एंटीबायोटिक्स जैसे मेट्रोनिडाजोल या एंटीफंगल दवाइयां जैसे फ्लुकोनाजोल देते हैं. इनका इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह पर किया जाना चाहिए.

हार्मोनल ट्रीटमेंट 

हार्मोनल असामान्यता या असंतुलन के कारण होने वाले छालों के लिए एस्ट्रोजन क्रीम या कुछ हार्मेनल दवाइयां दी जा सकती हैं. 

दर्द निवारक दवाइयां 

अगर दर्द की स्थिति है या असहज महसूस कर रहे हैं तो डॉक्टर हल्की दर्द निवारक दवा दे सकते हैं. 

योनि ग्रीवा छाले मामले में सावधानी इस बात की भी रखनी चाहिए कि अगर छाले लंबे समय तक ठीक नहीं हो रहे हैं तो किसी अच्छे डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. और चलिए अब आपको कुछ घरेलू उपाय की बता देते हैं जिनका इस्तेमाल करके आप इस समस्या से काफी हद तक छुटकारा पा सकते हैं. 

साफ सफाई का रखे ध्यान 

योनि को साफ सुथरा रखें. हल्के बगैर खुशबू वाले साबुन का इस्तेमाल करना चाहिए. 

ज्यादा डूशिंग या हार्ड केमिकल के प्रयोग से बचना चाहिए क्योंकि यह जगह नाजुक होती है. केमिकल प्रोडक्ट से जलन हो सकती है. 

स्वस्थ आहार का सेवन करें 

विटामिन -C जैसे संतरा नींबू का इस्तेमाल करें, विटामिन - E जैसे बादाम, पालक का सेवन भी फायदेमंद साबित होता है. जिंक का सेवन जिसमें कद्दू के बीज, दाल का भरपूर सेवन करना चाहिए. पर्याप्त पानी पी कर शरीर को हाइड्रेट रखना चाहिए. 

धूम्रपान और शराब के सेवन से बचना चाहिए 

धूम्रपान और शराब दोनों ही ग्रीवा के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इनके सेवन से बचना चाहिए. 

तनाव से बचना चाहिए 

बच्चे दानी के छालों के दौरान मूड बहुत चिड़चिड़ा हो सकता है. क्योंकि लगातार जलन पेल्विक का दर्द मूड खराब कर सकता है. ऐसे में तनाव से दूर रहने के लिए योग, ध्यान या हल्की सैर करनी चाहिए. ताकि हार्मोनल असंतुलन को ठीक किया जा सके.  

सुरक्षित यौन संबंध भी है बेहद जरूरी 

परेशानी से बचने का एक सरल तरीका कंडोम का इस्तेमाल भी है. कंडोम के प्रयोग से यौन संचारित रोगों STD से निजात तो मिलती ही है. साथ ही सुरक्षित यौन संबंध भी बनते हैं. 

घरेलू उपाय 

1. नीम के पानी का इस्तेमाल 

कुछ लोगों के लिए नीम का पानी बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है. नाम की पत्तियों को पानी में उबालकर, नीम के पानी से प्रभावित क्षेत्र की सफाई की जा सकती है. यह एक एंटीबॉडी होती हैं जो प्रभावित क्षेत्र को ठीक करने का काम करती है. 

2. एलोवेरा जेल का इस्तेमाल करें 

शुद्ध एलोवेरा जेल सूजन कम करने में मदद करता है. लेकिन योनि क्षेत्र में उपयोग से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी है. 

3. हल्दी का इस्तेमाल 

हल्दी में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं. इसके प्रयोग से फायदे होते हैं लेकिन इसका केवल बाहरी क्षेत्र में ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए. 

4. सावधानियां क्या बरतें 

इस परेशानी में सबसे पहले स्व-उपचार से बचना चाहिए. कोशिश करनी चाहिए कि किसी अच्छए डॉक्टर से परामर्श किया जाए क्योंकि घरेलू उपचार पहले से खराब स्थिति को और खराब कर सकते हैं. इसलिए समस्या होने पर नियमित जांच, उपचार बेहद जरूरी है. लक्षणों पर ध्यान देकर डॉक्टर से समय पर ही परेशानी का उपचार करना चाहिए.

 

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