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जानें शिशु के शरीर पर पाउडर लगाने से पहले क्या सावधानी बरतें - जानें क्या है डॉक्टर की सलाह

जानें शिशु के शरीर पर पाउडर लगाने से पहले क्या सावधानी बरतें - जानें क्या है डॉक्टर की सलाह

प्रकाशित: 15 सित॰ 2025

अक्सर ये देखा गया है, जब भी कोई नवजात शिशु घर में आने वाला होता है, तो उसके आने से पहले ही उसके स्वागत की तैयारिया होने लगती है। बच्चे के पैदा होते ही उसके लिए मार्केट से एक क्रीम पाउडर बेबी आयल का एक किट आ जाता है। बच्चे को एक बार मोस्चेराइजर लगाया और फिर ढेर सारा पावडर और बेबी रेडी, अब तो कुछ माएं गर्मी में बच्चो की मालिस भी तेल लगाकर नहीं पाउडर लगाकर ही करती  है। अभी एक रिसर्च में पता चला है की ज्यादा पाउडर का इस्तेमाल भी बच्चे के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। तो आइये इस ब्लॉग में हम लोग जानते हैं कि इस रिसर्च के मुताबिक नवजात शिशु को ज्यादा पाउडर लगाने से किस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

कारण जिसकी वजह से डॉक्टर ज्यादा पाउडर लगाने के लिए मना करते हैं /Why Doctor Refuses to Apply More Powder for Children in Hindi?

एक रिसर्च से पता चला है की पाउडर लगाने की वजह से बच्चो में बहुत ज्यादा रेस्पिरेटरी इश्यूज होते है।  खास तौर से वो बच्चे जो प्रीमैच्यूर होते है या उनको कोई हार्ट डिजीज है या उनको पैदा होते ही अस्थमा, बोर्न काईटस या और कोई रेस्पिरेटरी इश्यूज है तो उनको ये बिमारिया होने के चांसेस और भी बढ़ जाते है और उन्हें साँस लेने में बहुत दिक्कत होती है। रिसर्च में तो यहाँ तक बताया गया है की अगर सावधानी नहीं बरती गई तो आगे जाकर बच्चे को फेफड़े का कैंसर भी हो सकता है। इसीलिए काफी स्टडी के बाद डॉक्टर्स का कहना है की नवजात शिशुओ के लिए पाउडर का इस्तेमाल कम ही करना चाहिए।   

  1. आप जब भी पाउडर लगाते है पहले शेक करके पाउडर को लगाते है, उससे क्या होता है की पाउडर जितना शरीर पर रहना है रह जाता है और उसके अलावा उड़कर हवा में मिल जाता है और वो हवा बेबी के साँस के साथ उसके अन्दर चली जाती है। बच्चे का बॉडी सिस्टम बहुत वीक होता है, जब बच्चे पैदा होते है। और वो पर्टिकल्स जो बच्चे ने साँस के साथ अंदर लिए है धीरे धीरे जाके बच्चे के एयरवेज में, रेस्पिरेटरी ट्रैक में, चेस्ट में, या फिर बच्चे के फेफड़ो में जाके सिस्टम को ब्लाक करते है। और जब हम अपने बच्चे पर लगातार ये पाउडर यूज करते है तो जो पार्टिकल्स जाके  रेस्पिरेटरी सिस्टम को ब्लाक कर रहे है वे अब डैमेज करना शुरू कर देते है जिससे बच्चे को घुटन भी हो सकत है और रेस्पिरेटरी डिजीज हो सकती है।
     
  2. अभी एक रिसर्च में ये भी पता चला है की बेबी गर्ल्स के जेनेटिव सिस्टम पे जब पाउडर को रेगुलरली लगाया गया तो 40 फीसदी चांसेस में ओवेरियन कैंसर के मामले बढ़ गए। उन बेबीज और  औरतो के अंदर जो लगातार जनेटीव सिस्टम पर पाउडर यूज कर रहे थे।    

 

कैसे करें पाउडर का सही तरीके से उपयोग? / How to Use Powder Properly for Children in Hindi

आप अपने बच्चे के शरीर पर यदि पाउडर लगा रही है, तो इसके लिेए आपको पाउडर लगाने का तरीका बदलना पड़ेगा। शिशु के शरीर पर डिब्बे से सीधे पाउडर लगाने और मलने से बहुत सारा पाउडर उसके मुंह में चला जाता है। इसलिए जब भी पाउडर लगाएं शिशु से कम से एक मीटर दूर रहकर पाउडर को अपने हाथों में गिराएं और हाथों में ही मलकर झाड़ लें। फिर शिशु के शरीर पर हल्के-हल्के रगड़कर बिना थपथपाए हुए लगाएं। और ध्यान रहे  की बच्चो के हाथ में पाउडर का डिब्बा खेलने के लिए नहीं दे। डाइपर के रैशेज से बचाने के लिए बच्चों के जांघों पर ही पाउडर लगाएं और बहुत कम मात्रा में लगाएं। बच्चों के प्राइवेट पार्ट्स के पास पाउडर बिल्कुल न लगाएं। खासकर गर्ल चाइल्ड के लिए विशेष ध्यान दें क्योंकि इससे ओवरियन कैंसर का भी खतरा होता है। घमौरी वाले पाउडर्स का इस्तेमाल बच्चों की त्वचा पर डॉक्टर की सलाह लेकर ही करें। शिशु के मुंह पर टैल्कम पाउडर का इस्तेमाल न करें या बेहद कम मात्रा में करें। शिशु के शरीर पर पाउडर लगाने के लिए पफ का इस्तेमाल कभी न करें क्योंकि इससे पाउडर ज्यादा मात्रा में उड़ता है।

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