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बच्चों में एनोरेक्सिया – जानिए कारण, लक्षण और उपचार
प्रकाशित: 18 अग॰ 2022
जब आपका बच्चा खाने-पीने में आनाकानी करने लगी, उसे ऐसा महसूस हो कि उसका वजन बढ़ता जा रहा है, भले ही उसका वजन सामान्य हो या कम हो। इस अनजाने डर की वजह से वह खाना-पीना कम कर दे, तो जान लीजिए कि यह एनोरेक्सिया नर्वोसा का लक्षण है। अमूमन एनोरेक्सिया नर्वोसा किशोर उम्र के बच्चों में ज्यादा देखा जाता है। लेकिन आजकल कम उम्र के बच्चों में भी एनोरेक्सिया नर्वोसा के लक्षण नजर आने लगे हैं। एक माता-पिता के तौर पर यह ध्यान रखना जरूरी है कि आपका बच्चा सही डाइट ले ताकि वह कमजोर और बीमार ना पड़े। आज इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं कि बच्चों में एनोरेक्सिया के क्या कारण, लक्षण और उपचार हैं।
बच्चों में एनोरेक्सिया के कारण / What makes a child anorexic In Hindi?
अपने शरीर के वजन और आकार को लेकर चिंतित रहना एनोरेक्सिया नर्वोसा का मुख्य लक्षण है लेकिन अभी तक इसके मुख्य कारण के बारे में पता नहीं चल पाया है। हालांकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि बच्चों में एनोरेक्सिया के जेनेटिक, साइकोलॉजिकल, एनवायरनमेंटल कारण हो सकते हैं।
- जेनेटिक- यदि आपके परिवार में पहले से ईटिंग डिसऑर्डर का इतिहास रहा है, तो आपके बच्चे के भी एनोरेक्सिया से पीड़ित होने के चांसेज हो सकते हैं। शोध में यह भी पाया गया है कि जिस परिवार के लोगों का वजन कम करने को लेकर इतिहास रहा है, उसके बच्चों में भी एनोरेक्सिया होने के चांसेज हो सकते हैं।
- साइकोलॉजिकल- बच्चों को उनके दोस्तों या समाज द्वारा बार-बार उसके वजन या खाने-पीने की आदतों के बारे में टोका-टाकी की जाती है। ऐसी स्थिति में बच्चे के मानस पर साइकोलॉजिकल असर पड़ता है। वह अपने वजन को लेकर चिंतित हो जाता है और खाना कम कर देता है। उस पर यह सामाजिक दबाव पड़ने लगता है कि उसे मोटा नहीं होना है, उसे स्लिम दिखना है। वह सोचता ही नहीं कि कम खाना या ना खाने से उसके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है और वह बीमार भी हो सकता है। एंजायटी, कम सेल्फ एस्टीम, डिप्रेशन से वह जूझने लगता है और एनोरेक्सिया का शिकार हो जाता है।
- एनवायरनमेंटल- किशोर होते बच्चों के शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं। इस वजह से उसके अंदर भावनाओं का ज्वार फूट पड़ता है। कई बार स्कूल में भी बच्चों को दूसरे बच्चों द्वारा बुली किया जाता है, उन्हें उनके ‘लुक’ की वजह से प्रताड़ित किया जाता है। कई दफा बच्चे सेक्सुअल एब्यूज का शिकार हो जाते हैं, जिसके बारे में वे किसी को बता नहीं पाते हैं। यह भी उनके एनोरेक्सिक होने का एक कारण हो सकता है।
बच्चों में एनोरेक्सिया के लक्षण / symptoms of anorexia nervosa in a child in hindi?
एनोरेक्सिया एक कॉम्प्लेक्स कंडीशन है। इसका मुख्य लक्षण वजन कम होना है। इसके कुछ फिजिकल, इमोशनल और बिहेवियरल लक्षण देखे जा सकते हैं। आइए इनके बारे में जानते हैं।
फिजिकल लक्षण
- मसल मास का लॉस
- थकान और हर समय बेजान महसूस करना
- ब्लड प्रेशर का कम होना हमेशा डिजिनेस महसूस करना
- शरीर का तापमान कम होना, हाथ-पैर ठंडे होना
- पेट खराब रहना
- स्किन का ड्राई रहना
- हाथ-पैरों में सूजन
- बालों का गिरना
- मेन्सट्रूएशन में अनियमितता
- नींद न आना
- फ्रैक्चर के चांसेज बढ़ जाना
- कब्ज की शिकायत
- चेहरे पर बाल बढ़ जाना
- सांस से बदबू आना
इमोशनल लक्षण
- डिप्रेशन
- मूड में अचानक से बदलाव आना
- लोगों के साथ बैठने में असावधानी महसूस करना
बिहेवियरल लक्षण
- फूड इनटेक कम कर देना
- अपने वजन, शरीर के आकार, डाइट, कैलोरी को लेकर जरूरत से ज्यादा सजग हो जाना
- बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करना
- बार-बार आईने के सामने खड़े होकर अपने शरीर को देखना
- हमेशा मोटापे की बात करना
बच्चों में एनोरेक्सिया के उपचार / How is anorexia nervosa treated in a child in hindi?
यदि आपको लगता है कि आपका बच्चा एनोरेक्सिया का शिकार है, तो उसे तुरंत स्पेशलिस्ट के पास ले जाएं। एक स्पेशलिस्ट डॉक्टर हि आपके बच्चे की जरूरत के अनुसार उसके लिए अलग से योजना बना सकता है ताकि वह एनोरेक्सिया से उबर जाए। बच्चों में एनोरेक्सिया के उपचार एक तौर पर स्पेशलिस्ट डॉक्टर निम्न तरीके आजमा सकता है -
- कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी, जिसमें बच्चे को नए तरह से सोचने, बिहेव करने और तनाव को मैनेज करने के बारे में सिखाया जाता है।
- बच्चे के साथ माता-पिता के तौर पर आपकी भी काउंसलिंग की जा सकती है।
- न्यूट्रिशनल थेरेपी, जिसमें बच्चे को यह बताया जाता है कि भोजन किस तरह से उसकी सेहत के लिए जरूरी है।
- डिप्रेशन और एंजायटी को दूर करने के लिए दवा दी जा सकती है।
- न्यूट्रिशनल कमी को पूरा करने के लिए सप्लीमेंट दिए जा सकते हैं।
बच्चों में एनोरेक्सिया एक गंभीर मानसिक कंडीशन है। इससे बच्चे के सोचने की क्षमता पर विपरीत असर पड़ता है। इसलिए जरूरी है कि इसका पता लगते ही बच्चे को स्पेशलिस्ट डॉक्टर के पास ले जाया जाए।
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