• लॉग इन करें
  • |
  • रजिस्टर
शिशु की देख - रेख स्वास्थ्य

क्या छोटे बच्चों के लिए टीथर्स और डॉल्स सुरक्षित हैं? जानिए रिसर्च से जुड़ी ये 5 बातें

Prasoon Pankaj
0 से 1 वर्ष

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Oct 06, 2021

क्या छोटे बच्चों के लिए टीथर्स और डॉल्स सुरक्षित हैं जानिए रिसर्च से जुड़ी ये 5 बातें
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

जब छोटे बच्चे को दांत निकलने शुरू होते हैं तो ये समय उनके लिए कुछ कष्टदायक जरूर होते हैं। दांत निकलने की प्रक्रिया के दौरान कुछ शारीरिक तकलीफों के अलावा बच्चे चाहते हैं कि उनको चबाने के लिए कोई सामान मिल जाए। इसके बाद क्या होता है...फिर हम बच्चे को चबाने के लिए टीथर्स या प्लास्टिक से बने कोई खिलौने जैसे की डॉल्स दे देते हैं। बच्चे जब तक इसको चबाते रहते हैं तब तक तो उन्हें अच्छा लगता है और वे रोना भी बंद कर देते हैं। फिर हम ये मानकर खुश हो जाते हैं कि चलो कम से कम बच्चे को आराम तो मिला ना। लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि हम जो बच्चे के हाथों में टीथर्स या डॉल्स थमा रहे हैं क्या वो उनके स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है? क्या हमने कभी ये विचार किया है कि प्लास्टिक से बने सामान को छोटे बच्चे चबा तो रहे हैं लेकिन क्या इसके कुछ साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं? आज हम आपको इस ब्लॉग में इसी विषय को लेकर एक रिसर्च के नतीजों को साझा करने जा रहे हैं।

टीथर्स और प्लास्टिक के बने खिलौनों को लेकर क्या कहते हैं रिसर्च? 

  एक रिसर्च के मुताबिक छोटे बच्चों के शरीर में वयस्कों की तुलना में 15 गुना ज्यादा माइक्रोप्लास्टिक पाए जाते हैं। अब आप ये सोच रहे होंगे कि माइक्रोप्लास्टिक आखिर क्या होते हैं? दरअसल माइक्रोप्लास्टिक वो छोटे प्लास्टिक कण होते हैं जिनकी मोटाई 5 एमएम से कम होती है। इसके अलावा आपको ये भी बताना चाहूंगा कि ये कण सिन्थेटिक कारपेट और सिन्थेटिक कपड़ों से भी निकलते हैं। और कुछ कण तो इतने सूक्ष्म होते हैं कि वे नंगी आंखों से दिखाई भी नहीं देते हैं। 

  • आपने खुद भी नोटिस किया होगा कि बच्चों की आदतें होती है कि वे किसी भी चीज को मुंह में डाल लेते हैं। हम अपने बच्चों को खेलने के लिए अक्सर प्लास्टिक से बने खिलौने खेलने के लिए दे देते हैं। इसके अलावा बच्चों को चूसने के लिए हम प्लास्टिक से बने निप्पल भी दे देते हैं। घरेलू माइक्रो प्लास्टिक पॉलिथीन टेराफ्लेट यानि की PET और पॉलिकॉर्बोनेट (PC) होता है। अमेरिका में हर 10 में से 6 बच्चों में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा ज्यादा पाई जाती है।

  • ड्यूक यूनिवर्सिटी के द्वारा की गई रिसर्च के मुताबिक माइक्रोप्लास्टिक के कुछ अंश मछलियों में भी पाए जाते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि इससे निजात पाने के क्या उपाय है, सबसे प्रमुख उपाय तो यही है की माइक्रोप्लास्टिक के उत्पादक को कम करने के प्रयास किया जाए। इसके साथ ही सिंथेटिक फाइबर से बने सामान के उपयोग और इसकी खरीद में भी कमी लाई जाए।

  • इस रिसर्च के मुताबिक माइक्रोप्लास्टिक शरीर से आसानी से नहीं निकलते हैं और इसके अनेक प्रकार के नुकसान हो सकते हैं। शरीर में जलन की समस्या और पाचन तंत्र में गड़बड़ी की समस्या का भी सामना करना पड़ सकता है। 

इसलिए छोटे बच्चों को टीथर्स और प्लास्टिक से बने खिलौनों को इस्तेमाल करने के लिए देने से परहेज ही करें तो ज्यादा बेहतर।

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

  • 1
कमैंट्स ()
Kindly Login or Register to post a comment.

| Oct 25, 2021

  • Reply
  • रिपोर्ट
+ ब्लॉग लिखें

टॉप शिशु की देख - रेख ब्लॉग

Ask your queries to Doctors & Experts

Ask your queries to Doctors & Experts

Download APP
Loading
{{trans('web/app_labels.text_Heading')}}

{{trans('web/app_labels.text_some_custom_error')}}

{{trans('web/app_labels.text_Heading')}}

{{trans('web/app_labels.text_some_custom_error')}}