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जाने आर्टिफीसियल इनसेमिनेशन के बारे में

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संशोधित किया गया Jun 03, 2018

जाने आर्टिफीसियल इनसेमिनेशन के बारे में

 

अपने घर-आंगन में एक नन्हे-मुन्ने की किलकारी सुनने की चाह ज्यादातर शादी-शुदा कपल्स को होती है। कभी-कभी सेहत से जुड़ी किसी समस्या की वजह से यह चाह एक सपना लगने लगती है। हालांकि वक्त पर सही इलाज हो तो ज्यादातर मामलों में यह चाहत पूरी हो सकती है। आर्टिफीसियल इनसेमिनेशन  गर्भधारण कराने के लिए चिकित्सा के रूप में प्रयोग किया जाता है।। आर्टिफीसियल इनसेमिनेशन गर्भवती होने की एक ऐसी तकनीक है जिसमे पहले से रखे गये को शुक्राणु को इंजेक्शन के द्वारा महिला के गर्भ में डाला जाता है |


क्‍यों हो रही इसकी जरूरत-- आर्टिफीसियल इनसेमिनेशन महिला और पुरुष दोनों के लिए वरदान साबित हो रही है। क्योंकि आज के जमाने अधिकतर लोग करियर के कारण अधिक उम्र में शादी करते हैं जब महिलाओं का  शरीर बच्चे को पैदा करने के लिए फिट नहीं रहता। ऐसे में महिला को बच्चा पैदा करने में काफी तकलीफ होती है और कई केस में महिला और बच्चे दोनों की जान को खतरा भी हो जाता है। ऐसे में आर्टिफीसियल इनसेमिनेशन शादीशुदा जोड़ों के लिए वरदान सबित हो रहा है।

इस तकनीक का इस्तेमाल किसे करना चाहिए -- जिन महिलायो की फेलोपियन ट्यूब्स ब्लॉक होती हैं,या अगर महिला टीबी या किसी घातक बीमारी की मरीज हो।यह उनके लिए भी लाभकारी है जो महिलाए 50 साल के बाद या बड़ी उम्र में बच्चे की चाहत रखती है |कुछ महिलाये जो पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम से ग्रस्त है मतलब की ओवरी में अंडे न बन पाते है उनके लिए ये वरदान से कम नहीं है । 

स्त्रियों में आर्टिफीसियल इनसेमिनेशन की चार तकनीकें हैं-- इन्ट्रासर्विकल इन्सेमिनेशन, इन्ट्रायूरेटाइन इन्सेमिनेशन ,इंट्रायुरेटिन  तुबोपेरितोनेअल इन्सेमिनेशन और इन्ट्राट्यूबल इन्सेमिनेशन| वैसे तो पति के सुक्राणु इस्तेमाल होते है अगर उनमे कोई दिक्कत न हो तो या फिर किसी आदमी  न हो , तो फिर दान किया गया  शुक्राणु का उपयोग किया जाता है।

आर्टिफीसियल इनसेमिनेशन की प्रक्रिया -- सबसे पहले पुरुष के शुक्राणु को जमा के रखा जाता है और तैयारी के पहले इसे बाहर निकाल दिया जाता है।क्रिस्टोप्रोटेक्टेंट नाम के एक रसायन को शुक्राणु के नमूने में मिलाया जाता है। यह शुक्राणु को ठंडा रखने और पिघलाने दोनों में मदद करता है।आईयूआई के दौरान, शुक्राणु को सीधे गर्भाशय में कैथेटर की मदद से रखा जाता है। योनि की दीवारों को वीक्षक की मदद से खुला रखा जाता है। कैथेटर गर्भाशय के माध्यम से गर्भाशय ग्रीवा में प्रवेश करता है, और शुक्राणु को कैथेटर के माध्यम से धक्का दिया जाता है| सर्वोत्तम परिणामों के लिए ,यह प्रक्रिया महिला के ओवउलेट (अंडाशय) के ठीक बाद किया जाता है। एस समय वह सबसे उपजाऊ होती है, क्योंकि अंडे तभी पैदा होते हैं। ज्यादातर महिलाएं मासिक अवधि के पहले दिन के लगभग 2 सप्ताह बाद ओवउलेट होती हैं।

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