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पीरियड में ज्यादा हो रही है ब्लीडिंग, तो जानिए इसका कारण और निपटने के उपाय

पीरियड में ज्यादा हो रही है ब्लीडिंग, तो जानिए इसका कारण और निपटने के उपाय

प्रकाशित: 29 मई 2026

गर्भावस्था के दौरान जोखिम
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महिलाओं को अक्सर अपने पीरियड्स को लेकर कई सवाल और दिक्कत होती है. जिसमें सबसे अहम सवाल यही होता है कि अगर पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग हो रही है तो इसके क्या कारण हैं और इससे निपटने के उपाय क्या है? इस लेख में हम आपको सिलसिलेवार तरीके से पीरियड्स के दौरान होने वाली ज्यादा ब्लीडिंग की जानकारी तो देंगे ही साथ ही इससे कैसे निपटा जाए इसकी भी प्रमाणित जानकारी देंगे.

पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग क्यों होती है/  What Causes Heavy Bleeding During Periods in hindi

पीरियड्स में सामान्य से अधिक ब्लीडिंग यानी मेनोरेजिया का मतलब है हर घंटे पैड बदलना, 7 दिन से ज्यादा ब्लीडिंग, या बड़े क्लॉट्स आना.  इसके मुख्य कारणों में हार्मोनल असंतुलन जिसमें PCOS/थायरॉइड, गर्भाशय में फाइब्रॉएड या पॉलिप्स, और तनाव शामिल हैं.  इसके लिए आयरन युक्त भोजन करें, हाइड्रेटेड रहें और डॉक्टर से परामर्श लें. 

जी हां, पीरियड साइकिल की अवधि का बढ़ जाना और सामान्य से अधिक ब्लीडिंग होना हैवी पीरियड कहलाता है.  इसे मेनोरेजिया भी कहा जाता है. इस समस्या से ग्रस्त महिलाओं में रक्त का प्रवाह अधिक होने के अलावा ऐंठन का भी सामना करना पड़ता है. दरअसल, हार्मोनल फंक्शन में असंतुलन बढ़ने से लेकर फाइब्रॉएड और यूटर्स संबधी समस्याओं समेत कई कारणों से इस समस्या का सामना करना पड़ता है।

 हैवी ब्‍लीडिंग के लक्षण और इसके मुख्य कारण. 

महिला रोग विशेषज्ञों का कहना है कि पीरियड के दौरान एंडोमेट्रियल यानि गर्भाशय अस्तर निकल जाता है.. इसके चलते ब्लीडिंग का सामना करना पड़ता है, दरअसल, इस प्रक्रिया की मदद से शरीर भविष्य की गर्भावस्था के लिए तैयार होता है.  प्रेगनेंसी न होने पर गर्भाशय अपनी परत को बहा देता है, जिससे योनि से रक्तस्राव 3 से 5 दिन तक बना रहता है.  एक्सपर्ट के अनुसार यूटर्स की लाइनिंग पर बनने वाले यूटेराइन पॉलिप्स यूटेराइन मसल्स को प्रभावित करते हैं, जिससे ब्लीडिंग बढ़ती है.  इसके अलावा शरीर में विटामिन की कमी इस समस्या को बढ़ा देती है.  साथ ही हार्मोनल असंतुलन के चलते पीसीओडी का जोखिम बढ़ जाता है, जो ब्लड का फ्लो बढ़ा देता है. 

 

हैवी ब्लीडिंग के प्रमुख कारण

  1. हार्मोनल असंतुलन : एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन में गड़बड़ी गर्भाशय की परत को बहुत मोटा कर देती है, जिससे ब्लीडिंग ज्यादा होती है. यह पीसीओएस (PCOS), थायरॉइड या मोटापे के कारण हो सकता है. 
     
  2. गर्भाशय की समस्याएं : बच्चेदानी में फाइब्रॉएड (रसौली), पॉलीप्स या एडिनोमायोसिस (भीतरी ऊतक का मांसपेशियों में धंसना) जैसे विकास ब्लीडिंग और दर्द को बढ़ा सकते हैं. 
     
  3. इन्फेक्शन और बीमारियां : पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID) या गर्भाशय के कैंसर जैसे गंभीर संक्रमण भी इसके कारण हो सकते हैं. 
     
  4. दवाएं और उपकरण : खून पतला करने वाली दवाएं या कुछ गर्भनिरोधक उपकरण (जैसे कॉपर टी) भी ब्लीडिंग बढ़ा सकते हैं. 

यह वो कारण हैं जिनके चलते हेवी ब्लीडिंग हो सकती है. वहीं, चलिए अब आपको यहां यह भी बता देते हैं कि ब्लीडिंग से निपटने के क्या क्या उपाय हो सकते हैं.

ब्लीडिंग से निपटने के उपाय और देसी नुस्खे

  • ठंडी सिकाई : पेट के निचले हिस्से पर ठंडी सिकाई करने से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ती हैं और रक्त का प्रवाह कम होता है. 
     
  • दालचीनी और मेथी : दालचीनी की चाय गर्भाशय में रक्त प्रवाह को कम करने और ऐंठन कम करने में मददगार है.  मेथी के बीज भी हार्मोनल संतुलन सुधारते हैं. 
     
  • आयरन युक्त भोजन : ज्यादा ब्लीडिंग से एनीमिया का खतरा रहता है, इसलिए पालक, लें, और रेड मीट जैसे आयरन युक्त खाद्य पदार्थ खाएं. 
     
  • आयुर्वेदिक सहायता: कुछ हर्बल सप्लीमेंट ब्लीडिंग और दर्द को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं जिनका सेवन आप किसी विशेषज्ञ की मदद से कर सकती हैं।

यह वो उपाय हैं जिन्हें अपनाकर आप पीरियड्स के दौरान होने वाली हेबी ब्लीडिंग को रोक सकती हैं.. वहीं, यहां यह भी जानना जरूरी है कि अगर ब्लीडिंग फिर भी ज्यादा हो तो डॉक्टर से कब मिला जाए..

डॉक्टर से कब मिलें?

अगर आपको निम्नलिखित लक्षण महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

  • लगातार 2-3 घंटे तक हर घंटे पैड बदलना पड़ रहा हो.
     
  • ब्लीडिंग 7-10 दिनों से ज्यादा चल रही हो
     
  • बहुत बड़े खून के थक्के (clots) आ रहे हों
     
  • लगातार थकान, कमजोरी, चक्कर आना या सांस लेने में तकलीफ हो रही हो यह एनीमिया के संकेत हो सकते हैं.

इसके अलावा भी हेवी ब्लीडिंग को कम करने के उपाय हैं. जैसे

  1. आहार में लाएं परिवर्तन - नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार आहार में आयरन और विटामिन सी की मात्रा को बढ़ाकर ऑक्सीजन के स्तर में सुधार किया जा सकता है. इसके अलावा विटामिन सी से आयरन का एबजॉर्बशन बढ़ने लगता है. इससे एनीमिया के लक्षणों को दूर करने में मदद मिलती है और हर पल रहने वाली थकान से गचा जा सकता है.  इसके अलिए आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, खट्टे फल और सीड्स का सेवन करें.
     
  2. पानी भरपूर मात्रा में पीएं- शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स बैलेंस को मेंटेन रखने के लिए भरपूर मात्रा में पानी पीएं. इससे शरीर में ब्लड के वॉल्यूम में सुधार आता है, जिससे हेवी ब्लीडिंग की समस्या हल होती है.  दिन में 6 से 8 गिलास पानी अवश्य पीएं.
     
  3.  पूरी नींद लें- शरीर में बढ़ने वाले हार्मोनल असंतुलन को बनाए रखने के लिए भरपूर नींद लें. इससे ब्रेन एक्टिव रहता है और शरीर में बढ़ने वाली अन्य समस्याओं से राहत मिलती है. इससे शरीर में बढ़ने वाले कोर्टिसोल हार्मोन को नियंत्रित करने में मदद मिलती है.
     
  4. व्यायाम करें- पीसीओएस और थायरॉइड के लक्षणों से बचने के लिए व्यायाम और योग करें.  इससे मांसपेशियों में खिंचाव आता है और ब्लड का फ्लो बढ़ने लगता है. शरीर एक्टिव और हेल्दी बना रहता है. 

जी हां. ये वो उपाय है जिनके इस्तेमाल से हेवी ब्लीडिंग को पीरियड्स के दौरान कम किया जा सकता है.. वहीं, इस बात का भी विशेष ध्यान रखें कि अगर समस्या का समाधान नहीं होता तो तुरंत ही अपने डॉक्टर से सलाह लें और उपयुक्त इलाज करवाएं.

वहीं, पीरियड्स के दौरान नर्वस या मानसिक दवाब से बचने के लिए हल्के व्यायाम और सैर करना भी एक अच्छा विकल्प है. ध्यान इस बात का भी रखना चाहिए कि पीरियड्स के दौरान साफ सुथरे अंडर गारमेंट पहनने चाहिए. साफ सफाई का खास ध्यान रखे. सैनेटरी पैड अच्छी क्वालिटी के ही प्रयोग करें.

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