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सर्दी के मौसम में इन 10 बीमारियों से कैसे बचाएं खुद को और बच्चे को?

Prasoon Pankaj
गर्भावस्था

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Nov 27, 2019

सर्दी के मौसम में इन 10 बीमारियों से कैसे बचाएं खुद को और बच्चे को
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

सर्दी के मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए आपको विशेष रूप से सावधानियां बरतने की आवश्यकता है,खास करके बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर। आप सीजनल यानी मौसमी फलों और सब्जियों के बारे में जरूर जानते होंगे, हम लोग मौसम के हिसाब से कपड़े भी पहनते हैं ठीक उसी प्रकार से कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं जो किसी मौसम विशेष में ही हमें अपने चपेट में लेती है। आज हम आपको इस ब्लॉग में सर्दी के मौसम में होने वाली 10 बीमारियों के बारे में बताने जा रहे हैं और इसके साथ ही इन रोगों से बचने के लिए कुछ कारगर उपायों के बारे में भी जानकारी देने जा रहे हैं।

सर्दी के मौसम में होने वाली बीमारियां और उनसे बचने के उपाय / Tips to Prevent Winter Illnesses in Hindi

सर्दी का मौसम आपके हमारे और हमारे बच्चे के लिए तमाम मुश्किले लेकर आता है, तो सर्दियां आने से पहले हमें सावधान हो जाना चाहिए। नीचे दी गई जानकारी और इनसे बचने के उपाय जानें...

  • सर्दी के मौसम हाइपोथर्मिया (Hypothermia) - इस बीमारी की चपेट में आने पर शरीर बिल्कुल ठंडा पड़ जाता है। पानी के संपर्क में आने पर या फिर किसी काम से घर से बाहर निकलने पर सामान्य व्यक्ति के मुकाबले ज्यादा ठंड महसूस होने लगती है। इसके अन्य प्रमुख लक्षण हैं शरीर में थरथराहट, थकान का महसूस होना, बार-बार पेशाब लगना। अगर समय पर इस बीमारी का इलाज नहीं किया जाए तो ये जानलेवा भी साबित हो सकता है।              क्या हैं बचाव के उपाय?इस बीमारी के प्रभाव से बचने के लिए गर्म खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। अगर आपको ज्यादा ठंड महसूस हो तब घर से बाहर निकलने से बचने का प्रयास करें और डॉक्टर से जरूर चेकअप करवा लें।
  • स्वाइन फ्लू (Swine Flu) - सर्दी के मौसम में होने वाली प्रमुख बीमारियों में से एक है स्वाइन फ्लू। इस बीमारी के प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं:-बुखार, खांसी, कमजोरी, थकान, गले में खराश, मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द, नाक बहना, सांस लेने में तकलीफ। यह बीमारी एच1एन1 वायरस के कारण होता है और यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैलता है।                                                                                                             क्या हैं बचाव के उपाय?इस बीमारी से बचाव के लिए कुछ सावधानियां जरूर बरतें जैसे कि खांसते व छींकते समय में मुंह पर रूमाल जरूर रखें, अपने आसपास सफाई का ध्यान रखें, बाहर से आने पर अपने हाथों को जरूर साफ कर लें, बीमार व्यक्ति को अलग रखें। लक्षण महसूस होने पर तत्काल डॉक्टर या नजदीकी अस्पताल में संपर्क करें।
  • गले में खराश (Sore Throats)- इस मौसम के दौरान गले में खराश की समस्या का सामना संभवत: आपने भी किया होगा। दरअसल होता यह है कि हम लोग अपने कमरे की गर्माहट से जैसे ही बाहर निकलते हैं तो बाहर की ठंड हमें जकड़ लेती है। वायरल इन्फेक्शन के प्रभाव से गले में खराश की समस्या हो जाती है। इस समस्या से बुजुर्ग और बड़ों के अलावा बच्चे भी बुरी तरह से प्रभावित हो जाते हैं।                                                                   क्या हैं बचाव के उपाय? - इस समस्या से बचने के लिए जब कभी घर से बाहर निकले तो मफलर या स्कॉर्फ से चेहरे को जरूर ढ़क लें। इसके अलावा गुनगुने पानी में चुटकी भर नमक मिलाकर गरारा जरूर करें। गले में खराश से राहत दिलाने के लिए ये रामबाण उपाय साबित हो सकता है। 
  • हाथ पैर का ठंडा पड़ जाना - दिसंबर-जनवरी के महीने में जब कड़ाके की सर्दी पड़ती है और कई दिनों तक धूप नहीं निकलते हैं उस दौरान हाथ-पैर ठंडे पड़ जाते हैं। इसकी वजह से कंपकंपी, थरथराहट, और दांत किटकिटाने जैसी परेशानी का भी सामना करना पड़ सकता है। हाथ पैरों की उंगलियों के रंग में बदलाव आना, उंगलियों में दर्द एवं खुजलाहट का होना, ऐंठन हो जाना, उंगलियों में ब्लड सर्कुलेशन का कम हो जाना जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं। क्या हैं बचाव के उपाय? - इससे बचने के लिए आप खुद एवं अपने बच्चे को मोजे और दस्ताने पहनाएं। रजाई या कंबल में बैठे रहें। एक्सरसाइज करते रहने से भी शरीर में गर्माहट आती है।

[इसे भी पढ़ें - 6 तरीके सर्दी के मौसम में शिशु को स्वस्थ्य रखने के]

  • अस्थमा (Asthma)- अस्थमा के मरीजों को ठंड के मौसम में सबसे अधिक ख्याल रखने की आवश्यकता होती है। जैसा कि हम लोग जानते हैं कि इस दौरान कोहरे में मौजूद कणों की वजहों से एलर्जी होने का खतरा बना होता है। प्रदूषित हवा में सांस लेने के चलते अस्थमा के मरीजों की समस्याएं बढ़ जाती है। खांसी, छींक और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं हो सकती है।                                                                                                        क्या हैं बचाव के उपाय? - इन परेशानियों से बचने के लिए मास्क लगाकर ही बाहर निकलें। अगर मास्क ना हो तो अपने मुंह और नाक को मफलर या स्कार्फ से जरूर ढ़क लेना चाहिए। अपने डॉक्टर की सलाह के मुताबिक अस्थमा की दवाएं नियमित रूप से लेते रहें और इनहेलर को हमेशा अपने साथ में ही रखें।
  • फ्लू की समस्या (Influenza) - सर्दी के मौसम में अधिकांश लोगों को फ्लू यानि इ्ंफ्लूएंजा अपनी चपेट में ले लेता है। हम आपको बता दें कि फ्लू होने की मुख्य वजह संक्रामकर रेस्पिरेटरी वायरस होती है। जिन बच्चों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है उन्हें तो खासी सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। क्या हैं बचाव के उपाय? - फ्लू से बचने के लिए कुछ उपायों को आजमाना चाहिए जैसे कि संक्रमित व्यक्ति से दूर रहें, साबुन से अपने हाथ धोते रहें, पर्याप्त नींद लें, अपने नाक, आंख और कान को छूने से बचें।
  • हृदय की समस्या (Heart Diseases) - मेट्रो हार्ट इंस्टीट्यूट के चेयरमैन और सीनियर इंटरनेशनल कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ पुरुषोत्तम लाल का कहना है कि गर्मी के मौसम की तुलना में सर्दी के मौसम में हार्ट अटैक होने की संभावना तकरीबन 25 फीसदी तक बढ़ जाती है। डॉ पुरुषोत्तम लाल के मुताबिक इस मौसम में हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को भी पूरी एहतियात बरतनी चाहिए।                                                                                                 क्या हैं बचाव के उपाय? - दिल से संबंधित किसी प्रकार की परेशानी से बचने के लिए ब्लड प्रेशर की नियमित रूप से जांच करवाए। एक्सरसाइज करते रहें। ठंड के संपर्क में आने से बचें। अपने शरीर के वजन का खास ख्याल रखें और तेल मसालेदार खाने से परहेज रखें। पर्याप्त मात्रा में ऊनी व गर्म कपड़े पहने और तनाव से भी बचें।
  • ड्राई स्किन की समस्या (Dry Skin) - इस मौसम में आपने भी नोटिस किया होगा कि ड्राई स्किन की समस्या सबसे ज्यादा परेशान करती है। दरअसल नमी की कमी के चलते स्किन बेजान और ड्राई हो जाती है। इस समय में प्राकृतिक मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करना चाहिए। हां, एक और जरूरी बात की ज्यादा गर्म पानी से स्नान नहीं करें। रात को सोते समय में कोल्ड क्रीम या बॉडी लोशन जरूर लगा लें।  
     
  • कान में इन्फेक्शन(Eye Infection) - आलस कहें या ठंड का प्रकोप, सर्दी के मौसम में साफ-सफाई रखने में अधिकांश लोग लापरवाही बरत देते हैं। कानों की साफ-सफाई सही तरीके से नहीं करने की वजह से खुजली होने के साथ ही गंदगी जम जाती है। यही कारण है कि कानों में इन्फेक्शन होने का खतरा बन जाता है। कुछ परिस्थितियों में तो कान से पानी जैसा द्रव्य पदार्थ भी बाहर आने लगता है। क्या हैं बचाव के उपाय? - इस तरह की समस्याओं से बचने के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, धूम्रपान से बचें, संतुलित आहार का सेवन करें और पर्याप्त नींद लें।
  • जोड़ों का दर्द(Joint Pain) -  सर्दी के मौसम में उन लोगों को ज्यादा सावधानियां बरतनी चाहिए जिन्हें जोड़ों के दर्द या आर्थराइटिस की समस्या है। दरअसल इस मौसम में बांह, कंधे और घुटनों की नसें सिकुड़ जाती हैं और इसलिए दर्द भी अधिक परेशान करती है। इन परेशानियों से बचने के लिए आप नियमित रूप से व्यायाम करें, साइक्लिंग भी बेहतर उपाय हो सकता है। डॉक्टर की सलाह के मुताबिक दवाएं लेते रहें और हां संतुलित भोजन अवश्य करें। 

इसके अलावा भी कुछ और बीमारियां हैं जिनसे आपको ठंड के दौरान सतर्क रहना चाहिए।

  • कब्ज - इस मौसम में कब्ज एवं पाचन संबंधी परेशानी भी हो सकती है। इसका सबसे अच्छा उपाय है कि आप पर्याप्त मात्रा में पानी जरूर पीएं। खाना खाने के बाद जीरा पाउडर खाने से भी राहत मिलेगी।
     
  • सिरदर्द - ठंडी हवा के प्रभाव के चलते सिरदर्द की परेशानी हो सकती है। अगर सिरदर्द की समस्या से परेशान हों तब दूध में हल्की मात्रा में जायफल घिस कर इस मिश्रण को अपने सिर पर कुछ देर के लिए लगाकर रखें। 
     
  • होंठों का फटना - इस समस्या से आप और आपके बच्चे भी परेशान हो सकते हैं। प्राकृतिक मॉइश्चराइजर या कुंकुम का तेल लगाने से लाभ मिल सकता है।
     
  • बुखार - सर्दी के मौसम में बुखार को लेकर भी सावधानियां बरतनी चाहिए। मौसम में आए बदलाव को लेकर सबसे अधिक परेशानियां बच्चों को हो जाती है। बुखार आने पर डॉक्टर की सलाह के मुताबिक ही दवाओं का प्रयोग करें इसके अलावा दिन में 3 बार अजवाइन के चूर्ण का इस्तेमाल करने से भी लाभ मिल सकता है। अगर बुखार के अलावा खांसी और जुकाम साथ में हो तब पुदीने के पत्तों की चाय बनाकर जरूर पीएं।
     
  • कफ या बलगम का जमा हो जाना - विशेष रूप से बच्चों को सर्दी के मौसम में कफ या बलगम जमा हो जाने की समस्या आम बात है। हल्का गर्म पानी पीते रहें व अंजीर का सेवन करें। 
     
  • एड़ियों का फटना - त्वचा के शुष्क हो जाने की वजह से एड़ियों का फटना या आम बोलचाल की भाषा में बिवाइयां फटना जैसी परेशानी भी इस मौसम में हो सकती है। इस परेशानी से राहत पाने के लिए सबसे बेहतर उपाय यह है कि आप अपने एड़ियों पर प्याज का पेस्ट इस्तेमाल करें। जूतें पहनकर रखें।

क्यों होती है सर्दी के मौसम में ज्यादा बीमारियां? / Causes of Winter Health Issues in Hindi 

यूं तो बहुत सारे लोगों का फेवरेट मौसम सर्दी होता है लेकिन इसके साथ ही इस मौसम में सेहत को लेकर सतर्कता बरतने की भी आवश्यकता होती है। इसे पढ़ें...

  • सर्दी के मौसम में हवा ठंडी और नमीयुक्त होती है। इस समय में तापमान एक समान नहीं रहता है और अक्सर उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।
     
  • कड़ाके की सर्दी के दौरान कई दिनों तक तो धूप भी नहीं निकलते हैं और जैसा कि हम जानते हैं कि धूप की कमी के चलते कई सारी बीमारियां पनपने लगती है।
     
  • हवा में नमी अत्यधिक होने के कारण संक्रमण होने का भी खतरा बढ़ जाता है।
     
  • कोहरे में प्रदूषित कणों की मौजूदगी के चलते सांस संबंधी कई सारी बीमारियां निशाना बना लेती है।
     
  • ज्यादा सर्दी पड़ने की वजह से अधिकांश लोग एक्सरसाइज करने या अन्य शारीरिक गतिविधियों में सक्रिय नहीं हो पाते हैं।
     
  • गर्मी के मौसम के मुकाबले सर्दी के मौसम में ज्यादा खाना खाने की वजह से मोटापा भी बढ़ने लगता है।
     
  • अधिक देर तक बैठने या सोने की वजहों से भी बीमारियां अपने चपेट में ले सकती है।

 

ठंड के मौसम में अपने बच्चों के खान-पान और पहनावे को लेकर सतर्कता जरूर बरतें। आप अपने बच्चे को इस तरह का आहार दें जो इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार साबित हों। 

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इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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