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प्रेग्नेंसी के दौरान हाथों में या बालों में मेंहदी का प्रयोग कितना सुरक्षित ?

Prasoon Pankaj
गर्भावस्था

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Nov 17, 2020

प्रेग्नेंसी के दौरान हाथों में या बालों में मेंहदी का प्रयोग कितना सुरक्षित
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

भारतीय महिलाओं में मेंहदी को लेकर क्या क्रेज है इसके बारे में बताने की आवश्यकता नहीं, यहां तो विदेशी सैलानी भी जब आते हैं तो वे अपने हाथों में मेंहदी जरूर लगवाना चाहते हैं। अपने यहां किसी प्रकार का पर्व त्योहार का अवसर हो या फिर शादी विवाह जैसा उत्सव, हर मौके पर मेंहदी से श्रृंगार करने की परंपरा रही है। महिलाएं मेंहदी को अपने हाथों के अलावा बालों को खूबसूरत बनाने में भी प्रयोग करती हैं। हम यहां इस ब्लॉग में आपको बताने जा रहे हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान बालों में या हाथों में मेंहदी का प्रयोग करना कितना सुरक्षित है और किन महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना आपके लिए आवश्यक है।

प्रेग्नेंसी के दौरान मेंहदी का प्रयोग करना चाहिए या नहीं? / Using Henna (Mehndi) during Pregnancy - Is It Safe In Hindi?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान मेंहदी का इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन कुछ खास बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए।

  • प्रेग्नेंसी के दौरान अगर आप मेंहदी का इस्तेमाल करना चाहती हैं तो ये सुनिश्चित करिए की प्राकृतिक मेंहदी का ही प्रयोग करें।

  • केमिकल युक्त मेंहदी का प्रयोग करना नुकसानदेह साबित हो सकता है हालांकि बाजार में केमिकल युक्त मेंहदी आसानी से उपलब्ध हो जाता है लेकिन इसके इस्तेमाल से गर्भ में पल रहे शिशु को भी नुकसान पहुंच सकता है।

  • मेंहदी के पौधे से निकली शुद्ध हिना का इस्तेमाल गर्भावस्था में सुरक्षित है

  • प्राकृतिक मेंहदी से कभी काला रंग नहीं आता है। अगर काला रंग आ रहा है तो इसका मतलब की मेंहदी में केमिकल मिला हुआ है और केमिकल युक्त मेंहदी का प्रयोग बिल्कुल ना करें। इसके अलावा एक और जानकारी देना चाहूंगा कि नैचुरल मेंहदी का रंग आपके हाथों में एक से चार हफ्ते तक बना रह सकता है।

किन परिस्थितियों में प्रेग्नेंसी के दौरान मेंहदी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए?

जैसा कि हमने आपको ऊपर जानकारी दी की गर्भावस्था के दौरान आप मेंहदी का प्रयोग कर सकती हैं लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में मेंहदी का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

  1. हाइपरबिलिरूबिनिमिया यानी खूब में बिलरूबिन की मात्रा बढ़ जाने की समस्या हो

  2. ग्लूकोज-6 फास्फेट डिहाइड्रोजेनेस एंजाइम की कमी हो तो

  3. एनीमिया की समस्या होने पर

  4. खून या इम्यून सिस्टम से संबंधित समस्याएं होने पर

क्या गर्भावस्था के दौरान बालों में मेंहदी का प्रयोग कर सकते हैं?

ये बहुत महत्वपूर्ण जानकारी है, गर्भावस्था के दौरान बालों में मेंहदी लगाना सही नहीं है क्योंकि इसमें प्रयोग होने वाले केमिकल्स से गर्भ में पल रहे बेबी को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि इसको लेकर कुछ वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है लेकिन सुरक्षा के तौर पर गर्भावस्था में बालों में मेंहदी का इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दी जाती है। बाजार में उपलब्ध होने वाले मेंहदी की जगह शुद्ध मेंहदी का प्रयोग किया जा सकता है।

कुल मिलाकर आप इसको ऐसे समझिए कि शुद्ध मेंहदी या प्राकृतिक मेंहदी का इस्तेमाल  पर्व त्योहार या उत्सव के मौके पर आप गर्भावस्था के दौरान कर सकती हैं ।

  • गर्मी के मौसम में आप अपने सिर या हाथों पर मेंहदी लगा सकती हैं। फटी एड़ियों, फंगल इंफेक्श और नाखूनों को पोषण देने के लिए भी मेंहदी का प्रयोग किया जा सकता है।

  • गर्भावस्था के दौरान किसी भी प्रकार के रसायन युक्त क्रीम या प्रोडक्ट से बचना चाहिए। 

मेंहदी का इस्तेमाल करने से अगर निम्न लक्षण महसूस हो तो तत्काल डॉक्टर से जरूर संपर्क करें। 

  • जलन का अहसास

  • जहां मेंहदी लगाया गया उस जगह पर लाल निशान का होना

  • मेंहदी लगाने के बाद छाले पड़ जाना

  • जख्म हो जाना

  • त्वचा के रंग में किसी प्रकार का बदलाव महसूस करना

  • सूरज की रोशनी में जाने पर संवेदनशीलता महसूस करना

  • त्वचा पर दाग धब्बे निकल जाना

बेहतर तो यही होगा कि आप मेंहदी का पाउडर लगाकर अपने घर में ही पेस्ट बनाकर इस्तेमाल करें। प्रेग्नेंसी के दौरान मेंहदी लगवाने के समय लगातार एक ही पोजीशन में बैठने से आप बेचैनी महसूस कर सकती हैं। इसलिए इस दौरान कुछ ब्रेक अवश्य ले लिया करें। अगर मेंहदी की महक से मिचली जैसा महसूस हो तो इसका उपयोग करने से बचें। मेंहदी की तासीर ठंढ होती है और इसका लेप भी काफी ठंडा होता है। यही वजह है कि मेंहदी का इस्तेमाल गर्मी के मौसम में तो ठीक लगता है लेकिन सर्दी के मौसम में इसके प्रयोग से कठिनाई महसूस हो सकती है। मेंहदी का प्रयोग करने के बाद अगर किसी प्रकार की कठिनाई महसूस हो तो तत्काल अपने डॉक्टर  से जरूर संपर्क करें। 

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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