बच्चों को कैसे सिखाएं नकारात्म ...
बच्चों को कैसे सिखाएं नकारात्मक विचारों से दूर रहना ?
Published: 15/07/24
Updated: 09/09/24
बड़ों की तरह ही बच्चों में भी नकारात्मक विचारों का हावी होना एक आम समस्या है। उन्हें अपने विचारों को व्यवस्थित करना नहीं आता, इसलिए आपको नकारात्मकता से उबरने में उनकी मदद करनी चाहिए। उनके डर, उनकी परेशानियों से निकलने में आप उनकी मदद कर सकते हैं कुछ इस तरह:
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#1. भावनाओं पर नियंत्रण डालने की आदत
- उन्हें समझाएं कि वो जिस तरह की बातें सोचेंगे, वैसा ही महसूस करने लगेंगे. ख़ुशी, गुस्सा, दुःख आदि भावनाओं पर वो खुद नियंत्रण कर सकते हैं. सबके दिमाग में विचारों पर काबू पाने की ये शक्ति होती है.
#2. बताएं शारीरिक स्वास्थ्य पर होता है असर
- यदि आपका बच्चा नकारात्मक विचारों को खुद पर हावी होने देता है, तो ये उसके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालेगा. रिसर्च में भी ये साबित हो चुका है कि जब बच्चे सकारात्मक महसूस करते हैं और खुश रहते हैं तो उनके शरीर में भी सकारात्मक बदलाव आते हैं. उनके सांस लेने की गति सही रहती है और उनकी सांसें गहरी होने लगती हैं. उसके अलावा, उनकी मांसपेशियों में भी खिंचाव कम होता है.
- वहीँ, जब उनके मन में नकारात्मक विचार आते हैं, तब उनके शरीर का तापमान गिरने लगता है, उन्हें पसीना आने लगता है और उनकी साँसें भी तेज़ हो जाती हैं.
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#3. नकारात्मकता से दूर रहने को प्रेरित करें
- अगर उन्हें इस नकारात्मकता से निकलना न आता हो, तो वो दुनिया को नकारात्मक नज़रिए से देखना शुरू कर देते हैं. वो ऐसा समझना शुरू कर सकते हैं कि कोई उन्हें पसंद नहीं करता और उनके साथ बुरा ही होगा.
- उन्हें सिखाएं कि जब भी वो डरा हुआ या उदास महसूस करते हैं, तो उन्हें खुद से सवाल करना चाहिए कि वो क्या सोच रहे हैं और क्या वाकयी ये परेशान होने की बात है? ज़्यादातर बातें असल में उतनी गंभीर नहीं होती, जितना वो अपने दिमाग में सोच रहे होते हैं.
#4. आत्मविश्लेषण की आदत डालें
- बच्चों को ये आत्मविश्लेषण करना खुद नहीं पता होता, इसलिए आपको उन्हें ये कला सिखानी चाहिए, इससे वो आगे चल कर एक बेहतर इंसान बनेंगे.
- हमेशा उनकी परेशानियों में उन्हें ये एहसास दिलाएं कि आप उनके साथ हैं और वो आपसे हर समस्या के बारे में बात कर सकते हैं. आपको कभी भी उनकी समस्याओं को नकारना नहीं चाहिए.
#5. अपने जीवन में भी लायें सकारात्मकता
- अपने बच्चे से कभी भी ये न कहें कि वो बेकार की बात की वजह से परेशान हो रहे हैं. इससे होता ये है कि वो अपनी परेशानियों को आपके साथ बांटने में सहज नहीं रह जाते. जब उन्हें अपने डरों से खुद लड़ना आ जाता है, वो शक्तिशाली महसूस करते हैं. आपको उन्हें बस यही कला सिखानी है.
- आप किस तरह सोचते हैं, उसका प्रभाव इस पर पड़ता है कि आप कैसा महसूस करते हैं. केवल बच्चे को ही ये न सिखाएं, बल्कि खुद भी इस टेक्नीक को अपने जीवन में उतारें. आपको सकारात्मक देख कर आपके बच्चे को भी सकारात्मकता मिलती है.
ऊपर दी गयी बातों पर आप भी अमल करें और अपने बच्चों को भी अमल में लाने को प्रेरित करें। फिर देखिये आपके बच्चे में क्या बदलाव आते है। सकारात्मक बनें और सकारात्मकता फैलाएं।
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