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स्वास्थ्य

अगले 3 दशक में बहरेपन या सुनने की समस्या हर 4 में से एक व्यक्ति को- WHO

Prasoon Pankaj
0 से 1 वर्ष

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Mar 03, 2021

अगले 3 दशक में बहरेपन या सुनने की समस्या हर 4 में से एक व्यक्ति को WHO
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

साल 2050 तक प्रत्येक 4 लोगों में से 1 व्यक्ति को होगी सुनने की समस्या। WHO की एक रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले दिनों में सुनने से संबंधित समस्या व्यापक पैमाने पर सामने आ सकता है। सुनाई देने की इस समस्या का क्या समाधान हो सकता है इसको लेकर World Health Organisation (WHO) की तरफ से कई सुझाव भी बताए गए हैं जैसे कि संक्रमण, बीमारी, जन्म दोष और जीवनशैली के कई विकल्पों में बदलाव लाकर भी इसको नियंत्रण में लाया जा सकता है। WHO की इस रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा समय में दुनियाभर में 5 लोगों में से 1 शख्स को सुनने की समस्या है। हम आपको ये भी बता दें कि प्रत्येक साल 3 मार्च को वर्ल्ड हियरिंग डे ( World Hearing Day) के रूप में भी मनाया जाता है।

  •  अनुमान के मुताबिक सुनने में अक्षम लोगों यानि बहरेपन की समस्या से अगले 3 दशक में ये संख्या बढ़कर 2.5 बिलियन तक जा सकती है।

  • रिपोर्ट के मुताबिक बच्चे में 60 फीसदी तक बहरेपन की समस्या को रोका जा सकता है

  • दुनियाभर में 3.2 करोड़ बच्चे को ठीक से सुनाई नहीं देता है और इसमें 50 लाख बच्चे शामिल हैं।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के मुताबिक बच्चों में बहरेपन की समस्या को रोकने के उपाय / Prevention of Hearing Impairment In Hindi

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अनुसार बच्चों में बहरेपन के ज्यादातर मामलों को उचित टीकाकरण कराके, ध्वनि प्रदूषण पर कंट्रोल करके और इसके अलावा डॉक्टरों की सलाह के मुताबिक कुछ दवाओं के प्रयोग से रोका जा सकता है। मुख्य रूप से 2 प्रकार के बहरेपन की समस्या होती है। पहला जन्म के दौरान ध्वनि प्रदूषण और दूसरा अन्य प्रकार की समस्याओं केचलते नस संबंधी बहरापन। डॉ केके अग्रवाल के मुताबिक पिछले कुछ सालों में शिशुओं और युवाओं के सुनने की शक्ति में काफी कमी देखने को मिल रहे हैं। डॉ केके अग्रवाल ने कहा कि शिशुओं में ये समस्या आसानी से पकड़ नहीं आती है। कुछ बच्चों में जन्मजात दोष हो सकते हैं, इसके अलावा सुनने की शक्ति के कम होने में बाहरी कारण भी मुमकिन हो सकते हैं। जरूरी इस बात की है कि हम अपने आसपास में शोर के स्तर को कम रखें और स्वास्थ्य सेवाओं की मदद लें। यूनिवर्सल न्यूबॉर्न हियरिंग स्क्रीनिंग (UNHS) के मुताबिक भारत में इस तरह के प्रणाली का अभाव है जो नवजात शिशुओं में जन्मजात सुनने संबंधी समस्याओं की पहचान कर सके।

बच्चों में कान की समस्या ना पैदा हो इसलिए इन बातों का रखें ध्यान / Ear Infection Prevention In Hindi

कान को बहुत संवेदनशील अंग माना जाता है। इसलिए आप अपने बच्चे के कानों का विशेष ध्यान अवश्य रखें।

  1. आप ये सुनिश्चित करें कि बच्चे के कान में किसी प्रकार का चोट ना पहुंचे क्योंकि ये कान के ड्रम को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है और इससे बच्चे की सुनने की क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है।

  2. बच्चे के कानों की सफाई करने के दौरान माचिस की तिली या किसी प्रकार के नुकीले वस्तु का इस्तेमाल बिल्कुल ना करें। कानों की सफाई के लिए डॉक्टरी परामर्श के मुताबिक ईयर बड का इस्तेमाल करें।

  3. कई बार होता ये है कि नहाने के दौरान हमारे कानों में भी पानी अंदर प्रवेश कर जाता है, तो इस बात का खास ख्याल रखें कि बच्चे के कान में स्नान के समय में पानी प्रवेश ना करे।

  4. तेज आवाज में संगीत बच्चे के सामने ना सुनें या ऐसे जगहों पर बच्चे के साथ जाने से परहेज करें जहां ऊंची आवाज में ध्वनि विस्तारक यंत्र चल रहे हों।

  5. दीपावली के दौरान बच्चे के सामने जोर आवाज वाला पटाखें ना फोड़ें

  6. आपने अपने बच्चे को खसरा, रूबेला और मेनिन्जाइटिस जैसे संक्रमणों से बचाव के लिए टीका लगवा दिया है कि नहीं इस बात का जरूर ध्यान रखें।

  7. कभी भी आपको ये एहसास हो कि बच्चे के सुनने की क्षमता में कमी आ गई है तो तत्काल डॉक्टर से अवश्य संपर्क करें।

  8. स्विमिंग के दौरान खास सावधानियां बरतें- अगर आप अपने बच्चे के संग स्विमिंग पूल में जा रहे हैं तो आपको सतर्क रहना चाहिए। स्विमिंग पूल ना सिर्फ आपके बालों को बल्कि कानों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। पूल की सफाई के लिए क्लोरीन नामके रसायन का प्रयोग किया जाता है और पानी के माध्यम से अगर ये आपके कानों में चला गया तो फिर कान में दर्द या कान का बहना जैसी समस्याएं हो सकती है। जरूरी है कि आप स्विमिंग के दौरान ईयर प्लग का जरूर इस्तेमाल करें।

  9. शोर-शराबे वाले जगहों से दूरी- कुछ ऐसे जगह होते हैं जहां अत्यधिक शोर शराबा होता है जैसे कि फैक्ट्री, मशीनें, या गैराज तो इन जगहों पर बच्चे के साथ ना ही जाएं तो बेहतर

  10. कान में संक्रमण- कई बार कान के अंदर संक्रमण की समस्या भी हो सकते हैं इसके चलते अन्य बीमारियां जैसे कि खसरा इत्यादि आपके बच्चे को चपेट में ले सकते हैं। अगर किसी प्रकार का तरल पदार्थ कान में चला गया है तो संक्रमण से बचने के लिए कान की सफाई अवश्य करें। संक्रमण के चलते अगर सुनने की क्षमता में कमी आ गई है तो उसका उपचार दवा से मुमकिन है। 

  11. कान के पर्दे में अगर किसी प्रकार का नुकसान हो गया है तो फिर सर्जरी कराने की सलाह आपके डॉक्टर दे सकते हैं। 

  12. कई बार नसों में आई किसी प्रकार की कमी की वजह से भी सुनने की क्षमता प्रभावित हो जाते हैं तो ऐसी परिस्थितियों में हियरिंग एड का इस्तेमाल करने की सलाह आपके डॉक्टर दे सकते हैं। 

  13. जिस प्रकार आप अपने आंखों की नियमित रूप से जांच कराते हैं उसी प्रकार समय समय पर अपने कानों की भी जांच कराते रहें।

डॉक्टरों की सलाह के मुताबिक अगर आपकी उम्र 30 से 45 साल के बीच है तो 2 साल में कम से कम एक बार आप अपने कानों की जांच अवश्य कराएं।

कान के अंदर के वैक्स की कैसे करें सफाई? / how to clean the wax in ear In Hindi

कान के अंदर वैक्स का होना बिल्कुल नैचुरल बात है और ना ही ये किसी प्रकार की बीमारी के लक्षण होते हैं। वैक्स आपके कानों के लिए सुरक्षा कवच का काम करते हैं। हां अगर आपके कानों के अंदर दर्द महसूस हो रहा है तब आप वैक्स को लेकर परेशान हो सकते हैं। ये वैक्स ही हैं जो आपके कानों के अंदर बाहर की गंदगी को प्रवेश करने से रोकता है। कई बार होता ये है कि अगर बहुत ज्यादा मात्रा में वैक्स बनने शुरू हो गए हैं तो ये अंदर ही अंदर जमा होने लगता है। इसके चलते कान के कैनाल ब्लॉक हो सकते हैं और कान भारी लगने लग सकता है। सुनने में भी समस्या हो सकते हैं तब ऐसी परिस्थितियों में कान के अंदर ईयर बड ना डालें, इससे आपके कान के पर्दे को नुकसान पहुंच सकता है। अगर बहुत अधिक मात्रा में वैक्स कान के अंदर जम गए हैं तो फिर ईएनटी एक्सपर्ट के पास जाएं लेकिन इस बात को गांठ बांधकर रख लें कि झोला छाप लोगों से कान का वैक्स कतई नहीं निकलवाएं।

क्या मोबाइल फोन के चलते भी बहरापन हो सकता है? / Can Cell Phones Damage Your Hearing In Hindi?

मोबाइल फोन हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुके हैं। मोबाइल पर हम बात करते हैं, मोबाइल पर हम गाना सुनते हैं, वीडियो देखते हैं तो आइये मोबाइल को लेकर रिसर्च के नतीजे क्या कहते हैं। अलग अलग रिसर्च के मुताबिक मोबाइल फोन के द्वारा भी बहरेपन की समस्या हो सकती है।

  •  अगर आप मोबाइल पर तेज आवाज में बात करते हैं या उच्च वॉल्यूम पर संगीत सुनते हैं तो आपको बहरेपन की समस्या हो सकती है।

  • कुछ लोग मोबाइल पर घंटों बात करते रहते हैं, अगर आप बिना रोक के लगातार 2 घंटे से ज्यादा समय तक मोबाइल का उपयोग कर रहे हैं तो आपको सुनने की समस्या हो सकती है। इसलिए बीच-बीच में ब्रेक अवश्य ले लिया करें।

  • अपने मोबाइल पर तेज आवाज में संगीत सुनने से बचें

  • कई बार हमारे मोबाइल फोन की बैटरी गर्म हो जाती है तो गर्म मोबाइल का इस्तेमाल करने से सिरदर्द या कान से संबंधित समस्याएं हो सकती है।

  •  अगर आपका मोबाइल चार्च में लगा हुआ है तो उस समय में मोबाइल का प्रयोग नहीं करें। चार्ज से हटाने के बाद ही मोबाइल से कॉल करें या प्रयोग में लाएं।

  • जब आप मोबाइल से बात करते हैं तो अपने कानों से मोबाइल को सटाकर ना रखें बल्कि कुछ डिस्टेंस अवश्य रखें। प्रयास ये रखें कि कानों से मोबाइल को छुआकर बात ना करें।

  • अपने बच्चो को मोबाइल फोन का उपयोग करने से रोकने का प्रयास करें जब तक कि ये बहुत आवश्यक ना हो क्योंकि वयस्कों की तुलना में बच्चे का मस्तिष्क दोगुना रेडिएशन या विकिरण को अवशोषित करता है।

  • अगर आप अपने बच्चे को मोबाइल पर गेम खेलने के लिए दे रहे हैं तो ये प्रयास करें कि आपका फोन Airplane Mode में हो

  • सोते समय में अपने सिरहाने में मोबाइल को नहीं रखें और ईयर बड या ब्लूटूथ का ज्यादा प्रयोग करें 

इन सभी सुझावों का अवश्य पालन करें और इसके साथ ही ये बहुत जरूरी है कि कानों से संबंधित किसी प्रकार की समस्या हो तो तत्काल अपने डॉक्टर से संपर्क अवश्य करें।

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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