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क्यों जरूरी है जन्म के बाद बच्चे के लिए रोना ?

Parentune Support
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Created by Parentune Support
Updated on Oct 18, 2017

क्यों जरूरी है जन्म के बाद बच्चे के लिए रोना

जन्म के बाद बच्चे के रोने को लेकर आपने तरह-तरह की बातें सुनी होंगी। कोई इसे पौराणिक काल से जुड़ी बात मानता है, तो इसका साइंटिफिक कारण भी है। कई बार बच्चा जब जन्म के तुरंत बाद रोता नहीं है, तो डॉक्टर या नर्स उसे किसी तरह रुलाते हैं। अब सवाल उठता है कि आखिर जन्म के बाद बच्चे के लिए रोना क्यों जरूरी है, क्यों बच्चा जन्म के बाद रोता है।

ये है जन्म के बाद रोने की वजह

1. पहली बार बच्चे का रोना न सिर्फ सेहतमंद तरीके से प्रजनन का संकेत है, बल्कि रोने के साथ-साथ नवजात के फेफड़े भी सांस लेने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाते हैं।

2. शिशु जब मां के गर्भ में होता है, तब वह सांस नहीं लेता। वह एम्नियोटिक सैक नामक एक थैली में होता है, जिसमें एम्नियोटिक द्रव भरा होता है। उस समय शिशुओं के फेफड़ों में हवा नहीं होती। उनके फेफड़ों में भी एम्नियोटिक द्रव भरा होता है। इस स्थिति में बच्चे के सारा पोषण अपनी मां के द्वारा गर्भनाल के जरिये मिलता है। मां के शरीर से बच्चे के बाहर आते ही गर्भनाल काट दी जाती है। इसके बाद शिशु को उल्टा लटकाकर उसके फेफड़ों से एम्नियोटिक द्रव निकालना जरूरी होता है, ताकि फेफड़े सांस लेने के लिए तैयार हो सकें। इसके लिए जरूरी है कि बच्चा लंबी सांसें ले, जिससे फेफड़ों के कोने-कोने से एम्नियोटिक द्रव निकल जाए और फेफड़ों की कार्यात्मक इकाई एल्विओली तक हवा आने-जाने के मार्ग खुल जाएं। द्रव के निकल जाने पर श्वास का मार्ग खुल जाता है और वायु का संचार होने लगता है। इन सबके लिए रोने की क्रिया महत्वपूर्ण काम करती है। दरअसल रोते समय बच्चा गहरी सांस लेता है। यही वजह है कि जन्म के बाद अगर बच्चा खुद नहीं रोता है, तो उसे हल्की सी चपत लगाकर रुलाया जाता है।  

3. प्रसव की क्रिया मां और बच्चे दोनों के लिए कष्टदायक होती है। बच्चा बहुत संकरे मार्ग से निकलकर दुनिया में आता है। बाहर का वातावरण उसके लिए मां के शरीर के अंदर मिले वातावरण से अलग होता है। सुरक्षित माहौल से निकलकर मुश्किलों से भरे माहौल में आना भी बच्चे के रोने का एक कारण है।

रोने के पीछे पौराणिक मान्यता भी

-ब्रह्मा जी द्वारा इस संसार की रचना के दौरान ही बच्चे के कहां-कहां करके रोने का रहस्य छिपा हुआ है। विष्णु पुरान के अनुसार सृष्टि रचना के समय ब्रह्मा जी जब अपने समान पुत्र उत्पन्न करने के लिए चिंतन करते हैं तब उनकी गोद में नील वर्ण का एक बालक प्रकट होता है। यह बच्चा ब्रह्मा जी की गोद से उतरकर रोता हुआ इधर-उधऱ भागने लगा। ब्रह्मा जी ने जब रोने का कारण पूछा, तो बच्चे ने कहा कि मैं कहां हूं, कौन हूं। इस पर ब्रह्मा जी ने उसे बताया कि जन्म लेते ही तुमने रोना शुरू किया, इसलिए तुम्हारा नाम रूद्र है। रुद्र से पहले किसी ने भी उत्पन्न होने से पहले रोना शुरू नहीं किया। माना जाता है की तभी से जन्म के बाद बच्चे के रोने का नियम शुरू हो गया है।

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