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क्यों होती है दुर्लभ दादी और नानी की कहानियां?

क्यों होती है दुर्लभ दादी और नानी की कहानियां?

प्रकाशित: 29 सित॰ 2025

एक जमाना था जब बच्चे रात होते ही नानी और दादी के पास जाने के लिए उत्सुक रहते थे। उत्सुकता की वजह सोने के लिए दादी या नानी की और से सुनाई जाने वाली कहानियां होती थीं। पर अब वक्त बदल गया है और बदलते वक्त के साथ दादी ग्रैंडमदर हो गईं हैं। बदलाव की इस बयार में दादी और नानी की वो कहानियां भी पीछे छूट रहीं हैं। आज के आधुनिक समाज में दादी और नानी की कहानियां पूरी तरह से विलुप्त हो रहे हैं। आज के बच्चों में न तो कहानी सुनने व पढ़ने की पहले जैसी ललक है। ऐसे में बच्चों का बचपना कहीं खोता जा रहा है।

अब बच्चा स्मार्टफोन पर यूट्यूब के जरिये अलग अलग तरह के वीडियो देखता है, गेम खेलता है, लेकिन इतना कुछ मिलने के बाद भी उसे दादी और नानी की विलुप्त कहानियों का मजा नहीं मिलता, शायद मिल भी नहीं सकता। 

आज यूट्यूब पर आपको हर तरह के वीडियो मिल जाएंगे, इनमे बच्चों की पोयम से लेकर कहानी तक है, लेकिन इनमें दादी मां जैसी कहानियों की गंभीरता, सीख और विलुप्तता जैसी बात नहीं दिखती है। ऐसे में कहा जा सकता है कि सही मायनों में दादी और नानी की कहानियां दुर्लभ होती हैं। उन कहानियों का आनंद न तो आज के समय में कोई पुस्तक दे सकती है और न ही गूगल और यूट्यूब जैसे सर्च प्लैटफॉर्म। 

 

 

दादी और नानी की कहानियों की खास बातें

 

  • दादी और नानी की प्राय हर कहानी उत्सुकता, रहस्य, रोमांच से भरी रहती थी, जिन्हें सुनकर बच्चों में अलग तरह के आनंद का संचार होता है।
     
  • दादी और नानी की हर कहानियों से बच्चे को कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। बच्चे इन सबसे बहुत कुछ सीख लेते थे, लेकिन ये बात आज की कहानियों में नहीं दिखती।
     
  • वो राजा-रानी जैसा किरदार, लोककथाएं, कहानी में बच्चों का जुड़ाव, हर कहानी में संदेश जैसी चीजें आज की कहानी में नहीं मिलतीं।

 

इस ऐप पर मिलेंगी नानी और दादी की कहानियां
 

हिंदी स्टोरी नाम के इस मोबाइल ऐप्लिकेशन में हिंदी की ढेरो मनोरंजक कहानियां आपको मिल जाएंगी। इस ऐप में 100 से ज्यादा हिंदी कहानियां हैं। सभी कहानियों को अलग-अलग कैटिगरी में डाला गया है, ताकि आसानी से लोग अपने हिसाब की कहानी निकाल सकें।

 

मिस्ड कॉल पर सुनें कहानी


दादी और नानी की कहानियों का महत्व इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज कई राज्यों में इस विलुप्त होती परंपरा को जिंदा रखने के लिए मिस्ड कॉल पर ऐसी कहानियां सुनाने की सेवा शुरू की गई है। अभी तक यह सुविधा राजस्थान, यूपी, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा में शुरू की जा चुकी है। एनजीओ प्रथम बुक्स की ओर से शुरू की गई इस सेवा में मिस्ड कॉल पर कहानियां सुनाई जा रहीं हैं। एनजीओ के पास 2000 कहानियों का भंडार है। एनजीओ की ओर से जारी नंबर 8033094244 पर मिस्ड कॉल करके मुफ्त में कहानी सुनी जा सकती है। मिस्ड कॉल देने के 2 मिनट के अंदर कॉलबैक आती है। कॉल रिसीव करने के बाद हिंदी के लिए 1 और अंग्रेजी के 2 दबाकर संबंधित भाषा में आप कहानी सुन सकेंगे। एक कॉल पर दो कहानी और 1 नंबर से 40 कहानी सुनी जा सकती है।

 

 

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