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शिशु के साथ सफर को आसान बनाने के तरीके

preschooler | 5 years

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शिशु के साथ सफर को आसान बनाने के तरीके

प्रकाशित: 27 नव॰ 2019

तो माता-पिता बनने के बाद आप पहली बार सफर करने की योजना बना रहे हैं और आपको इस बात की चिंता भी सता रही है कि शिशु को लेकर सफर करना कैसा होगा। आसानी से समझा जा सकता है कि पहली बार शिशु के साथ छुट्टियों में सफर करना कैसा मुश्किल हो सकता है। आपके शिशु को कार या हवाई सफर में ऊब हो सकती है, थक जाता है और चिड़चिड़ाने लगता है और उसे काबू करना पूरी तरह से मुश्किल हो जाता है। तो आप कैसे पक्का करेंगे कि हर चीज आराम से हो और आप तथा आपका शिशु छुट्टियों का मजा उठा पायें? यहां कुछ तरीके हैं जिन्हें अपना कर आप बिना किसी अड़चन के अपने पूरे सफर का मजा ले सकते हैं।

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पहली बात जो मैनें सीखी वो यह कि शिशु खुद तालमेल कर सकता है। हालांकि शिशु के साथ पहले कुछ सफर मुझे अपने परिवार में ही करने पड़े क्योंकि हमें दो खास शादियों में भाग लेना था। और इसकी वजह से मेरे शिशु को अपने चाचा-चाची की शादी में भाग लेने के लिये देा महीने के अंदर तीन हवाई सफर करने पड़े। लेकिन यह हमारे लिये कोई छुट्टियां मनाने जैसा नहीं था फिर भी इन यात्राओं ने हमारे अंदर यह यकीन पैदा किया और शादी के समय होटल और रिष्तेदारों के यहाँ रूकने से हमें तजुर्बा हुआ कि हम शिशु के साथ सफर कर सकते हैं।  

लेकिन फिर वही बात कि ये परिवार की शादियां थीं और वहाँ मेरे आस-पास मदद करने वाले काफी लोग थे और इसलिये मेरे अंदर यह उलझन पैदा हो गयी कि क्या मैं खुद शिशु को लेकर कोई सफर कर सकती हूँ या नहीं। पहली असली छुट्टियां भी अपने माता-पिता और भाई के साथ थीं तो फिर से मेरी मदद करने वाले बहुत से हाथ थे और इस सबने मुझे यह महसूस करने में मदद की, कि हम उसे कहीं भी और किसी के भी पास ले जायें, शिशु बहुत हद तक खुद ही तालमेल कर सकता है। वह कार में ही सो लेता है और हमारी प्लेट से कुछ भी खा सकता है (अगर यह ज्यादा मसालेदार न हो)। तो इस तरह तीन शादियों और एक परिवार का सफर करने के बाद मैं सफर में शिशु की देखभाल करने में माहिर हो चुकी थी।

हमने शिशु के साथ कार में बहुत सी छोटी-बड़ी यात्रायें की। समय के साथ, सफर में उसके साथ लेकर चलने वाला सामान कम हो गया। लेकिन सफर में उसको व्यस्त रखने के लिये मुझे अभी भी बहुत सी चीजें साथ लेकर चलना पड़ता है।

बातें हैं जो बच्चे के साथ सफर को और आसान बना सकती हैं

मेरे ख्याल से आरामदायक सफर पूरे हो चुके हैं और हम मंजिल पर पंहुच गये हैं। लेकिन कुछ बातें हैं जो शिशु के साथ आपके सफर को और आसान बना सकती हैं...

  1. ऐसे शादी-शुदा जोड़े के साथ सफर करें जिनके बच्चे आपके शिशु के हमउम्र हों, यह उन्हें व्यस्त रखेगा।
  2. आमतौर पर बच्चे समुद्र या नदी के किनारे को पहाड़ी जगहों से ज्यादा पसंद करते हैं।
  3. अगर आपकी पूरे दिन सफर करने की योजना हो तो याद रहे कि बच्चों को बीच-बीच में रूक कर सुस्ताने और आराम करने की जरूरत होती है।
  4. छुट्टियों में शिशु के साथ खरीदारी? मेरे ख्याल से इसे पूरी तरह से न कहें। एक छोटे से गंाव में भी हम महिलायें अपनी खरीद-फरोख्त की मौज-मस्ती से ध्यान नहीं हटा सकतीं। हमें कुछ न कुछ तो खरीदने के लिये बिल्कुल मिलेगा। ऐसे में हमारे पति या कोई पुरूष साथी आमतौर पर हमे बचाने के लिये आते हैं।
  5. बहुत सी किताबों के साथ सफर करें।
  6. साधारण और रंग करने वाली पेंसिल के साथ रंग भरने वाली किताबें लेकर चलें। कईबार ये कमाल की चीज होती हैं, पर याद रहे कि हर शिशु के लिये आपके पास यह अलग-अलग होनी चाहिये।  
  7. पेन और कुछ भी लिखने-पढ़ने वाली किताब भी सफर में बहुत काम आती है। यदि ट्रेन या हवार्ह सफर हो तो शिशु को इसके बारे में लिखने के लिये बोलकर आप उसे व्यस्त रख सकते हैं।

यदि आप अपना सफर आराम और मौज-मस्ती के साथ करना चाहती हैं उन सभी चीजों को अपने साथ लेकर चलें जिनमें शिशु को मजा आता हैं। यह कुछ भी हो सकता है जैसे लिखने-पढ़ने वाली किताबें या उसका कोई पसंदीदा खेल जो वो खेलता है। जब तक वह व्यस्त रहेगा तब तक आपको आराम करने या आपकी पसंद का कोई चीज करने की छूट रहेगी।

 

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