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बच्चों को छुहारा खिलाने से सेहत को मिलते हैं ये 5 फायदे, जानें कब और कैसे खिलाएं

बच्चों को छुहारा खिलाने से सेहत को मिलते हैं ये 5 फायदे, जानें कब और कैसे खिलाएं

Published: 29/05/25

Updated: 29/05/25

आहार आदतें
विकास के लिए आहार

छोटे बच्चों की सेहत और विकास में छुहारे (सूखे खजूर) का सेवन फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इसके लिए सही उम्र और तरीका जानना ज़रूरी है।

छुहारा यानी सूखा खजूर, एक प्राकृतिक ड्राई फ्रूट है जो पोषण से भरपूर होता है। इसमें आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यह बच्चों की ग्रोथ, इम्युनिटी और हड्डियों के विकास के लिए फायदेमंद हो सकता है—अगर सही उम्र और मात्रा में दिया जाए।

हालांकि छोटे बच्चों का पाचन तंत्र पूरी तरह विकसित नहीं होता, इसलिए छुहारा देने से पहले कुछ बातों को समझना जरूरी है। इस लेख में जानिए कि छुहारा बच्चों के लिए कैसे फायदेमंद है, किस उम्र से इसे दिया जा सकता है, और कैसे इसे सुरक्षित रूप से डाइट में शामिल करें।

छुहारा कब देना शुरू करें?

छुहारा एक ड्राई फ्रूट है, जो कड़ा और चबाने में थोड़ा मुश्किल होता है। इसलिए इसे बच्चों की डाइट में सीधे शामिल करना जल्दीबाज़ी होगी।

  • 6 महीने से छोटे बच्चों को छुहारा बिल्कुल नहीं देना चाहिए।

  • 8-10 महीने की उम्र में जब बच्चा कुछ ठोस आहार खाने लगता है और पाचन तंत्र थोड़ा विकसित हो जाता है, तब थोड़ी मात्रा में छुहारा पानी या दूध में उबालकर उसका पेस्ट या पानी देना शुरू किया जा सकता है।

  • 1 साल की उम्र के बाद छुहारे को अच्छी तरह भिगोकर या पका कर दिया जा सकता है, लेकिन पूरे छुहारे या टुकड़े देने से बचें—चोकिंग का खतरा रहता है।

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छुहारा खिलाने के 5 प्रमुख फायदे

1. खून की कमी (एनीमिया) से बचाव

छुहारे में आयरन की मात्रा अच्छी होती है, जो शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है। बच्चों में अक्सर आयरन की कमी देखी जाती है, खासकर जब वे ठोस आहार की ओर बढ़ते हैं।

  • छुहारा खाने से शरीर में रेड ब्लड सेल्स का निर्माण बेहतर होता है।

  • यह थकान, चिड़चिड़ापन और सुस्ती जैसे लक्षणों से राहत दे सकता है।

2. हड्डियों और दांतों को मजबूती

छुहारा कैल्शियम और मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत है। ये दोनों मिनरल्स बच्चों की हड्डियों और दांतों की मजबूती में अहम भूमिका निभाते हैं।

  • विकासशील उम्र में हड्डियों की ग्रोथ के लिए यह जरूरी तत्व हैं।

  • छुहारा बच्चों को रिकेट्स या हड्डियों की कमजोरी जैसी समस्याओं से बचाने में सहायक हो सकता है।

3. इम्युनिटी को बूस्ट करता है

छुहारे में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइटोन्यूट्रिएंट्स शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। यह बच्चों को बार-बार होने वाले सर्दी-जुकाम, खांसी और वायरल संक्रमण से बचाने में मदद कर सकता है।

  • नियमित मात्रा में छुहारा देना बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है।

  • इसमें मौजूद नैचुरल शुगर और फाइबर एनर्जी भी देते हैं, जिससे बच्चे एक्टिव रहते हैं।

4. पाचन में सहायक

छुहारे में फाइबर की मात्रा अच्छी होती है, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करती है। बच्चों में अक्सर कब्ज की समस्या होती है, जिसे छुहारा खाने से कम किया जा सकता है।

  • भीगे हुए छुहारे का पेस्ट या पानी कब्ज से राहत दिलाने में मदद करता है।

  • यह गैस, अपच और पेट दर्द जैसी समस्याओं से भी बचाव करता है।

5. स्वस्थ वजन और एनर्जी के लिए अच्छा

छुहारा नेचुरल शुगर और हेल्दी कैलोरीज़ का अच्छा स्रोत है। यह बच्चों को ज़रूरी एनर्जी देता है, खासकर अगर वे ज़्यादा एक्टिव हैं या वजन कम है।

  • बिना रिफाइन्ड शुगर के मीठे विकल्प के रूप में छुहारा बहुत बेहतर होता है।

  • यह लंबे समय तक एनर्जी बनाए रखता है और शरीर को थकने से बचाता है।

बच्चों को छुहारा कैसे और कितनी मात्रा में दें?

छुहारा से फायदों के साथ-साथ सुरक्षित सेवन भी ज़रूरी है। नीचे दिए गए तरीकों से छुहारा बच्चों को आसानी से दिया जा सकता है:

सुरक्षित तरीके:

  • छुहारा पानी में भिगोकर रातभर रखें और सुबह उसे मैश करके छान लें। यह पानी 1 साल के बच्चे को थोड़ा-थोड़ा करके दिया जा सकता है।

  • छुहारा दूध में उबालकर उसका पेस्ट बनाकर खीर या दलिया में मिलाकर दें।

  • छुहारे की प्यूरी बनाकर फल या सब्ज़ियों के साथ मिक्स करें ताकि टेस्ट अच्छा लगे।

मात्रा:

  • 8-12 महीने के बच्चों को सप्ताह में 2-3 बार, केवल आधा छुहारा या उसका पानी देना पर्याप्त होता है।

  • 1 साल के बाद 1 छुहारा प्रतिदिन (अच्छी तरह पकाकर) दिया जा सकता है।

नोट: छुहारे को कभी भी बिना भिगोए या कच्चा न दें। यह बच्चे के गले में अटक सकता है या पचाने में दिक्कत हो सकती है।

कब न दें छुहारा? – सावधानियाँ

  • अगर बच्चे को दस्त, गैस, पेट दर्द या अपच की समस्या हो रही हो, तो छुहारा न दें।

  • किसी भी नए आहार की शुरुआत करते समय, पहले थोड़ा-थोड़ा दें और 3 दिन तक देखें कि कोई एलर्जी तो नहीं हो रही।

  • जिन बच्चों को ड्राई फ्रूट से एलर्जी हो सकती है, उन्हें छुहारा देने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

छोटे बच्चों की डाइट में छुहारा एक पोषक तत्वों से भरपूर विकल्प हो सकता है, लेकिन इसे देने का तरीका और समय सही होना चाहिए। यह शरीर को आयरन, कैल्शियम और फाइबर जैसे ज़रूरी पोषक तत्व देता है, जिससे बच्चों की ग्रोथ और इम्युनिटी में सुधार होता है।

छुहारा हमेशा अच्छी तरह भिगोकर, पकाकर और मैश करके दें। किसी भी संदेह की स्थिति में बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा। याद रखें, बच्चे की सेहत में छोटे-छोटे कदम भी बड़ा असर डाल सकते हैं।

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