चिकित्सा
बच्चों में गुलियन बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) – लक्षण, कारण और उपचार
Published: 23/06/25
Updated: 23/06/25
गुलियन बैरे सिंड्रोम (Guillain-Barre Syndrome – GBS) एक ऐसा न्यूरोलॉजिकल विकार है जो आमतौर पर नहीं देखा जाता. इसे दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल विकार माना जाता है. जो करोड़ों बच्चों में से एक को ही होता है. लेकिन यह एक ऐसी समस्या है जिस पर कई दशकों से लगातार शोध हो रहा है. इस बीमारी में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली यानी तंत्रिका तंत्र की नसों को यह विकार कमजोर कर देता है. यह बच्चों में और व्यस्कों दोनों में हो सकता है. लेकिन, बच्चों में यह कम ही होता है. आईये हम आपको इस बारे में जानकारी लक्षण और उपचार के बारे में विस्तृत जानकारी आपको प्रदान करते हैं.
सबसे पहले बात करते हैं लक्षण की. बच्चों में GBS यानी गुलियन लक्षण अचानक शुरू हो सकते हैं. और खतरा यह भी होता है कि यह तेजी से बिगड़ सकता है. सामान्य लक्षण में निम्नलिखित शामिल हैं.
1. मांसपेशियों में कमजोरी होना
बच्चों में यह समस्या मांसपेशियों में कमजोरी से शुरू होती है. जो पैरों, हाथों या चेहरे की मांसपेशियों में कमजोरी के साथ शुरू हो सकती है. यह पैरों से शुरू होकर ऊपर की ओर बढ़ती है.
2. झुनझुनी या सुन्नता
हाथों और पैरों में झुनझुनी या सुई चुभने जैसा एहसास होता है. बच्चों को बेचैनी होती हैं और वह ठीक से चल नहीं पाते. जमीन पर पैर पटकना या सीधे खड़े होने में समस्या हो सकती है.
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3. चलने में समस्या होती है, बच्चे कमजोरी के चलते गिर जाते हैं
बच्चों में जब यह समस्या होती है तब बच्चे चल नहीं पाते. सीढ़िया चढ़ने या वस्तुओं को पकड़ने में परेशानी होती है.
4. दर्द या ऐंठन का शिकार
बच्चे दर्द और ऐंठन का शिकार हो जाते हैं. खासकर पीठ और पेरों में ऐंठन इसके गंभीर लक्षण होते हैं.
5. सांस लेने में कठिनाई होना जी घबराना
बच्चों में सांस लेने में कठिनाई होती है. सांस की मांसपेशियां प्रभावित हो सकती हैं जिससे बच्चे को सांस लेने में परेशानी होती है और बच्चा लगातार रोता है. रोने के दौरान हिचकी की परेशानी होती है.
6. चेहरे की कमजोरी, बोलने, चबाने की निगलने की समस्या
बच्चों में जब GBS के लक्षण होते हैं तब बच्चा बोल नहीं पाता. कुछ चबा नहीं पाता और भोजन निगलने में परेशानी का सामना करता है. लगातार ठीक प्रकार से भोजन नहीं कर पाता.
7. हृदय गति असमान्य हो जाती है ब्लड प्रेशर में उतार चढ़ाव
बच्चों में इस समस्या के होने से दिल की गति असामान्य हो सकती है. ब्लड प्रेशर ऊपर नीचे जा सकता है. जिससे बच्चे को भारी परेशानी होती है. पसीना बहुत आता है बैचेनी बढ़ जाती है.
GBS के यह आम लक्षण हैं. जो बच्चों में देखे जाते हैं. इन लक्षण के होने से बच्चा ठीक से बोल भी नहीं पाता और लगातार परेशान रहता है. और आईये अब आपको हम इसके कारण बता देते हैं. जिनकी वजह से यह होता है.
GBS बीमारी होने के लक्षण
जीबीएस बीमारी होने के कोई सटीक कारण नहीं है. यह अज्ञात बीमारी है. लेकिन फिर भी इससे जुड़े कई कारण हैं जो हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं.
1. इन्फेक्शन
जीबीएस अक्सर किसी वायरल या बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कारण होता है. जैसे कैंपिलोबैक्टर जेजुनी, इन्फ्लूएंजा या साइटोमेगालोवायरस के होने के बाद. बच्चों में कभी कभी सामान्य सर्दी, पेट दर्द या पेट के इन्फेक्शन के बाद यह देखा जाता है. लंबे समय तक पेट की समस्या होने से भी यह हो सकता है.
2. प्रतिरक्षा प्रणाली की आसामान्य प्रतिक्रिया या शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना
अक्सर देखा गया है कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर वायरस स्वस्थ तंत्रिका पर हमला करती है. जिससे नसों की बाहरी परत जिसे मायलिन शीथ कहा जाता है उसे नुकसान पहुंचता है. इससे भोजन पचता नहीं है और लगातार कमजोरी होती है. शरीर को ताकत नहीं मिलने से मांसपेशियां लगातार कमजोर हो जाती हैं.
3. टीकाकरण से भी हो सकती हैं यह समस्या
बहुत से मामलों में देखा गया है कि सही टीकाकरण नहीं होने के चलते भी जीबीएस की बीमारी बच्चों को हो जाती है. लेकिन, यह बहुत ही कम मामलों में देखा गया है.
4. आनुवंशिकता भी हो सकता है कारण
बहुत से मामलों में देखा गया है कि आनुवंशिकता इसका कारण है. लेकिन सीधे तौर पर आनुवंशिक कारण इसकी वजह नहीं माना जाता है. कुछ बच्चों मे यह समस्या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के साथ ही देखी जाती है.
यह तो रही बात, लक्षण और कारण की साथ ही अब हम आपको इसके उपचार की भी जानकारी देते हैं.
जीबीएस का उपचार क्या है?
GBS बीमारी का कोई सटीक या पूर्ण उपचार नहीं है. लेकिन समय पर उपचार और लक्षणों को कम किया जा सकता है. धीरे धीरे बच्चे में इम्यून पावर को ठीक किया जा सकता है. बच्चे को धीरे धीरे दिए गए उपचार बीमारी से रिकवरी करने में मदद करते हैं. जो इस प्रकार से हैं.
1. IVIG या इम्यूनोग्लोबुलिन थेरेपी
यह थेरेपी काफी पुरानी है. इसमें इंट्रावेनस इम्यूनोग्लोबुलिन (IVIG) दवा दी जाती है, जो शरीर की रोग प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करने में मदद करती है.
2. प्लाज्मा एक्सचेंज (प्लाज्मा फेरेसिस)
इस प्रक्रिया के तहत किसी दूसरे व्यक्ति से प्लाज्मा पीड़ित मरीज को दिया जाता है. इस थेरेपी में हानिकारण एंटीबॉडीज को हटाया जाता है. और नया प्लाज्मा मरीज के शरीर में नयी इम्यूनिटी तैयार करता है. यह एक मंहगा और कारगर उपाय माना जाता है.
3. फिजियोथेरेपी
फिजियोथेरेपी के माध्यम से मांसपेशियों को ताकत देने और उनमें गतिशीलता बनाए रखने की कोशिश की जाती है. इसलिए कहा भी जाता है की बच्चों की लगातार मालिश करना बच्चों को स्वास्थ्य प्रदान करती है.
4. दर्द निवारक दवाओं का इस्तेमाल
पीड़ित बच्चों को दर्द निवारक दवा दी जाती है जिससे उसका दर्द कम होता है.
5. सांस लेने में सहायता देना
और अगर बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो रही होती है या कठिनाई हो रही होती है तो मरीज को वेंटिलेटर की आवश्यकता हो सकती है. हल्के केस में ऑक्सीजन दिया जा सकता है. ऐसे मामलों में बच्चे की गहन निगरानी रखनी जरूरी होती है.
रिकवरी और बीमारी के साइड इफेक्ट्स
अधिकांश बच्चों में जीबीएस बीमारी पूरी तरह से ठीक हो जाती है. लेकिन इसमे समय भी लग सकता है. कभी कभी रिकवरी हफ्तों में ठीक हो जाती है तो कभी कभार इसमें महीनों भी लग सकते हैं. बीमारी के साइड इफेक्ट्स जैसे की मांसपेशियों में कमजोरी बनी रह सकती है लेकिन समय के साथ वह भी ठीक हो जाती है. हां. कुछ मामलों में न्यूरोलॉजिकल असर लंबे समय तक देखें जा सकते हैं. लेकिन इसके लिए भी निरंतर बच्चे की समस्या पर ध्यान देने से इसे ठीक किया जा सकता है.
सावधानियां और सलाह
जीबीएस बीमारी में सबसे जरूरी सावधानी है. अगर बच्चे में कमजोरी, झुनझुनी या दिए गए लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. क्योंकि लक्षणों को दरकिनार करने से समस्या बढ़ सकती है. वहीं, ध्यान यह भी रखना चाहिए कि जीबीएस की कोई निश्चित रोकथाम नहीं है लेकिन, स्वच्छता, इन्फेक्शन से बचाव सबसे कारगर उपाय है. वहीं, ध्यान देने वाली बात यह भी है कि गुलियन बैरे सिंड्रोम बच्चों में एक गंभीर लेकिन लाइलाज बीमारी नहीं है. समय पर इलाज लेने से इस बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है.
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