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जन्म के तुरंत बाद शिशु को नए के बजाय पुराने कपड़े क्यों पहनाए जाते हैं?

 जन्म के तुरंत बाद शिशु को नए के बजाय पुराने कपड़े क्यों पहनाए जाते हैं?

प्रकाशित: 05 जुल॰ 2025

रोग प्रबंधन और खुद की देखभाल
Clothing & Accessorries

नवजात शिशु का जन्म इस संसार की सबसे सुंदर रचना है. नया मानव जन्म प्रकृति का वो अद्भुत वरदान है जो पृथ्वी पर रहने वाले मनुष्य और जीवों को प्राप्त हुआ है. कहा तो यह भी कहा जाता है कि मानव जन्म एक ऐसी प्राकृतिक घटना है जो सिर्फ इस पृथ्वी पर ही होती है. ऐसे में मानव जन्म के साथ ही उसकी देखरेख भी उतनी ही आवश्यक है. क्योंकि जीवन अनमोल है.  हर एक जीवन की अपनी संरचना है.

अब सवाल यह है कि नवजात शिशु की देखरेख कैसे की जाए. जन्म के तुरंत बाद शिशु को गर्मी, सर्दी या ज्यादा या कम तापमान से कैसे सुरक्षित रखा जाए. वहीं, सवाल यह भी है कि क्या जन्म के तुरंत  बाद शिशु को नए के बजाए  पुराने  कपड़े पहनाने चाहिए?

दरअसल, यह सवाल बेहद अहम है. क्योंकि, भारतीय परिवेश में या यूं कहे कि परंपरा और कई सांस्कृतिक और व्यावहारिक प्रथाओं के चलते नवजात शिशुओं को पुराने कपड़े पहनाए जाते हैं. इसके प्रमुख तौर पर पांच बड़े कारण हैं. आईये हम सिलसिलेवार तरीके से आपको समझाते हैं कि आखिरकार भारत में जन्म के तुरंत बाद नए कपड़ों की बजाए पुराने कपड़े  क्यों पहनाए जाते हैं.

1. नवजात शिशु कोमल होते हैं, नरम और आरामदायक कपड़े पहनाना आवश्यक

नवजात शिशु को नए की जगह पुराने कपड़े पहनाने का एक  बड़ा कारण यह है कि नए कपड़ों के मुकाबले बार-बार धोने के चलते पुराने कपड़े नरम हो जाते हैं. जो शिशु की नाजुक त्वचा के लिए बेहद आरामदायक माने जाते हैं. नए  कपड़ों में रसायन, डाई या स्टार्च हो सकता है, जो शिशु  की नाजुक त्वचा को नुकसान पहुंचा  सकता है. 

2.  पुराने कपड़ों से शिशु की त्वचा को सुरक्षा मिलती है 

क्योंकि नवजात शिशु की त्वचा बेहद संवेदनशील होती है. पुराने कपड़े पहले से ही कई बार धुल चुके होते हैं, धुलने के चलते इसमें मौजूद रसायन पानी से धोने के चलते निकल जाते हैं. कठोरता खत्म हो जाती है जिससे  त्वचा पर रैशेज या जलन का खतरा खत्म हो जाता है. 

3.  पर्यावरण और जेब के लिए अच्छा होना भी है कारण 

नवजात शिशु के लिए पुराने कपड़े का इस्तेमाल परिवार की जेब पर  तो कम असर डालता ही है साथ ही पर्यावरण की सुरक्षा भी करता है. आर्थिक रूप से किफायती है और पर्यावरण के लिए भी बेहतर माना जाता है. 

4.  सांस्कृतिक परंपरा और प्रथा का निर्वाहन होता है 

भारत में कई समुदायों का मानना है कि पुराने कपड़े पहनाने से नवजात को बुरी नजर नहीं लगती. नकारात्मक ऊर्जा से शिशु का बचाव होता है. इसके अलावा परिवार के बड़े बच्चों के कपड़े पहनाने से शिशु का परिवार के साथ भावनात्मक जुड़ाव भी बनता है. 

 

5.  स्वच्छता सुनिश्चित होती है 

नए कपड़े बाजार से आने के बाद भी धूल या कीटाणुओं से इंफेक्टिड हो सकते हैं. पुराने कपड़े क्योंकि घर में ठीक प्रकार से साफ पानी से धोकर सुखाकर शिशु के लिए तैयार किए जाते हैं ताकि शिशु की त्वचा को कोई नुकसान न हो. यह प्रथा परिवार, क्षेत्र या व्यक्तिगत पसंद पर भी निर्भर करती है. 

यह तो रही यह बात की जन्म के बाद नवजात शिशु को पुराने कपड़े क्यों पहनाने चाहिए. हालांकि आजकल कई लोग नए कपड़े भी खरीदते हैं और उन्हें शिशु को पहनाने से पहले अच्छी तरह से धोकर सुखाकर ही इस्तेमाल करते हैं. ताकि शिशु की त्वचा को किसी भी तरह का नुकसान ना हो. वहीं, चलिए  अब आपको यह भी बताते हैं की अगर शिशु के लिए नए कपड़े खरीदे जा रहे हैं तो किस बात का ध्यान रखना चाहिए. 

1.  कपड़े सूती और आरामदायक होने चाहिए 

नवजात शिशु के लिए पहले कपड़े बेहद आरामदायक होने जरूरी हैं. क्योंकि शिशु जन्म के दौरान काफी कोमल और नाजुक होते हैं. त्वचा भी काफी संवेदनशील होती है. ऐसे में कपड़े आरामदायक तो हो ही साथ ही सूती कपड़े से तैयार किए गए होने चाहिए. क्योंकि सूती कपड़े पसीना, पानी तो सोखते ही हैं साथ ही हवादार भी होते हैं. 

2. चटकीले कपड़ों की जगह हल्के रंग के कपड़े ही खरीदें 

नवजात शिशु के लिए चटकीले भड़काऊ रंग के कपड़े नहीं खरीदने चाहिए. क्योंकि शिशु के लिए हल्के रंग ना सिर्फ उसके शरीर के लिए अच्छे होते हैं साथ ही शिशु की आंखों के लिए भी आरामदायक होते हैं. शिशु के मूड को ठीक रखने में हल्के रंग बेहद मददगार साबित होते हैं. 

3.  कोमल कपड़ों  का ही चुनाव करना चाहिए 

इस  बात का खासतौर पर ध्यान रखना चाहिए कि नवजात शिशु के लिए कोमल कपड़ों का ही चुनाव करें. क्योंकि कोमल कपड़े बच्चे को आराम देने के साथ-साथ त्वचा संबंधी परेशानियों से बचाने में भी  मददगार साबित होते हैं. 

4. टाइट फिट या छोटे कपड़ों के खरीदने से बचे 

नवजात शिशु क्योंकि प्रारंभिक चरण में होता है. शिशु जब  नींद में नहीं होता तो लेटे-लेटे ही कई बार करवट लेता है. अपने हाथ पैर चलाता है. ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि शिशु के कपड़े टाइट या फिट नहीं होने चाहिए. 

5. सिले सिलाए कपड़ों  की  जगह बगैर सिले हुए कपड़े बेहतर 

जन्म के बाद कोशिश यह भी करनी चाहिए कि सिले हुए कपड़ों की जगह बगैर सिले हुए कपड़े शिशु को पहनाने चाहिए. क्योंकि इससे बच्चे को आराम रहता है. जैसे हाथ का बनाया हुआ तिकोना लंगोट और सूती कपड़े की हल्की कमीज. हालांकि अब बाजार में इस तरह के कपड़े भी मौजूद हैं.

क्या शिशु के लिए सूती कपड़ों  के अलावा भी दूसरे कपड़े पहनाए जा सकते हैं ? 

यह इस बात पर निर्भर करता है कि शिशु का जन्म कहां हो रहा है. अगर शिशु का जन्म किसी पहाड़ी ठंडे इलाके में हो रहा है तो उसके लिए सूति कपड़ों के अलावा गर्म  कपड़ों की भी आवश्यकता होती है. ऐसे में शिशु के लिए अच्छी मुलायम ऊन के कपड़े पहनाने चाहिए. वहीं, अगर शिशु का जन्म किसी गर्म जगह पर हुआ हो तो उसके लिए मौसम के हिसाब से ही कपड़ों का चुनाव करना चाहिए. इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए  कि शिशु का जहां जन्म हुआ है वहां का मौसम कैसा है. क्योंकि कपड़ों का चुनाव मौसम पर ही अधिकतर निर्भर करता है.  

 

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