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बच्चों को कैसे सिखाएं उनकी भावनाओं को समझना और अपनाना?

preschooler | 4 years

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बच्चों को कैसे सिखाएं उनकी भावनाओं को समझना और अपनाना?

प्रकाशित: 01 जून 2025

भावनाओं को नियंत्रित करने का पहला कदम होता है उन्हें समझना और अपनाना। जब माता-पिता अपनी भावनाओं के बारे में बच्चों के सामने बात करते हैं, तभी बच्चे अपनी भावनाओं को समझना सीखते हैं। बच्चों को अलग-अलग भावनाओं के बारे में सिखाने की शुरुआत आप 4 स्टेप यानि चरणों में कर सकते हैं।

बच्चों को कैसे सिखाएं उनकी भावनाओं को समझना? / How to Teach Kids About Feelings In Hindi

आप अपने बच्चे को इन 4 विषयों के बारें में जरूर बताएं और इसके अलावा अलग-अलग परिस्थ्तियों में इन सभी भावनाओ का सही इस्तेमाल करना भी जरूर सीखाना चाहिए ।

  1. खुशी का अहसास- ख़ुशी एक सकारात्मक भावना है, जो प्यार, उत्साह और आनंद के वक़्त महसूस होती है।
     
  2.  डर महसूस करना- डर किसी ख़तरे के वक़्त महसूस होता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि जब इंसानों को डर लगता है तो वो कई बार गुस्से में भी तब्दील हो जाता है।
     
  3. गुस्सा जाहिर करना
  • चिढ़, झुंझलाहट आदि गुस्से के प्रतीक हैं। ऐसा भी होता है कि जब इंसान अपना गुस्सा ज़ाहिर नहीं कर पाता, तो उसे अवसाद हो सकता है।
     
  • बच्चों को इन भावनाओं के बारे में सिखाने के लिए ध्यान दें कि उन्हें कब ये भावनाएं महसूस हो रही हैं और उसी वक़्त उनके बारे में बात करें. उन्हें इनके बारे में और बताएं।
     
  • इसके बारे में उन्हें लेक्चर देने से अच्छा है इसे सवाल-जवाब के ज़रिये समझाया जाए। उन्हें बताएं कि आप भी ये सभी भावनाएं महसूस करते हैं, साथ ही ये भी बताएं कि इन भावनाओं के समय किस तरह रियेक्ट किया जाना चाहिए, गुस्से और दुःख जैसी नकारात्मक भावनाओं को कैसे नियंत्रित करना चाहिए
     
  • इस तरह बात करने से आपके और आपके बच्चे के बीच का भावनात्मक रिश्ता भी मज़बूत होगा। अगर उनका भाई या बहन है तो उसकी भावनाओं के बारे में भी बात करें। इस तरह वो उनके प्रति भी सहानुभूति महसूस कर पाएंगे और उनके बीच एक सकारात्मक रिश्ता बनेगा।
     
  • आप उन्हें कहानी सुनाते हुए कहानी के किरदारों की भावनाओं के बारे में बता कर उन्हें ज़्यादा सामाजिक बना सकते हैं। ऐसा करने पर उनके साथियों के साथ भी उनका बर्ताव बेहतर होता है।

4. दुःख का एहसास

कुछ खो जाने पर या निराशा होने पर इंसान को दुःख का एहसास होता है। इसके परिणामस्वरूप भी कई बार लोग गुस्सा महसूस करने लगते हैं।

ये इमोशंस यानि भावना ही तो है जो हमें आपस में एक दूसरे को कनेक्ट करती है। हम एक दूसरे के सुख दुख में शरीक होते हैं। अलग-अलग अवसरों पर अपनी भावनाओं का इजहार करना बहुत जरूरी होता है। अब इसको ऐसे समझिए कि अगर कोई आपका दोस्त या जानने वाला किसी परेशानी में है या उसके साथ कुछ भी अनहोनी हो गई है तो हम अफसोस  जाहिर करेंगे और उसकी हिम्मत बढाएंगे लेकिन वहीं दूसरी तरफ उसने कुछ सफलता हासिल कर लिया है या खुशी की बात है तो हम उसको बधाई देंगे। यही तो भावना है और इसके मुताबिक ही हम अपने भाव व्यक्त करते हैं। ये भाव भले हमारे चेहरे से हो या हमारे बॉडी लैंग्वेज से। तो इसलिए जरूरी है कि हम अपने बच्चे को भावनाओं को समझना और अपनाना जरूर सीखा दें।

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