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आपका शिशु कब बोलने लगेगा? कैसे सिखाएं बच्चे को बोलना?

Deepak Pratihast
0 से 1 वर्ष

Deepak Pratihast के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Jan 29, 2020

आपका शिशु कब बोलने लगेगा कैसे सिखाएं बच्चे को बोलना
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

शिशु का दिमाग का पहले 7 वर्ष में सबसे अधिक बढता है और शिशु इस समय सबसे ज्यादा सीखते हैं। अच्छी तरह बोलना भी शिशु इसी समय में सीखते हैं। अगर उसके आस-पास साफ भाषा और अच्छे बोल-चाल वाला माहौल हो तो यह शिशु को जल्दी बोलना सीखने में बहुत मदद करता है। [इसे भी जानें - क्या हैं 10 संकेत शिशु के पहला शब्द बोलने के?]

ये शुरूआती वर्ष ही वह समय होता है जब दिमाग बढ़ता और सोचने-समझने के लिये तैयार होता है। आपका शिशु  इन्हीं वर्षों में बोलना सीखता है, भाषा सीखता है और समाज से जुड़ने के लिये बोलना भी शुरू करता है। अच्छा बोलचाल वाला माहौल, अन्य लोगों की साफ और गूंजती हुयी आवाजें और भाषा ही वह चीजें हैं जो आपके शिशु को बोलना सीखने के लिये मदद करती हैं।

आवाज, शब्द और भाषा क्या है? / What Is Voice, Speech & Language in Hindi?

आवाज, शब्द एवं भाषा हमारे बोलचाल के जरूरी हिस्से हैं। शुरुआती दिनों में यह सब बच्चे के दिमागी विकास लिए बहुत मायने रखता है। जरूर पढ़ें...

  • फेफडे से निकलने वाली हवा, गले में आवाज पैदा करने वाली परतों के बीच दब कर कंपन करती है जिसकी वजह से आवाज पैदा होती है।
  • बोलने के लिये जीभ की मांसपेशी, होंठ, जबड़े और गले में आवाज बनाने वाले अंग के एक साथ काम करने से पैदा होने वाली पहचानने योग्य आवाज को शब्द कहते हैं और इन्ही शब्दों से भाषा बनती है।
  • भाषा शब्द और वाक्यों का एक समूह है जो हमें इस तरीके से बात कहने के लिये तैयार करती है जिसे लोग समझ सकें। यह बोल कर, लिख कर, चित्र बनाकर या बिना बोले इषारों से जैसे पलकें झपका कर या मुंह बनाकर जाहिर की जाती है।

शिशु कब बोलना शुरू करते हैं? / Signs That Tells Baby Will Soon Start Talking in Hindi

आपका शिशु  पैदा होने के क्षण से ही बात करना शुरू कर देता है। वह भूखा होने पर, गीला होने पर या बेचैन होने पर रो कर आपसे बात करता है लेकिन जल्दी ही बोलने और भाषा सीखने के लिये उसे एक लम्बी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है जिससे अपने हाव-भाव और शब्दों से खुद को जाहिर करने में उसकी क्षमता बढ़ जाती है।

  • जन्म से तीन महीने की उम्र तक आपका शिशु आवाजों को पहचानने लगता है और जानी-पहचानी आवाज की ओर में अपना सिर ले जाने की कोषिष करता है तथा बोलने वाले का चेहरा देखने लगता है। तीन से चार महीने का होने पर वह तुतलाने लगता है जो उसके बोलने की शुरूआत की असली निषानी है और अब आपका शिशु  मुस्कुरा कर, हंस कर, खुषी अथवा नाराजगी जाहिर कर समाज से जुड़ने की कोषिष करता है। सबसे पहले ‘प’, ‘ब’ और ‘म’ एंव ‘पुह’, ‘बुह’ और ‘मुह’ जैसी आवाजें आपके शिशु  के तुतलाने में शामिल होती हैं। [रोचक रिसर्च - बच्चे सबसे पहले क्यों बोलते हैं मम्मी पापा?]
  • शिशु  की उम्र 9 से 12 महीने हो जाने पर वह हाथ लहरा कर ‘बाय-बाय’ करने लगता है, ‘न’ करना सीख जाता है और काफी देर तक समझ में न आने वाले जुड़े हुये शब्द जैसे ‘का-कू’ के साथ तुतला कर बड़ों के बात करने के तरीके की नकल करता है। शिशु  अपना पहला शब्द जो कि ‘दादा’, ‘पापा’ या ‘मामा’ हो, अपने पहले जन्मदिन के आसपास बोलने लगता है। 18 महीने की उम्र तक शिशु  एक-बार में आपकी कही बात को समझने लायक हो जाता है और उसे 20 से 100 शब्दों की जानकारी हो जाती है। 2 वर्ष की उम्र तक शिशु  की जानकारी 200 शब्दों से ज्यादा हो जाती है और वह दो षब्द वाले वाक्य बोलना शुरू कर देता है, सवाल करने वाले लहजे में बुदबुदाता है, सुने हुये शब्दों को दुहराता है, उसी तरह बोलने की कोषिष करता है तथा ‘कहाँ है?’ ‘यह क्या है?’ जैसे आपके छोटे सवालों को समझने लगता है।
  • 3 वर्ष की उम्र पूरा होने पर आपके शिशु  को 800 से 900 शब्दों की अच्छी जानकारी हो जाती है। वह 2 से 3 शब्दों में बातें करता है, ‘हाँ’ या ‘न’ में जवाब देता है और खुद को ‘मुझे’ कहकर बताने लगता है। इस समय अपने छोटे षिुषु से बात करने और उसके मन में क्या है, यह जानने पर आपको बहुत खुषी होती है। 4 वर्ष की उम्र में आपका शिशु  बोलना सीख लेता है और 4 से 5 शब्द वाले जुडे़ हुये वाक्य बना कर बोलने लगता है। वह अपनी बात कह सकता है, आपसे बात कर सकता है, और कहानियां सुनाता है। वह आपकी कविताऐं सुन कर खुष होता है और हंसी-मजाक भी समझने लगता है।  
  • बाल-विहार जाने की उम्र पार करते-करते आपका शिशु  कौन? क्यों? कहाँ? और कैसे? शब्दों का प्रयोग करते हुये आपसे सवाल करना शुरू करता है तथा इन सवालों के जवाब भी देने लगता है। वह अपना नाम एंव पूरा पता बताने लगता है, लम्बे वाक्य बोलने लगता है तथा आपसे बातचीत भी करने लगता है।

भाषा और बोलना सीखने में अपने शिशु की मदद कैसे करें?/How to Make Child Start Speaking in Hindi 

जिस समय आपका शिशु , आस-पास के माहौल से भाषा सीखता है तो उसका हौसला बढ़ाने के लिये यह तरीके अपनायें। जरूर पढ़ें...

  • अपने शिशु से बात करें और उसके साथ बातचीत में शामिल हों
  • बोलचाल में अलग-अलग ढंग और शब्दों का प्रयोग करें
  • बात कहने के बाद रूकें और अपने शिशु  को प्रतिक्रिया का समय दें
  • अपने शिशु के लिये गाने गायें हो सकता है कि शिशु  आपके शब्दों को न समझ सके लेकिन वो आपकी आवाज को पहचानेगा और प्रतिक्रिया देना सीखेगा
  • इषारों का प्रयोग करते हुये अपने शिशु  के साथ बार-बार ‘पैट अ केक’, ‘पीक अ बू’ जैस खेल खेलें
  • 6 से 9 महिने की उम्र होने पर अपने शिशु  को आईना दिखायें और उससे पूछें कि ‘यह कौन है?’

इसे भी पढ़ें: बोलना सीखने में बच्चे की मदद कैसे करें?

  • शिशु  को सिखाने के लिये आप शरीर के अंगो की ओर इषारा करते हुये जोर-जोर से उनका नाम लें जैसे ‘नाक’, ‘गाल’
  • अपने शिशु  को नाटकीय खेलों में शामिल करें

क्यों है खतरा अगर बच्चा बोलना शुरू नहीं करता है ?

क्या हैं खतरे के संकेत अगर बच्चा न बोले? यहाँ कुछ बातें हैं जो आपके के लिये चिंता का कारण हो सकती हैं और जिनके लिये विषेषज्ञ की सलाह लेना ठीक रहेगा।  

  • यदि शिशु  ने 16 से 18 महीने की उम्र तक समझ में आने वाला एक भी शब्द न बोला हो
  • यदि शिशु  2 वर्ष की उम्र तक दो अक्षर वाले वाक्य न बोल पाता हो
  • शिशु  अपना पहला शब्द 18 महीने की उम्र में बोले पर इसके बाद भाषा विकास की गति को बरकरार न रख पाये
  • अपना पहला अक्षर 9 से 18 महीने के बीच बोलने के बाद शिशु  इसके आगे न बढ सके।

यहाँ से संदर्भ लिए गए (References):

1. Feeding Guide for the First Year ~ URMC
2. Child development 9–12 months ~ Healthyw
3. Baby’s Hearing, Vision, and Other Senses: 9 Months ~ KidsHealth
4. Child development (4) – nine to 12 months ~ Better Health
5. The development of motor behavior ~ NCBI
6. Data Table of Infant Weight-for-age Charts ~ CDC

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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कमैंट्स()
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| Jan 25, 2020

के बच्चों के एक से डेढ़ साल के बच्चों के सर के पीछे छोटी छोटी गांठ क्यों होती है

  • रिपोर्ट

| Apr 27, 2019

meri 5 years ki beti h jo some words bolti h but sentence ni bol pati aisa kyu.

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