1. यदि बच्चे को डिसिप्लिन सिखाना ...

यदि बच्चे को डिसिप्लिन सिखाना चाहते हैं, तो अपने जीवन में लाएं ये 8 बदलाव

यदि बच्चे को डिसिप्लिन सिखाना चाहते हैं, तो अपने जीवन में लाएं ये 8 बदलाव

प्रकाशित: 12 अग॰ 2025

अपडेटेड: 12 अग॰ 2025

एक कामयाब और खुशहाल जीवन जीने के लिए जिंदगी में अनुशासित होना बहुत जरूरी  है। इसके लिए हमें बच्चों को छोटी उम्र से ही अनुशासन की सीख देनी चाहिए। दरअसल बचपन हमारे जीवन का वह समय होता है जब हम बड़ी जल्दी सीखते हैं और उस दौरान जो कुछ हमने सीख लिया है वो जीवन भर हमारे काम आता रहता है।

क्या है अनुशासन/ What is discipline in Hindi

अनुशासन या डिसिप्लिन कुछ नियमों और कायदों के साथ जीवन जीने का तरीका है इसलिए बच्चे को यह बताना जरूरी है कि नियम-कायदे के साथ जीवन जीने का अर्थ उनकी आजादी पर पाबंदी न होकर किसी काम को सही ढंग से करने की सीख है। ऐसा करना मुश्किलों को हल करने की काबिलियत बढ़ाने के साथ-साथ सही समय पर सही कार्य करने में मदद करता है।

 बच्चे को अनुशासन की सीख देते समय आपको पालन करना है इन बातों का/ When you teach the discipline to the child, you have to follow in Hindi

1. नियम और व्यवस्था का पालन करना: माता-पिता बच्चे के सबसे पहले गुरु होते हैं और घर उनका पहला स्कूल होता है। इसलिए बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए जो बात सबसे ज्यादा मायने रखती है वह है माता-पिता को खुद के अपने जीवन में अनुशासित होना। मां-बाप को चाहिए कि वह नियमित और व्यवस्थित जीवन जियें, अपने खुद के आचरण, व्यवहार और जीवन रीति से बच्चों को अनुशासन की सीख दें।

2. गुस्से और चिड़चिड़ेपन से बचें: ज्यादा गुस्सा और चिड़चिड़ापन हमारे अंदर की सौम्यता को खत्म कर देता है। हमारे व्यवहार की कठोरता बच्चों के मन में हमारे लिए डर और दबाब पैदा करती है इसलिए बेहतर है कि उनके सामने गुस्सा करने व चिड़चिड़ेपन की आदत बदलें। यह बच्चों को मिलनसार बनाने के लिए बहुत जरूरी है।

3. भेदभाव करने की आदत बदलें: कई मां-बाप अपने बच्चों के बीच भेदभाव करने के आदी होते हैं। जैसे बड़े और छोटे बच्चे के बीच या खासकर लड़के-लड़की के बीच भेद। आपका ऐसा करना बच्चों के अंदर भी भेदभाव करने की भावना पैदा करता है और आगे चलकर यह उनके व्यवहार का हिस्सा बन जाता है और दूसरों के साथ अच्छे रिश्ते बनाने में मुश्किल पैदा करता है।

4. सच बोलने के साथ मर्यादित भाषा बोलें: बच्चों के सामने झूठ बोलना या उनसे झूठ बोलना, बच्चों में अपने मां-बाप की बात पर विश्वास करना कम करता है। ऐसा होने पर उन्हे सही बात भी झूठ ही लगती है। आपका सच बोलना बच्चे को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करेगा। इसके अलावा बोलते समय भद्दे शब्दों के इस्तेमाल से बचें। कभी गलती करें तो उसे स्वीकार करने से  न हिचकिचाएं।

5.मुश्किल हालातों से तालमेल की खूबी: जीवन हमेशा एक सा नहीं रहता और कई बार हमें कठिन हालातों का सामना भी करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में  अपने साथ डर, गुस्सा, दुःख और उदासी जैसी भावनाएं भी लेकर आती है। इन हालातों का सामना करने में आपका संयम और आत्मविश्वास बच्चों को जीवन की कठिन परिस्थितियों से लड़ने और उनसे पार पाने की सीख देता है।

6. खुदगर्ज नहीं, हमदर्द बनें: बच्चों के सामने अपनी उदारता और दयालुता का प्रर्दशन करें। उन्हे इस बात का अहसास होना चाहिए कि जब आप किसी की मदद करते हैं तो यह तारीफ पाने के लिए नहीं होता बल्कि आपको दूसरों की मदद करना पसंद है और आपको ऐसा करना अच्छा लगता है। बच्चों को जज्बाती बनाने के लिए आपका ऐसा होना बहुत जरूरी है।

7. सभी के लिए सम्मान की भावना रखें: दूसरों के लिए आदर और सम्मान की भावना हमारे अनुशासित होने की सबसे बड़ी निशानी है। हमें छोटे-बड़े लोगों का सम्मान करते हुए देखने पर बच्चे ऐसा करने के लिए प्रेरित होते हैं। बच्चों में यह खूबी उनकी अच्छी परवरिश और संस्कारी होने को भी जाहिर करती है।

8. ईमानदार रहें: ईमानदार होना भी सामाजिक अनुशासन का हिस्सा है। यदि आप चाहते हैं कि बच्चा सादगी और ईमानदारी सीखे तो आप खुद उसके आदर्श बनें, ताकि बच्चा जान सके कि ईमानदारी की नीव बहुत मजबूत होती है और कोई भी आपके साथ धोखाधड़ी नहीं कर सकता।

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