गर्भावस्था-के-दौरान-जोखिम ...
मिसकैरेज होने के बाद इस दौर से उबरने के लिए क्या करें?
Published: 19/04/22
Updated: 19/04/22
गर्भ का गिर जाना यानि मिसकैरेज के दर्द को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है, यह वेदना और कष्ट किसी भी महिला के लिए असहनीय है लेकिन इसके साथ ही इस सच को भी स्वीकार करना चाहिए कि आप भविष्य की उम्मीदें और आगे बेहतर होने के सपने को इनकार नहीं कर सकती हैं। गर्भावस्था के दौरान होने वाला नुकसान उस दंपति के लिए कष्टदायक हो सकता है जिन्हें इस दौर से गुजरना पड़ा है।
क्या है मिसकैरेज?
मेडिकल साइंस की भाषा में मिसकैरेज को 'स्पॉन्टेनस अबॉर्शन' या 'प्रेग्नेंसी लॉस' भी कहते हैं। मिसकैरेज तब होता है जब भ्रूण की गर्भ में ही मौत हो जाती है। गर्भावस्था के 20 हफ़्ते तक अगर भ्रूण की मौत होती तो इसे मिसकैरेज कहते हैं और इसके बाद भ्रूण की मौत को 'स्टिलबर्थ' कहा जाता है। एक आंकड़े के मुताबिक दुनियाभर में कम से कम 30 फीसदी प्रेग्नेंसी मिसकैरेज की वजह से खत्म हो जाते हैं।
मिसकैरेज के लक्षण क्या हो सकते हैं?
•ब्लीडिंग यानि खून का निकलना
•स्पॉटिंग यानि थोड़ी मात्रा में खून का निकलना
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• शरीर के कुछ हिस्सों में पेट और कमर में दर्द का होना
• ख़ून के साथ टिश्यू का निकलना
गाइनोकॉलजिस्ट डॉ. पूजा मित्तल के मुताबिक मिसकैरेज दो स्थितियों में हो सकता है। पहली स्थिति तब जब भ्रूण ठीक हो लेकिन अन्य कुछ कारणों से ब्लीडिंग हो जाए। दूसरी स्थिति तब जब अगर गर्भ के अंदर भी भ्रूण की मृत्यु हो जाए। ऐसी परिस्थितियों में गर्भपात करवाना आवश्यक हो जाता है। कुछ परिस्थितियों में मेहनत वाला काम करने या भारी वजन उठाने या अन्य प्रकार का चोट का शिकार बन जाने से भी मिसकैरेज होने की संभावनाएं बढ़ जाती है। डॉक्टरों के मुताबिक 30 साल के बाद गर्भवती होने पर भी मिसकैरेज होने की संभावनाएं बढ़ सकते हैं।
मिसकैरेज की संभावनाओं से बचाव के लिए क्या उपाय आजमाएं?
डॉक्टरों के मुताबिक प्रेग्नेंसी का पता चलने के साथ ही पूरी सावधानियां बरतना जरूरी है।
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कुछ भी ऐसा खाना ना खाएं जिनको खाने से दस्त होने की आशंका बन सकती है
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कच्चा पपीता भी प्रेग्नेंसी के दौरान नहीं खाना चाहिए। दरअसल कच्चे पपीते में एक एन्जाइम होता है जिसके चलते मिसकैरेज हो सकता है।
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अनियंत्रित डाइबिटीज, ल्यूपस और अन्य प्रकार के ऑटो इम्यून विकारों के चलते भी मिसकैरेज हो सकते हैं इसलिए अपने डॉक्टर की परामर्श से इन बीमारियों से बचाव के उपायों का पालन करते रहें ताकि आप इन बीमारियों पर नियंत्रण रख सकें।
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थाइराइड जैसी हॉर्मोनल समस्याओं का डॉक्टर के परामर्श से नियंत्रण रखें
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प्रेग्नेंसी के दौरान अपने लाइफस्टाइल का खास ख्याल रखें। धूम्रपान, शराब का सेवन या बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं का सेवन करने से भी मिसकैरेज होने की संभावनाएं बढ़ सकते हैं। इसलिए बेहतर यही होगा कि प्रेग्नेंसी के दौरान धूम्रपान व अल्कोहल के सेवन से बचें।
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केमिकल युक्त फल, सब्जियां या अन्य प्रकार के फूड आइटम्स से प्रेग्नेंसी के दिनों में परहेज रखें। हमारा सुझाव रहेगा कि आप प्रेग्नेंसी के दिनों में ऑर्गेनिक फल और सब्जियों का ही सेवन करें।
मिसकैरेज के बाद उबरने के लिए क्या करें?
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भावनात्मक रूप से मजबूत बनें- शोक और सदमे के दौर से उबरना उतना आसान भी नहीं होता है लेकिन आपको आगे के बारे में विचार करना चाहिए। इन दिनों में आपको अपने करीबी लोगों के साथ रहने का प्रय़ास करना चाहिए। अकेलापन या खुद को अकेला महसूस करते रहना इसका समाधान नहीं हो सकता है।
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विशेषज्ञ और सामुदियिक सहायता लें- चिकित्सा या परामर्श लेने या सहायता समूहों में शामिल होने से गर्भपात से निपटने में भावनात्मक रूप से बहुत मदद मिलेगी। दोस्तों, परिवार या अन्य लोगों तक पहुंचना जो एक ही नुकसान से गुजरे हैं उनसे बातचीत करने से आपको शांति का एहसास हो सकता है।
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