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क्या बच्चों की त्वचा पर मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल सुरक्षित है? किन बातों का ध्यान रखें

क्या बच्चों की त्वचा पर मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल सुरक्षित है? किन बातों का ध्यान रखें

Published: 31/05/25

Updated: 31/05/25

त्वचा की देखभाल
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बच्चों की त्वचा संवेदनशील और नाजुक होती है. इसलिए बच्चों की नहलाने धुलाने से पहले खास ध्यान रखने की आवश्यकता होती है. वहीं, अक्सर लोग यह जानकारी चाहते हैं कि क्या बच्चों की त्वचा पर मुल्तानी मिट्टी यानी FULLER'S EARTH का इस्तेमाल सुरक्षित है. और मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल करने से पहले किस तरह की सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए. 

दरअसल, बच्चों की त्वचा वयस्कों के मुकाबले नाजुक और संवेदनशील होती है. और यही वजह है कि मुल्तानी मिट्टी का प्रयोग करने से पहले कुछ सावधानी जरूरी है. 

मुल्तानी मिट्टी का प्रयोग क्या सुरक्षित है 

मुल्तानी मिट्टी का प्रयोग 3 साल से छोटे बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता. क्योंकि 3 साल से छोटे बच्चों की त्वचा बहुत ज्यादा संवेदनशील होती है. लेकिन 3 साल से ज्यादा 12 साल तक के बच्चों के लिए इसका कम मात्रा में इस्तेमाल सुरक्षित माना जाता है. लेकिन इसका प्रयोग गुलाब जल और दूध के मिश्रण के साथ किया जाना चाहिए. और इस्तेमाल से पहले पैच टेस्ट अवश्य करना चाहिए. 

पैच टेस्ट क्या है 

पैच टेस्ट एक प्रकार का स्किन टेस्ट होता है. इसमें शरीर के किसी भी हिस्से मुंह छाती पेट छोड़कर, हाथ पर या कान के पीछे छोटा सा मुल्तानी मिट्टी के मिश्रण को बिंदी के बराबर लगाना चाहिए. अगर बच्चे को बेचैनी या परेशानी हो, लाल चकत्ते पड़े या स्किन लाल हो जाए तो प्रयोग नहीं करना चाहिए. अगर इसमें से कुछ नहीं है तो प्रयोग किया जा सकता है. 

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मुल्तानी मिट्टी के प्रयोग में आयु का विशेष ध्यान रखें 

मुल्तानी मिट्टी के मिश्रण तैयार करें. इसमें आधा चम्मच मुल्तानी मिट्टी और दो टीस्पून कम से कम गुलाब जल डाले और एक कटोरी दूध का इस्तेमाल करें. यह मिश्रण बच्चों के लिए सुरक्षित माना गया है. मिश्रण का इस्तेमाल 3 साल से 12 साल तक के बच्चों के लिए है. 

स्किन का रखें ख्याल, त्वचा के प्रकार 

मुल्तानी मिट्टी आमतौर पर तैलीय त्वचा के लिए अच्छी होती है. अगर बच्चे की स्किन संवेदनशील है या फिर रूखी है तो मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. क्योंकि इसके इस्तेमाल से त्वचा रूखी हो सकती है. 

मुल्तानी मिट्टी के प्रयोग से पहले एलर्जी की जांच जरूरी 

यूं तो मुल्तानी मिट्टी प्राकृतिक होती है, लेकिन कुछ बच्चों में एलर्जी की समस्या हो सकती है. इसलिए मुल्तानी मिट्टी के प्रयोग से पहले इसका एलर्जी टेस्ट करना आवश्यक है. एलर्जी टेस्ट भी पैच टेस्ट की ही तरह किया जा सकता है. फर्क सिर्फ इतना है कि इसका इस्तेमाल बांह के अंदर एक पैच लगाना चाहिए और 24 घंटे तक इसे लगाकर रखें. अगर इस बीच किसी भी तरह की लालिमा, जलन देखें तो मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.  

और चलिए अब आपको यह भी बता दें कि मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल करने से पहले किस तरह की सावधानियां बरतनी चाहिए. 

1. अच्छी क्वालिटी की ही मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल करें 

2. जैविक मुल्तानी मिट्टी का ही इस्तेमाल करें, बाजार में मिलने वाली कुछ मिट्टियों में केमिकल या अशुद्धियां होती हैं. इसका खास ध्यान रखें 

3. मिश्रण हल्का रखे

4. मिश्रण में गुलाब जल, दूध या शहद मिलाकर हल्का पेस्ट बनाएं. बच्चों के लिए मिश्रण बनाते समय ध्यान रखें कि इसमें नीबूं का रस या सिरका ना मिलाएं. ये त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं. 5.  मुल्तानी मिट्टी के मिश्रण का इस्तेमाल सीमित समय के लिए ही करें. मुल्तानी मिट्टी लगाकर 5 से 10 मिनट बाद धो दें. 

6. मुल्तानी मिट्टी का मिश्रण आसानी से शरीर से छूटता नहीं है. इसलिए शरीर को ठीक प्रकार से धोएं.

7. मुल्तानी मिट्टी शरीर की त्वचा से अतिरिक्त तेल सोख लेती है. इसलिए प्रयोग के बाद बच्चों को अच्छे प्रकार की क्रीम या माइल्ड मॉइस्चराइजर लगाएं जैसे एलोवेरा जेल या बेबी लोशन बगैरा.  

8. बार बार मुल्तानी मिट्टी के मिश्रण से बचे. सप्ताह में 2 या 3 ही बार इसका प्रयोग करें.  ताकि त्वचा का मॉइस्चराइजर बना रहें. 

9. संवेदनशील अंगों पर इसका इस्तेमाल कतई ना करें जिसमें आंख, घाव या शरीर के कटे हुए हिस्से पर मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल ना करें. 

10. मुल्तानी मिट्टी का प्रयोग करने के बाद इसके ठीक प्रकार से धोएं. जलन, लालिमा होने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें. 

मुल्तानी मिट्टी के इस्तेमाल करने से शरीर पर चमक आती है. साफ सफाई अच्छी होती है. रोम छिद्र भी खुलते हैं. वहीं, मुल्तानी मिट्टी का प्रयोग कुछ हालातों में कतई भी प्रयोग में नहीं लाना चाहिए.  

मुल्तानी मिट्टी का कब इस्तेमाल नहीं करना चाहिए 

1. अगर बच्चे में त्वचा की कोई समस्या है जैसे एक्जिमा, सोरायसिस या गंभीर रूप से रूखापन तो मुल्तानी मिट्टी का प्रयोग नहीं करना चाहिए. उपयोग करने से पहले बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लेनी चाहिए. 

2. अगर पैच टेस्ट में लालिमा, खुजली, जलन या चकत्ते दिखाई दें तो इस्तेमाल से बचना चाहिए. 

3. बहुत छोटे बच्चे जो 3 साल से कम है. मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.  

यह तो रही मुल्तानी मिट्टी के मिश्रण के इस्तेमाल की बात और चलिए अब आपको मुल्तानी मिट्टी के प्रयोग के फायदे को समझाते हैं. 

मुल्तानी मिट्टी के प्रयोग से होने वाले फायदे 

1. मुल्तानी मिट्टी त्वचा के अतिरिक्त गंदे तेल चिकनाई को कम कर देती है. 

2. मुल्तानी मिट्टी से त्वचा को ठंडक मिलती है. 

3. शरीर से निकलने वाले पसीने की वजह से होने वाली जलन को शांत करती है. 

4. प्राकृतिक होने के कारण रासायनिक उत्पादों की तुलना में अच्छा विकल्प है. 

मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल अगर ठीक प्रकार से किया जाए तो इससे कई तरह के फायदे मिल सकते हैं. मुल्तानी मिट्टी के प्रयोग से शरीर की दुर्गंध, पसीने से होने वाले इन्फेक्शन और खुजली से राहत मिलती है. इतना ही नहीं शरीर में प्राकृतिक खुशबू का अहसास भी होता है जो पूरे दिन तरो-ताजगी देने का काम करता है. वहीं, मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल बच्चों की त्वचा पर सावधानी रखकर किया जा सकता है. शर्ते सिर्फ यह है कि इसका सीमित मात्रा में इस्तेमाल किया जाए. वहीं, अगर त्वचा संवेदनशील है तो इसका प्रयोग डॉक्टर की सलाह के बाद ही किया जाना चाहिए. मुल्तानी मिट्टी के प्रयोग के  बाद त्वचा पर मॉइस्चराइजर जरूर लगाना चाहिए. अगर आप इन सभी बातों का ध्यान रखें तो मुल्तानी मिट्टी एक अच्छा बॉडी वॉश साबित होता है.

 

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