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आखिर क्यों ज़रूरी होते हैं घर के बड़े-बुज़ुर्ग बच्चों की परवरिश के लिए?

आखिर क्यों ज़रूरी होते हैं घर के बड़े-बुज़ुर्ग बच्चों की परवरिश के लिए?

Published: 16/11/25

Updated: 16/11/25

आजकल बदलते समय में परिवार का और उनके सदस्यों का अर्थ व भूमिका बदलती जा रही है। पहले जहाँ संयुक्त परिवार की भूमिका समझी जाती थी आज उसका स्थान एकल परिवार लेता जा रहा है। ऐसे में अभिभावक बड़े-बुज़ुर्गों का उनके बच्चों के साथ होने का महत्व भूलते जा रहे हैं।  पर बच्चों को सहज और आत्मविश्वासी बनाने में बड़े-बुज़ुर्गों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

 

1.  बड़े-बुज़ुर्गों का पूरा समय बच्चों के लिए होता है- आज के समय में अभिभावकों के पास सबसे सबसे ज़्यादा समय की कमी होती है। ऐसी में परिवार में बड़े-बुज़ुर्गों का साथ होना इस कमी को पूरा कर देता है। चूंकि बड़े-बुज़ुर्गों घर में रहकर बच्चों को पूरा समय दे पाते हैं तो बच्चे को पूरा समय मिलता है जिनकी उन्हें बहुत ज़रूरत होती है। पूरा समय मिलने से बच्चे अधिक आत्मविश्वासी बनते हैं।

2. बड़े-बुज़ुर्गों का साथ अच्छी आदतें सिखाने में मदद करता है- बच्चों के पास हमेशा किसी का साथ होना उनके आत्मविश्वास को बढ़ता है साथ ही ये बड़े-बुज़ुर्गों का साथ अच्छी आदतें सीखने के उनकी मदद करता है। चूंकि अक्सर बड़े-बुज़ुर्गों के पास बहुत ही आसान तरीके होते है जिससे वे बच्चों को अच्छी आदतें सीखा पाते हैं जैसे उनके साथ से बच्चे बड़ों की इज्ज़त करना सीखते हैं, वे उनसे बात करने का तरीका सीखते हैं।

3. बड़े-बुज़ुर्गों का साथ ज्ञान का भंडार होता है- बच्चों को बातें करना, कहानी सुनना बहुत पसंद होता है ऐसे में बड़े-बुज़ुर्गों के साथ से बढ़कर बच्चों को बेहतर साथ क्या हो सकता है। बड़े-बुज़ुर्गों के पास ढ़ेर सारा अनुभव होता है जो अनुभव कहानी के रूप में बच्चों के लिए ज्ञान का भंडार बन जाता है। उनके पास हमेशा एक साथ होता है जो अपने अनुभव और अवलोकन से उन्हें ढ़ेर सारी बातें सीखा सकते हैं। जैसे- आज के समय में बच्चों के लिए ये जानना बहुत रोचक होगा की पहले कौन-कौन से खेल खेले जाते थे और कैसे खेले जाते थे।

4. बड़े-बुज़ुर्गों का साथ दोस्तों के साथ जैसा होता है – छोटे बच्चों का दोस्त बनना और उनको समझना बहुत ज़रूरी होता है। ऐसे में समय के अभाव में अधिकतर अभिभावक ये नहीं कर पाते इस स्थिति में बड़े-बुज़ुर्गों का साथ बच्चों के साथ ये रिश्ता भी निभा पाता है। बच्चों के साथ बड़े-बुज़ुर्गों का हमेशा साथ उनपर उनके विश्वास को भी बढ़ाता है  जिससे बड़े-बुज़ुर्गों के साथ उनकी दोस्ती होना आसान हो जाता है। जब बच्चे उन्हें अपना दोस्त मान लेते हैं तो उनके साथ अपनी बातें बाँटना आसान हो जाता है।

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इसलिए घर में बड़े-बुज़ुर्गों का साथ बच्चों के परवरिश के लिए बहुत ज़रूरी हो जाता है। उनके पास हमेशा किसी का साथ होता है जो उनका ख्याल रख सकता है, उनके साथ में दोस्ती निभा सकता है, उनका साथ दे सकता है, उन्हें प्यार और मज़े से बहुत कुछ सिखा सकता है। 

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