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क्यों मनाया जाता है शहीद दिवस

क्यों मनाया जाता है शहीद दिवस

Published: 01/02/18

Updated: 01/02/18

भारत में शहीद दिवस अलग-अलग कई दिनों में मनाते हैं, लेकिन मुख्य रूप से देश में 2 शहीद दिवस को ही ज्यादा जाना जाता है। सबसे पहला शहीद दिवस (सर्वोदय दिवस) 30 जनवरी को पूरे भारत में मनाया जाता है, जबकि दूसरा शहीद दिवस 23 मार्च को मनाया जाता है। दोनों की अलग-अलग वजहें हैं, लेकिन 30 जनवरी वाले शहीद दिवस को महात्मा गांधी के साथ-साथ उन लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है, जो देश की आजादी के लिए लड़े और अपने प्राणों की बलि दे दी।
 

30 जनवरी वाले शहीद दिवस की वजह

दरअसल 30 जनवरी 1948 को बिरला हाउस में शाम की प्रार्थना के दौरान नाथूराम गोडसे ने 78 साल के महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद भारत सरकार की ओर से इस दिन को शहीद दिवस के रूप में घोषित कर दिया गया। महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए हर साल 30 जनवरी को शहीद दिवस मनाया जाता है। इस दिन महात्मा गांधी के अलावा देश की आजादी के लिए शहीद होने वाले अन्य स्वतंत्रता सेनानियों को भी श्रद्धांजलि दी जाती है।
 

23 मार्च वाले शहीद दिवस का कारण

23 मार्च 1931 की मध्यरात्रि को अंग्रेजी हुकूमत ने भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी पर लटका दिया था। इन तीनों की शहादत को श्रद्धांजलि देने के लिए 23 मार्च को भी भारत में शहीद दिवस मनाया जाता है। इसे शहीदी दिवस भी कहते हैं। भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को हुआ था। 30 अक्टूबर 1928 को हुए लाठी चार्ज से लाला लाजपत राय की मौत हो गई थी। इसके बाद भगत सिंह ने अपने साथियों राजगुरु, सुखदेव, आजाद और जयगोपाल के साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा और तेज कर दियाय था। भगत सिंह ने लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए अंग्रेज अफसर स्कॉट की हत्या की प्लानिंग की थी। पर हमले में अंग्रेस अफसर जे. पी. सैन्डर्स मारा गया। सैंडर्स हत्याकांड की जांच चलती रही, वहीं भगत सिंह आजादी की लड़ाई लड़ते रहे। 1929 में भगत सिंह ने बटुकेश्वर दत्त के साथ  मिलकर अंग्रेज सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए आज की संसद और उस वक्त की सेंट्रल असेंबली में बम फेंका और आत्मसमर्पण कर दिया। बाद में सुखदेव और राजगुरु की भी गिरफ्तारी हो गई। 2 साल तक मुकदमा चला, लेकिन जब अंग्रेज हारते दिखे तो उन्होंने सैंडर्स हत्याकांड में बिना सबूत भगत सिंह को और कुछ अन्य मुकदमों में राजगुरु और सुखदेव को एकसाथ 24 मार्च 1931 को फांसी देने का ऐलान कर दिया। विद्रोह होने के डर से अंग्रेंजों ने तीनों को एक दिन पहले 23 मार्च 1931 को ही फांसी दे दी। इसी याद में 23 मार्च को भी शहीद दिवस मनाया जाता है।
 

कुछ अन्य शहीद दिवस

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  1. 13 जुलाई – 13 जुलाई 1931 में कश्मीर के महाराजा हरिसिंह के सामने प्रदर्शन के दौरान रॉयल सैनिकों ने 22 लोगों की हत्या कर दी थी। उनकी याद में जम्मू-कश्मीर में 13 जुलाई को शहीद दिवस मनाया जाता है।
  2. 17 नवंबर – लाला लाजपत राय की पुण्यतिथि को मनाने के लिए उड़ीसा में 17 नवंबर को शहीद दिवस मनाया जाता है।
  3. 19 नवंबर – मध्यप्रदेश के झांसी में रानी लक्ष्मीबाई के जन्मदिवस 19 नवंबर को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। ये उन लोगों को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है, जिन्होंने 1857 की क्रांति में अपने प्राणों की बलि दी थी।

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