पोषक-आहार
कैसे रखें ख्याल अगर आपका बच्चा भी रख रहा है रोजा?
Published: 29/03/23
Updated: 06/11/23
अभी रमजान का पाक महीना चल रहा है। रमजान के इस महीने में दुनिया भर के मुसलमान रोजा रखते हैं और इबादत करते हैं। घर के बड़े-बुजुर्गों को रोजा रखते हुए देखकर कई बार बच्चे भी रोजा रखने की जिद ठान देते हैं। हालांकि कई माता-पिता अपने बच्चों को ये सोचकर रोजा नहीं रखने देते हैं कि कहीं उनकी तबियत खराब ना हो जाए लेकिन क्या आपको मालूम है कि बच्चों की एनर्जी लेवल बड़ो के मुकाबले ज्यादा होती है । हालांकि इस्लाम धर्म के मुताबिक घर के बीमार सदस्यों और छोटी उम्र के बच्चों को रोजा नहीं रखने की सलाह दी गई है। अगर परिवार का कोई बच्चा अपनी रजामंदी से रोजा रखने की बात कह रहा है तो हमें कुछ बातों का विशेष ख्याल रखने की आवश्यकता है। खासतौर पर इस मौसम में क्योंकि अभी गर्मी का सीजन है और सेहरी और इफ्तार के बीच 13 से 15 घंटे के बीच का भी फासला हो जाता है।
रमजान में बच्चों को रोजा रखने में ऐसे कर सकते हैं मदद
कुछ अऱसे पहले यूपी के शहर जौनपुर में 10 साल के बच्चे अदनान के रोजा रखने की खबर ने खूब सुर्खियां बटोरी थी। अदनान ने जब रोजा रखने का फैसला किया तो घर के सभी मेंबर हैरान रह गए। अदनान के माता-पिता ने पहले तो मना कर दिया लेकिन अदनान की जिद को देखकर बाद में इन्होंने भी हामी भर दी। पहले दिन दोपहर के बाद अदनान की स्थिति को देखकर उसकी मां ने रोजा तोड़ देने की सलाह दी लेकिन अदनान माना नहीं और फिर इसके बाद शाम में उसकी मां ने अपने हाथों से पकवान बना कर इफ्तार कराया। मछली शहर के रहने वाले नवील रब्बानी जिसकी उम्र महज 12 साल बताई जा रही है उसने भी इस साल पहला रोजा शुरू किया है। नवील रब्बानी के पिता ने पहले तो कम उम्र और गर्मी को देखते हुए रोजा रखने से मना किया लेकिन बाद में बच्चे की इच्छा को देखते हुए मान गए। इस तरह के कई उदाहरण देखने को मिल रहे हैं जब बच्चे अपनी इच्छा से रोजा रख रहे हैं।
- अपने बच्चे को रमजान से जुड़ी कहानियों के बारे में बताएं
- आपके पास अपने बच्चे को को अच्छी शिक्षा देने के लिए ये सबसे अच्छा मौका होता है। इस दौरान आप एक काम कर सकते हैं। इफ्तार से पहले घर के सभी मेंबर अपने दिन भर के किए अच्छे कामों का जिक्र करें और इस प्रक्रिया में बच्चे को जरूर शामिल करें। बच्चों का हौसला बढ़ाने के लिए उन्हें इनाम के तौर पर ज्यादा ईदी देने का वादा करें। इस तरह की रूटीन से आपके बच्चे के अंदर नेकी करने और अच्छा काम करने की भावना जागृत हो सकेगी।
- बच्चों का स्वभाव जिज्ञासु होता है तो संभवत: आपके बच्चे भी कौतुहलवश रमजान से जुड़े कई सवाल पूछ सकते हैं। बच्चे जो भी सवाल पूछें उसका सही और तार्किक जवाब जरूर देने का प्रयास करें।
- इफ्तार और सहरी की तैयारी पहले से कर लें ताकि आपके बच्चे को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़े। अगर संभव हो तो पहले से ही सबकुछ बना कर रखें और जैसे ही सही समय हो उनके सामने पेश कर दें।रमजान और ईद के मौके पर घर की सजावट करने के काम में अपने बच्चों को जरूर शामिल करें। आपके बच्चे को इस तरह के काम में मन भी लगा रहेगा और रमजान और ईद को सेलेब्रेट करने के लिए उन्हें हर साल इस मौके का बेसब्री से इंतजार भी रहेगा ।
रमजान के महीने में बच्चों के सेहत का ऐसे रखें ख्याल
रमजान के इस महीने में खास तौर पर सहरी और इफ्तार के खाने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। गर्मी के इस मौसम में सबसे अधिक खतरा डिहाईड्रेशन का होता है तो इसलिए अगर आपके बच्चे ने रोजा रखा है तो उसको इफ्तार औऱ सहरी के बीच के समय में ज्यादा से ज्यादा पानी पीने के लिए कहते रहें। अपने बच्चे को इस दौरान तली हुई चीजों को परोसने से बचना चाहिए। सहरी के वक्त बिरयानी, कबाब और फास्ट फूड्स से तो जितनी दूरी बना कर रखें उतना बेहतर। सहरी के समय में अंडा, रोटी, ताजे फल का सेवन करना बच्चे के स्वास्थ्य के लिहाज से भी अच्छा रहेगा। इफ्तार के वक्त अपने बच्चे को खजूर खाने के लिए जरूर दें। इफ्तार के समय नारियल का पानी और नींबू पानी भी अपने बच्चे को जरूर दें इससे डिहाइड्रेशन(Dyhydration) की समस्या नहीं होगी। और हां, एक और अहम बात की सहरी और इफ्तार के बाद अपने बच्चे को ब्रश करने के लिए कहना बिल्कुल ना भूलें ताकि किसी भी तरह के फंगल इनफेक्शन से बचा जा सके।
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