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भगवान राम की 10 बातें जो आपके बच्चे के लिए प्रेरणादायक है

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भगवान राम की 10 बातें जो आपके बच्चे के लिए प्रेरणादायक है

Published: 22/01/24

Updated: 22/01/24

भगवान राम की भक्ती में इन दिनों पूरा भारतवर्ष लीन है। कई सौ सालों के बाद अयोध्या में भगवान राम के मंदिर का निर्माण कार्य हो रहा है और 22 जनवरी 2024 को इसी मंदिर में प्रभु श्रीराम की प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम निर्धारित हो रहा है। अयोध्या में जन्मे भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम भी कहा जाता है। भगवान राम का संपूर्ण जीवन प्रेरणादायक है तभी तो हमारे बड़े बुजुर्ग हर बात में उदाहरण दिया करते थे कि संतान हो तो राम के समान। तो आइये इस ब्लॉग में हम आपको बताते हैं कि राम भगवान के जीवन चरित्र से आपके बच्चे को क्या सीखना चाहिए (What kids should learn from Lord Ram in Hindi) कैसे प्रेरित हो सकता है और उनके गुणों को अपनाकर कैसे चरित्रवान बन सकता है।

श्री राम के गुण क्या थे?/ What are the qualities of Shree Ram in Hindi?

  1. माता-पिता के परम भक्त- भगवान राम का जब राज्याभिषेक होने वाला था उस समय में ही कुछ विषम परिस्थितियों के चलते अपने पिता राजा दशरथ के आदेश पर राम को 14 वर्षों के वनवास पर जाना पड़ा। अपने पिता दशरथ की इच्छा नहीं होने के बावजूद भी उनके वचन की लाज रह जाए इसलिए राम ने सहज भाव से वनवास को स्वीकार कर लिया। राम अपने मां और पिता का अत्यधिक सम्मान करते थे। तनिक कल्पना कीजिए कि अगर राम वनवास के लिए नहीं जाते तो क्या वो रावण जैसे अहंकारी का वध कर पाते और संभवत: राम को वो मान-सम्मान कभी हासिल नहीं हो पाता जिसके चलते वो युगों से पूजित होते आ रहे हैं। राम अपने माता-पिता के हर आदेश का पालन करते थे और उनका मानना था कि माता-पिता अपने बच्चे का कभी अहित कर ही नहीं सकते हैं। आपके बच्चे के लिए राम की कहानी प्रेरित कर सकती है और वे राम से प्रेरणा लेकर अपने माता-पिता का सम्मान करेंगे

  2. 2गुरुजनों का सम्मान- राम ने हमेशा अपने गुरुजनों का सम्मान किया। अपने शिक्षा ग्रहण के दौरान गुरु वशिष्ठ और गुरु विश्वामित्र के सभी आदेशों का पालन किया इसलिए राम अपने समय के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर माने जाते हैं। शस्त्र शिक्षा के अलावा राम ने शास्त्रों का भी गुरुजनों के सान्निध्य में गहन अध्ययन किया और इसलिए राम की विद्वता को सभी नमन करते हैं। राजा दशरथ के प्रिय पुत्र और अयोध्या के राजकुमार होने के बावजूद राम ने गुरुकुल आश्रम के कठोर नियमों का पालन किया। तमाम प्रकार की बाधाओं को सहने के बावजूद राम ये जानते थे कि अगर गुरुजनों से हमें कुछ सीखना है तो धैर्य बनाए रखना होगा। राम की ये बातें आपके बच्चे के लिए भी प्रेरणादायक हो सकते हैं कि पढ़ाई के दौरान हमें पूरी तरह से ध्यान केंद्रित रखना होगा तभी लक्ष्य प्राप्ति हो सकती है।

  3. भाइयों से प्रेम- राम ने सदैव अपने छोटे भाइयों लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का ख्याल रखा। अपने छोटे भाइयों की हर सुख सुविधा का ध्यान रखा। इसलिए चारों भाईयों का प्रेम आज भी दुनिया के सामने मिसाल बना हुआ है। राम ने अपने भाइयों से कभी ईर्ष्या या द्वेष का भाव नहीं रखा और सदैव त्याग करने के लिए समर्पित रहते थे। राम को जब वनवास मिला तो उन्हें इस बात की प्रसन्नता थी कि उनके प्रिय भाई भरत को राजपाट मिल सकता है ये अलग बात है कि भरत भी राम के प्रति पूर्णतया समर्पित थे और जब तक राम वनवास में रहे तब तक भरत ने उनकी चरण पादुका को सिंहासन पर रखकर राजकाज चलाया। राम के अयोध्या लौटने पर उनका राज्याभिषेक हुआ और भरत उनके सहायक की भूमिका में आ गए। लक्ष्मण तो राम के साए की तरह सदैव साथ रहते थे। ये बातें आपके बच्चे के लिए प्रेरणादायक सिद्ध हो सकते हैं कि अपने भाई बहनों के साथ किस तरह से स्नेहपूर्ण संबंध स्थापित कर सकते हैं।
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  4. किसी के साथ भेदभाव नहीं बरतना- राम की सहिष्णुता इस बात से ही सिद्ध होती है कि उन्होंने कभी किसी के साथ गरीबी-अमीरी-जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं बरता। राम ने शबरी के झूठे बैर भी खाए और निषादराज को अपना परम मित्र माना। राम कहते थे कि सब ईश्वर की संतान हैं और सभी एक समान है। राम की ये बातें आपके बच्चे के लिए प्रेरणादायक हो सकते हैं कि हमें किसी के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं बरतना चाहिए।

  5. दयालु स्वभाव- राम अत्यंत दयालु स्वभाव के थे और उन्होंने अकारण किसी को नुकसान कभी नहीं पहुंचाया। राम के चरित्र में था कि वे सदैव सभी की मदद करते थे। रामकथा के मुताबिक ऋषि मुनि के यज्ञ में जब राक्षस विध्वंस करने आते थे तो राम चट्टान बनकर उनकी रक्षा करते थे और राक्षसों को खदेड़ कर भगा देते थे। 

  6. बहादुरी- राम निडर स्वभाव के थे और अन्याय का डट कर मुकाबला करते थे। राम अपने सामने में किसी के साथ अन्याय होते नहीं देख सकते थे। राम के ये गुण आपके बच्चे के लिए भी अनुकरणीय हैं।

  7. मित्रता का संबंध- राम अपने मित्रो के लिए सदैव उपलब्ध रहते थे। मित्रता के धर्म का राम ने आजीवन पालन किया। वानरराज सुग्रीव अपने बड़े भाई बाली के आतंक से जंगल में भागे हुए थे और बाली ने उनके हिस्से पर कब्जा जमा लिया और उनकी पत्नी बच्चे को भी जबरन कैद कर लिया था। राम ने सुग्रीव की मदद करते हुए बाली का वध करके उनको उनका राज्य वापस दिलाया। इसके अलावा विभीषण को भी उन्होंने अपना मित्र मानकर रावण वध के बाद लंका का राजा बनवाया। मित्रता सीखनी है तो राम से बेहतर उदाहरण और क्या हो सकता है भला।

  8. शत्रु के गुणों का भी सम्मान करना- राम ने जब रावण का वध कर दिया तो आखिरी समय में भी उन्होंने लक्ष्मण को उनसे शिक्षा लेने के लिए भेजा। लक्ष्मण ने जब पूछा कि रावण से भला क्या सीखना तो राम ने कहा कि भले रावण हमारा शत्रु है लेकिन वो अत्यधिक विद्वाण भी है और उसके विद्वता का सम्मान करना चाहिए। युद्ध के नियमों का पालन करते हुए राम ने मेघनाद और अन्य दैत्यों के शव को सम्मान के साथ लंका भेजवाया ताकि उनका अंतिम संस्कार नियमों के मुताबिक हो सके।

  9. सेवकों के साथ सम्मान का व्यवहार- राम भले राजकुमार और राजा रहे और उनके यहां अनेक कर्मचारी सेवा में मुस्तैद रहे लेकिन राम ने कभी उनके साथ बदसलूकी नहीं की। राम के सबसे प्रिय सेवक हनुमान थे और राम ने उनको सदैव पूरा सम्मान दिया। ये बातें सीखाती है कि भले आपका सेवक या आपके नीचे काम करने वाला कर्मचारी हो लेकिन आपका व्यवहार उनके प्रति नरम और सम्मानदायक होना चाहिए।

  10. सत्यवादिता- राम ने कभी झूठ का सहारा नहीं लिया और सदैव सत्य बोलते रहे। एक झूठ को छुपाने के लिए कई झूठ बोलने पड़ जाते हैं इसलिए राम के जीवन से प्रेरणा लेते हुए सदैव सत्य का साथ देना चाहिए।

ये बात सत्य है कि राम ने अपने जीवन में 14 साल का वनवास भी सहा लेकिन उन्होंने धैर्यपूर्वक हर कठिनाइयों का सामना किया। रामकथा के मुताबिक जिस तरह की परिस्थितियों का राम ने सामना किया उसके हिसाब से आज के युग में किसी को भी डिप्रेशन या अवसाद हो सकता है लेकिन राम जानते थे कि हमें हर परिस्थिति का सामना करना चाहिए तो ही हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। राम का संपूर्ण जीवन चरित्र अपने आप में अनुपम उदाहरण है और अपने बच्चे को यकीनन राम कथा के बारे में ज्यादा से ज्यादा बताएं ताकि उसके व्यक्तित्व पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सके।   

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