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क्यों जरूरी होता है कान या नाक छिदवाना?

Parentune Support
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Created by Parentune Support
Updated on Sep 26, 2017

क्यों जरूरी होता है कान या नाक छिदवाना

आज के दौर में नाक-कान छिदवाना भले ही एक फैशन बन चुका हो पर धार्मिक परंपराओं के अनुसार लड़कियों का नाक-कान छेदन का संस्कार उनकी शारिरिक बनावट के हिसाब से जरूरी माना गया है। महिलाओं का नाक-कान छिदवा कर उनमें तरह-तरह के गहने/छल्ले पहनना न केवल उनकी सुदंरता को बढ़ाता है बल्कि उनकी अच्छी शारीरिक सेहत के लिए भी मददगार होता है। इसी तरह लड़कों का कान छिदवाना भी उनके लिए कई तरह से फायदेमंद होता है।

 

यहाँ कान और नाक छिदवाने के अलग-अलग फायदे बताए गए हैं। पहले जानें कान छिदवाना कैसे आपके लिए फायदेमंद है-

 

  • आंखों की रोशनी बेहतर होती है

      कन-छेदन एक तरह के एक्यूपंचर का काम करता है। कान के एक खास हिस्से पर छेद करते ही यहां की नसें सक्रिय हो जाती हैं जिनका सीधा           संबंध हमारी आंखो से होता है। इनके दबने से हमारी आंखो की रोशनी बेहतर अच्छी बनी रहती है।

 

  • ध्यान लगाने की क्षमता बढ़ती है

      वैज्ञानिकों की मानें तो कन-छेदन से दिमाग में रक्त का प्रवाह बेहतर हो जाता है जिससे हमारी ध्यान लगाने की क्षमता बढ़ती है। इसीलिए पहले   समय में बच्चों को गुरुकुल भेजने से पहले से उनके कान छेदने की परंपरा थी क्योंकि यह बेहतर ज्ञान हालिस करने में मदद करता था।

 

  • शारीरिक वजन नियंत्रित रहता है

      कान के जिस खास बिन्दु पर छेद किया जाता है वह शरीर की पाचन प्रणाली से संबंधित होता है जिसकी वजह से हाजमा दुरूस्त रहता है और            वजन बढ़ने की संभावना कम होती है।

 

  • अवसाद से निपटने में मददगार

      कन-छेदन में कान की नसों पर पड़ने वाला दबाब मानसिक अवसाद की बीमारी जैसे ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (किसी भी बात की जरुरत से        ज्यादा चिंता करना), उलझन/घबराहट जैसी तकलीफों को दूर रखने में मददगार होता है।

 

नाक छिदवाना कैसे फायदेमंद है-

हिन्दू रीति-रिवाजों के अनुसार महिलाओं को नाक में लौंग या नथ पहनने की परंपरा बहुत पुरानी हैं और यह शादीशुदा महिलाओं के लिए सौभाग्य का प्रतीक है। नथ माता पार्वती को सम्मान देने के लिए भी पहनी जाती है। नथ पहनना आपके चेहरे की सुंदरता तो बढ़ाता ही है पर वैज्ञानिक रूप से भी नथ पहनने की कई वजहें बताई गई हैं।

 

  • मासिक धर्म का दर्द कम करता है

      आर्युवेद में बताया गया है कि नाक छेदन के समय एक खास हिस्से पर छेद किया जाना महिलओं को मासिकधर्म के समय होने वाले दर्द में राहत             देता है। नाक छेदन में महिला के नाक के बांई ओर छेद किया जाता है, जहाँ मौजूद नसों का सीधा संबंध गर्भाशय से होता है। ऐसा किया जाना   मासिक धर्म के दर्द के साथ प्रसव के दौरान होने वाले दर्द में भी राहत देता है।

 

  • मौसमी बदलाव से सुरक्षा देता है

      महिलाओं का शरीर बड़ा कोमल और संवेदनशील होता है जिसकी वजह से मौसम में होने वाले छोटे-छोटे बदलाव भी महिलओं के शरीर पर असर        करते हैं। नाक छेदन से महिलाओं के शरीर में बीमारी और संक्रमण से लड़ने की ताकत बढ़ती है और कफ, सर्दी जुकाम जैसे रोगों से लड़ने में            मदद मिलती हैं।

 

  • अन्य फायदे

      लौंग और नथ पेट को ठीक रखने में मदद करते हैं तथा इसे पहनने से श्वसन तंत्र सुचारू रूप से काम करता है।

 

हिन्दू शास्त्रों में लड़कियों को नाक एंव कान दोनों का छेदन जरूरी बताया गया है परंतु लड़कों के लिए नाक छिदवाने को लेकर ऐसा उल्लेख नहीं मिलता। नाक-कान छेदन कम उम्र में कराया जाना ठीक रहता है क्योंकि इस समय बच्चों की त्वचा कोमल होती है और यह आसानी से किया जा सकता है।

 

इसके अलावा छेदन निर्धारित जगह पर ही किया जाय तो फायदेमंद होता है। आजकल के युवक-युवतियां आंख की भौहें या नाभि भी छिदवा लेते हैं। यह फैशन के हिसाब से तो ठीक है पर हमारी सेहत से इसका कोई लेना-देना नहीं है।

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Comments()
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| Sep 28, 2017

@ PistaMeena generally its around 1-5 years from birth, however in different traditions and culture it varies.

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| Sep 27, 2017

Valuable information but one question when we have to do this at what age or month of a baby

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